bjp congress rlp rajasthan
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जयपुर।
नागौर में कांग्रेस द्वारा ज्योति मिर्धा को टिकट देने के कारण खींवसर विधायक और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल और कांग्रेस के बीच गठबंधन भी धरा रह गया।

बेनीवाल ने नागौर, पाली और बाड़मेर की तीन सीटों पर गठबंधन करने का कांग्रेस को प्रस्ताव दिया था, लेकिन पहले नागौर और फिर ज्योति मिर्धा के भाजपा में जाने के संकेतों ने कांग्रेस की हवा पतली कर दी। आखिर कांग्रेस को बेनीवाल का प्रस्ताव पूरी तरह से खारिज कर ज्योति को टिकट देना ही पड़ा।

गौरतलब यह है कि विधानसभा चुनाव में 57 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली आरएलपी को 8 लाख से ज्यादा वोट मिले थे। जिसके दम पर बेनीवाल कांग्रेस से सीटों की बात कर रहे थे, लेकिन बात नहीं बनी।

हालांकि, विधानसभा और लोकसभा में भारी अंतर होता है, लेकिन यह भी याद रखना चाहिए कि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के सीआर चौधरी के सामने ज्योति मिर्धा को हराने में बेनीवाल ने बड़ भूमिका निभाई थी।

अब यदि बेनीवाल फिर से नागौर की सीट पर खड़े होतो हैं तो निश्चित तौर पर कांग्रेस को नुकसान होगा। वैसे भी देश अभी राष्ट्रभक्ति में डूबा हुआ है, तो युवाओं का रुझान पहले ही भाजपा की तरफ ज्यादा है। बेनीवाल का ताल ठोकना ज्योति को संकट में डाल सकता है।

बाड़मेर में भले ही कांग्रेस ने मानवेंद्र सिंह को टिकट दे दिया हो, लेकिन यहां पर भी जाट वोट बैंक और मानवेंद्र सिंह का बार—बार बदलना भी अच्छे संकेत नहीं हैं। जसोल परिवार का रुतबा भी अब कमजोर होने लगा है। उपर से राजपूतों का भाजपा के साथ होना और बेनीवाल का संकल्प भी कांग्रेस को नुकसान पहुंचाएगा।

पाली की सीट पर जाति का फेक्टर बड़ा है। यहां पर जाट (kisan) सबसे बड़ी जाती है। कांग्रेस ने इसका लाभ उठाने के लिए बद्री जाखड़ को टिकट दिया है, लेकिन यहां पर बेनीवाल की पार्टी का बड़ी मात्रा में वोट ​मिले थे, जो लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए ही परेशानी करेंगे।

इसके साथ ही आरएलपी का सीकर, झुंझुनू, चूरू, अजमेर, जोधपुर, बीकानेर, जोधपुर में अच्छा खासा दखल है। निश्चित तौर पर यह दखल कांग्रेस के लिए ही परेशानी करेगा। सत्ता विरोधी लहर का फायदा उठाने की फिराक में कांग्रेस के लिए बेनीवाल बड़ी मुसीबत बन सकते हैं।

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