hanuman beniwal jivan parichay-4
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—हनुमान बेनीवाल के चुनाव प्रचार को देख दंग हो गए विरोधी

जयपुर।
लोकसभा चुनाव 2019 में अत्याधुनिक संसाधनों से प्रचार की बात करें तो भाजपा के जयपुर ग्रामीण से उम्मीदवार कर्नल राज्यवर्धन सिंह का कोई मुकाबला नहीं है।

उनकी टीम न केवल हमेशा उनके साथ रहती है, बल्कि उन्होंने गुडगांव उर्फ गुरूग्राम की एक कंपनी से हायर कर रखी है, जो उनको सबसे अलग बनाती है। राज्यवर्धन की यह टीम पलक झपकते ही उनकी खबरें, सूचना, वीडियो, फोटोज सोशल मीडिया पर अपलोड कर देती है।

लेकिन इससे हटकर एक शख्स ऐसा भी है, जिसके पास भले ही हाईटैक कंपनी का सपोर्ट नहीं हो, किंतु उनके प्रचार को देखकर बड़ी राजनीतिक पार्टियों को ही नहीं, बल्कि तमाम प्रचार कंपनियों को सोचने पर मजबूर होना पड़ा है।

राजस्थान में फायरब्रांड नेता के तौर पर अपनी पहचान बना चुके नागौर से भाजपा और रालोपा के गठबंधन से निकले एनडीए के उम्मीदवार हनुमान बेनीवाल का प्रचार कई बड़े दलों और उनके नेताओं को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर देता है।

हनुमान बेनीवाल सुबह करीब 7 बजे उठने से लेकर रात को 12 बजे तक अपने समर्थकों के बीच ही रहते हैं। नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद से उन्होंने अपना जनसंपर्क अभियान शुरू किया है।

पर्चा दाखिल करने तक बेनीवाल लोगों से मीटिंग और व्यक्तिगत मुलाकातों पर ध्यान दे रहे थे। हनुमान बेनीवाल की भी सोशल मीडिया वॉर रूम की टीम है, लेकिन जो सबसे असरकारी है वह उनका खुद का और उनकी कोर टीम का जनता से सीधा संपर्क।

हनुमान बेनीवाल के बारे में कहा जाता है कि सुबह उठने के साथ ही चाय भी वो परिवार के बजाए समर्थकों के साथ पीते हैं।

समर्थकों को बेनीवाल अपने परिवार की तरह ही इज्जत और प्यार देते हैं। एक साथ बैठकर हंसी—ठिठोली करना, गप्पे हांकना और मजाक से भरपुर कहानियां सुनना और सुनाना हनुमान बेनीवाल का आम कार्यक्रम होता है।

उनके घर पर हमेशा 100—50 लोगों की मौजूदगी बनी रहती है। ऐसा तब भी होता है, जब वो जयपुर के जालुपुरा आवास पर होते हैं, और तब भी होता है जब बेनीवाल नागौर में अपने पैतृक घर पर होते हैं।

प्रचार के लिए जन संपर्क के वक्त भी बेनीवाल कई बार गांवों—ढाणियों में लोगों के बीच बैठकर गांवों की पंचायती में जुट मसगुल हो जाते हैं। लोगों के साथ सामान्य तौर उनका मिलना सबको पसंद है।

जनता के बीच हनुमान बेनीवाल कभी खुद को लोगों से अलग नहीं करते हैं। अपने समर्थकों को सेल्फी खींचने से न रोकते हैं, न कभी टोकते हैं।

समर्थक भी उनके बराबर बैठकर खुद को अपने नेता से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। यही सबसे बड़ा कारण है कि एक बार उनसे मिलने वाला व्यक्ति हमेशा के लिए उनसे ही जुडकर रह जाता है।

ऐसा नहीं है कि हनुमान बेनीवाल गुप्त मंत्रणा नहीं करते हैं, बल्कि कुछ खास लोगों से अकेले में भी बात करते हैं, किंतु उनका यह तरीका ऐसा होता है कि इंतजार कर रहे उनके सपोर्टर्स को खटकता नहीं है।

एक आम आदमी की भांति, वो हमेशा आम भाषा में ही बात करते हैं, किसी के साथ बोलने में भाषा में स्क्रूटनी करना बेनीवाल के चरित्र में ही नहीं है।

बहरहाल, 6 मई को हनुमान बेनीवाल के लोकसभा क्षेत्र, यानी नागौर में मतदान है, उसके बाद वो हरियाणा, उत्तर प्रदेश में भी भाजपा के पक्ष में चुनाव प्रचार के लिए निकले जाएंगे।

भारतीय जनता पार्टी ने उनके दौरे तय करने का काम तेज कर दिया है। इसके साथ ही राजस्थान के जोधपुर, बाड़मेर, बीकानेर, सीकर, झुंझुनूं, पाली और चूरू जिले में भी हनुमान बेनीवाल का प्रचार करने का कार्यक्रम है।

यहां पश्चिमी राजस्थान के तकरीबन सभी जिलों में बेनीवाल के बड़ी संख्या में समर्थक हैं। जिसका फायदा भी निश्चित तौर पर बीजेपी को मिलेगा।

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