-अरिसदा प्रदेशाध्यक्ष डाॅ अजय चौधरी ने की घोषणा: सभी चिकित्सकों से एकजुट होकर विरोध करने का आह्वान
जयपुर।

आॅल राजस्थान इनसर्विस डाॅक्टर्स एसोसिएशन (अरिसदा) के प्रदेशाध्यक्ष डाॅ अजय चौधरी ने चिकित्सा विभाग में सेल्फी से उपस्थिति का विरोध करते हुए इसे चिकित्सकों के सम्मान पर करारी चोट बताया है।

उन्होंने कहा कि चिकित्सकों की उपस्थिति को शंकापूर्ण दृष्टि से देखा जाना गलत है। चिकित्सक सेल्फी अटेडेंस का पूरजोर विरोध करेंगे और रविवार से चिकित्सक सैल्फी से उपस्थिति नहीं दर्ज कराएंगे।

अरिसदा अध्यक्ष ने कहा की हम इंतज़ार कर रहे थे कि राज्य में चुनावों का दौर समाप्त होते ही राज्य सरकार से हमारी लम्बित मांगों, जिनमे एकल पारी प्रमुख है, पर चर्चा कर मरीज़ और चिकित्सक दोनो के लिए फ़ायदेमंद साथ ही राज्य का स्वास्थ्य प्रबंधन सुधारने में हितकारी एकल पारी व्यवस्था लागू करवाए …पर ठीक उलट हो रहा है।

हाल ही में स्वास्थ्य विभाग के एक आला अधिकारी द्वारा जारी अजीब निर्देश से फिर से चिकित्सकों के आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाने का प्रयास किया गया है।

ये तुगलकी फरमान कि कारागृह के बंदियों की तरह चिकित्सक और चिकित्सा कर्मी दिनभर हाजरी ही प्रेषित करते रहे और सेल्फ़ी फ़ोटो से अपने होने को ही प्रमाणित करें।

उस वक़्त अपने उपचार के लिए आए मरीज़ों को फ़ोटो सेशन होने तक इंतज़ार करवाए। ये मानमर्दन की पराकाष्ठा तो है ही साथ ही पीड़ित मरीज़ के साथ भी क्रूर बर्ताव। इस आदेश से चिकित्सक और चिकित्सा कर्मी आहत है उनके भारी रोष है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी चिकित्सक संगठित हैं। विभाग के उच्चाधिकारी उल्टे सीधे प्रेक्टिकल चिकित्सकों पर कर उनको बेवजह परेशान कर रहे हैं।

उन्होंने प्रदेश भर की जिला इकाइयों के प्रतिनिधियों से असहयोग आंदोलन शुरू करने और हर जिले में संघर्ष करने के लिए तैयार रहने का आह्वान करते हुए कहा कि चिकित्सकों के साथ जो अपनामजनक सलूक किया जा रहा है, वह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि चिकित्सकों की सैलरी, उपस्थिति रजिस्ट्रर में हस्ताक्षर दर्ज करने से ही बनती है। रजिस्ट्रर की पुष्टि के लिए हर मुख्यालय पर संस्था अध्यक्ष की नियुक्ति है और संस्था अध्यक्ष ही आर.एस.आर. नियमों के अनुसार उपस्थिति को वेरीफाई करने के लिए अधिकृत हैं।

उच्चाधिकारियों को उपस्थिति चैक करने का शौक है तो वे संस्था का निरीक्षण कर उपस्थिति वेरीफाई कर सकते हैं।

सेल्फी के माध्यम से उपस्थिति प्रमाणित करने के लिए आर.एस.आर. में बदलाव करना होगा। राज्य के चिकित्सक और चिकित्साकर्मी भी अन्य सरकारी अधिकारियों कर्मचारियों की तरह राज्य के सरकारी नुमाइंदे है उन पर भी अन्य सभी कर्मचारियों की तरह की व्यवस्था और नियम लागू करने होंगे।

अकेले चिकित्सा विभाग ही गिनीपिंग नहीं है कि जो आए दिन उस पर नितनए प्रयोग किए जाए।
उन्होंने कहा कि उपस्थिति प्रमाणित करना संस्थाध्यक्ष का कार्य है। उनका सहयोग करने के लिए उच्चाधिकारियों की फौज है।

उन्हें हर संस्था विजिट कर अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।अगर सेल्फी से ही संस्थाओं के कार्य चलने लगेंगे तो उच्चाधिकारियों का क्या काम रह जाएगा।

उन्होंने प्रदेश के चिकित्सकों से अपील करते हुए कहा कि वे मरीज़ की सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के अनुसार पीड़ित मानवता की सेवा जारी रखे किंतु रविवार से किसी प्रकार की सेल्फ़ी ना भेजें।

उन्होंने इस मुददे पर प्रदेश के सभी नर्सिंग और पैरा मेडिकल संगठनों से संघठित हो कर आत्मसम्मान की रक्षा की इस जंग में आगे आने की अपील करते हुए चिकित्सकों और चिकित्सकर्मियों से एकजुट होने का आह्वान किया है।

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