राहुल गांधी के लिए मुसीबत बन सकती है आधी आबादी

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-आधी आबादी के मुद्दों पर जयपुर की प्रबुद्घ महिलाओं का राहुल गांधी को खुला खत

जयपुर। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के द्वारा बीते दिनों राजस्थान में हर जिले से एक महिला और एक युवा को टिकट दिए जाने के कथित निर्देश उनके पार्टी के लिए महंगे साबित हो सकते हैं।

मीडिया में छपी खबरों के बाद राजस्थान से कई महिलाओं ने राहुल गांधी के इस निर्देश की खुले तो पर चुनौती दी है। महिलाओं ने राहुल गांधी को एक खुला पत्र लिखकर उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अपनी राय स्पष्ट करने को कहा है।

अपने हाथों में तूलिका लेकर और अपनी कलम से समाज को झकझोरने का माद्दा रखने वाली जयपुर शहर की कुछ प्रबुद्घ महिलाओं ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को खुला खत भेजकर सीधे दो टूक शब्दों में पूछा है।

पत्र में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आने पर महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान, शिक्षा, रोजगार जैसे संवेदनशील विषयों को लेकर कांग्रेस पार्टी का क्या दृष्टिकोण रखने को कहा है।

इन महिलाओं ने कांग्रेस अध्यक्ष से कहा है कि वे अपने कांग्रेस के चुनाव घोषणा पत्र में प्रदेश की महिलाओं को यह भरोसा दिलाएं कि उनकी सरकार आने पर प्रदेश में बेटियों की सुरक्षा के लिए माकूल कदम उठाये जाएंगे।

प्रदेश में महिला चिकित्सकों की कमी को दूर किया जाएगा। महिला पुलिस बेड़े में बढ़ोतरी होगी। महिलाओं के कानूनी अधिकारों की रक्षा होगी।

घरेलू हिंसा पर अंकुश को लेकर सरकार संवेदनशील रहेगी। बालिका शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। चैन स्नेचिंग व छेड़छाड़ जैसी घटनाओं पर रोक लगेगी तथा महिला शिक्षा संस्थानों व धर्मस्थलों आदि के निकट शराब की दुकानें नहीं खुलेंगी।

जयपुर शहर की वरिष्ठ चित्रकार स्मिता शुक्ला और नीलू कनवारिया, स्वतंत्र लेखिका नीरा जैन, पत्रकार ज्योति पारीक, गीता यादव, सामाजिक कार्यकर्ता पूजा शर्मा और सोनल कुमावत ने यह पहल करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को यह पत्र लिखा है।

इस पत्र में राहुल गांधी की इस भावना का स्वागत किया गया है कि वे महिलाओं को संसद व विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण देना चाहते हैं। लेकिन महिलाओं से जुड़े ज्वलंत मुद्दों के समाधान के लिए भी कांग्रेस पार्टी को अपना व्यापक दृष्टिकोण सामने रखना चाहिए क्योंकि विगत पांच वर्ष में प्रदेश में महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद राज्य में बेटियों की सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह लगा है।

दुष्कर्म की घटनाएं बढ़ी है। साढ़े अठारह हजार प्राथमिक स्कूल बंद करने से बालिका शिक्षा को आघात पहुंचा है। प्रदेश में 60 हजार जिंदा महिलाओं की सामाजिक पेंशन उन्हें मुर्दा बताकर बंद कर दी गई।

प्रदेश में महिला चिकित्सकों और महिला पुलिस कार्मिकों की संख्या आबादी के अनुपात के मुकाबले नगण्य है। घरेलू हिंसा से पीड़िताओं को न्याय की गति धीमी है।

महिला लेखिकाओं व चित्रकारों ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से पूछा है कि वे इन हालात को बदलने के लिए क्या कदम उठायेंगे। इस बारे में अपनी पार्टी के चुनाव घोषणा पत्र में स्पष्ट करें।

वरिष्ठ चित्रकार स्मिता शुक्ला व लेखिका नीरा जैन ने इस पत्र को प्रदेश की करोड़ों महिलाओं की तरफ से एक दस्तखत बताते हुए कहा है कि महिलाएं पुरूषों से ज्यादा वोट देती हैं, इसलिए उनके मुद्दों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।

चूंकि कांग्रेस विपक्ष में है इसलिए हम कांग्रेस से पूछना चाहते हैं कि वह सरकार में आने पर क्या कदम उठाएगी। वरिष्ठ चित्रकार नीलू कनवारिया ने कहा कि प्रदेश में आदिवासी, दलित, गरीब महिलाओं के मुद्दे बहुत व्यापक हैं और उनके कल्याण की प्रतिबद्धता पर राजनीतिक दल अपना दृष्टिकोण खुलकर बतायें।

उन्होंने कहा कि एक दलित नाबालिग छात्रा डेल्टा मेघवाल जो प्रतिभाशाली चित्रकार भी थी, उसकी दुष्कर्म के बाद हत्या हो गई और यह मामला देश भर में गूंजा लेकिन सीबीआई जांच की मांग अभी तक अधरझूल में है।

पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाना सरकार का राजधर्म है जिसकी अनदेखी पीड़ादायक है।
सामाजिक कार्यकर्ता पूजा शर्मा ने कहा कि यह पत्र कांग्रेस चुनाव घोषणा पत्र समिति तक पहुंचाने के लिए राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी को भी सौंपा गया है।

इन प्रबुद्घ महिलाओं ने नेता प्रतिपक्ष के राजकीय आवास पर आकर यह पत्र उनके ऑफिस में दिया। वहीं महिला कांग्रेस की प्रदेश महासचिव व प्रवक्ता सोनाक्षी वशिष्ठ को महिलाओं के अधिकारों व मुद्दों से जुड़े इस पत्र को कांग्रेस पार्टी के मंच पर आगे पहुंचाने के लिए सौंपा गया।

सोनाक्षी वशिष्ठ ने कहा कि वे इस पत्र को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट, महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुष्मिता देव, प्रदेश अध्यक्ष रेहाना रियाज़ सहित कांग्रेस चुनाव घोषणा पत्र समिति तक भी पहुंचाएगी।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस समाज की कमजोर व गरीब महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए संवेदनशील है और महिलाओं के हरेक मुद्दे के प्रति गंभीर है।

इस मौके पर महिला पत्रकार ज्योति पारीक ने कहा कि अन्य प्रबुद्घ महिलाओं को भी इस अभियान में जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने चुनाव घोषणा पत्र में महिला हेल्पलाइन सहित युवा लड़कियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रशिक्षण एकडेमी की स्थापना, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए उच्चस्तरीय प्रशिक्षण व्यवस्था, स्वरोजगार के अवसरों पर भी फोकस करे।

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