5 march bharat band

नई दिल्ली।

अप्रैल 2017 में इलाहाबाद हाईकोर्ट (ilahabad highcourt) के फैसले पर मुहर लगाते हुए शीर्ष अदालत (supreme court) के द्वारा अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से अनुदानित उच्च शिक्षण संस्थानों (higher education institution) में होने वाली शिक्षक भर्ती (teachers recruitment) को लेकर दिए गए फैसले के खिलाफ कल भारत बंद का आह्वान किया गया है।

संविधान बचाओ संघर्ष समिति ने दावा किया है कि देश की करीब दो दर्जन सामाजिक संस्थाओं द्वारा इस बंद को समर्थन दिया गया है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस बंद के दौरान केवल विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा अनुदानित उच्च शिक्षण संस्थान ही बंद रहेंगे, या सभी शिक्षण संस्थानों को बंद किया जाएगा, अथवा सभी प्रतिष्ठानों को बंद करने का काम किया जाएगा?

संविधान बचाओ संघर्ष समिति ने यह भी दावा किया है कि 13 पॉइंट रोस्टर के अलावा हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा पिछड़े सवर्ण वर्ग को दिए गए 10% आरक्षण को लेकर भी इसी बंद के द्वारा विरोध किया जाएगा।

दरअसल, Allahabad high court द्वारा अप्रेल 2017 में एक याचिका पर सुनवाई करते हुए 200 पॉइंट रोस्टर को निरस्त कर 13 पॉइंट रोस्टर लागू किया था।

बाद में इसको सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, लेकिन शीर्ष अदालत ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सितंबर 2018 में इसी को लागू कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ मानव संसाधन विकास मंत्रालय एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई, लेकिन 4 दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने दोनों याचिकाओं को खारिज करते हुए अपने पूर्व फैसले को लागू करने के लिए यूजीसी को निर्देश दे दिए।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में पहली याचिका दाखिल किए जाने से लेकर अब तक देश के ऐसे उच्च शिक्षण संस्थानों में होने वाली करीब 6000 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया रुकी हुई है।

अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं का केंद्र सरकार से अनुरोध है कि इस मामले को लेकर अध्यादेश लेकर आए और उसे कानूनी अमलीजामा पहनाने का काम करें।

आपको यह भी बता दें कि 13 पॉइंट रोस्टर लागू होने से उच्च शिक्षण संस्थानों में संस्था को यूनिट नहीं मानकर विभागों को अलग-अलग यूनिट के हिसाब से भर्ती की जाती है, जिसके चलते ऐसी भर्तियों में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों का पार्टिसिपेशन होना ही बेहद कठिन हो जाता है।

इन संगठनों के समर्थन का किया दावा

दावा किया जा रहा है कि बामसेफ के समस्त आफसूट विंग सहित भीमसेना, बौद्ध विहार प्रबंधन समिति, ओबीसी महासभा, जयस, राष्ट्रीय ओबीसी महासभा, संत रविदास समाज संगठन, गोंडवाना महासभा, युवा महार प्रकोष्ठ, गुरूद्वारा प्रबंधन समिति, फूले साहू अंबेडकर वरिष्ठ नागरिक संघ, माता रमाई उत्थान समिति, मालवी सेन समाज, पंचप समाज संगठन मुलताई, भारत मुक्ति मोर्चा, बहुजन क्रांति मोर्चा, भारतीय युवा मोर्चा, भारतीय बेरोजगार मोर्चा, भारतीय विद्यार्थी मोर्चा, राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद, राष्ट्रीय आदिवासी छात्र संघ, राष्ट्रीय मूल निवासी महिला संघ, इंडियन मेडिकल प्रोफेशनल एसोसिएशन, इंडियन इंजिनियरिंग प्रोफेशनल एसोसिएशन, राष्ट्रीय मूल निवासी बहुजन कर्मचारी संघ, प्रोफेसर्स टिचर्स एंड नॉन टीचिंग एसोसिएशन, बुद्धिस्ट इंटरनेशनल नेटवर्क, राष्ट्रीय ऑटो चालक संघ, बामसेफ पेंशनर संघ, संघमित्रा स्व सहायता समूह जय प्रकाश वार्ड बैतूल, नव युवक बौद्ध भजन मंडल थावड़ी, भीम बाबा भजन मंडल नयेगांव रोंढा, लोहार समाज संगठन बैतूल, बहुजन मुक्ति पार्टी, श्रीराम नवयुवक भजन मंडल मंडईबुुजुर्ग सहित अनेकों संगठनों ने समर्थन दिया है।

पिछले साल दो बार हुआ था ‘भारत बंद’

उल्लेखनीय है कि साल 2018 में 2 अप्रैल और 10 अप्रैल को दो बार भारत बंद हो चुका है। उस दौरान 2 अप्रैल को देशव्यापी बंद के दौरान हुई झड़पों में 9 लोगों की जान चली गई थी। हालांकि, 10 अप्रैल को हुए भारत बंद को बेहद शांतिपूर्वक निपटा दिया गया था।

तभी भी सुप्रीम कोर्ट के द्वारा एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज होने पर तुरन्त गिरफ्तारी की धारा को निरस्त किए जाने के खिलाफ इन दोनों वर्गों द्वारा भारत बंद किया गया था।

2 अप्रैल को हुए भारत बंद के विरोध में ओबीसी और स्वर्ण वर्ग ने 10 अप्रैल को भारत बंद किया था। दोनों बंद का देश में व्यापक असर हुआ था।