क्या इस तरह मिल पाएगी वसुंधरा राजे को झालरापाटन से मात?

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जयपुर/झालावाड़।

लगातार 3 बार से विधायक बनकर दो बार प्रदेश की मुख्यमंत्री रहने के बाद राजस्थान की तीसरी बार बागडोर संभालने की तैयारियों में जुटीं मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को अपने ही विधानसभा क्षेत्र झालरापाटन में चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। झालरापाटन उसी झालावाड़ जिले में है, जहां

वर्तमान सरकार द्वारा आईपीएस पंकज चौधरी फील्ड पोस्टिंग नहीं दिए जाने से आहत उनकी पत्नी मुकुल पंकज चौधरी ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ झालरापाटन से विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। केवल एलान ही नहीं किया है, बल्कि चुनाव को लेकर करीब 1 महीने से क्षेत्र में सघन दौरे करने में जुटी हुई हैं।

वैसे तो भारत के राजनीतिक इतिहास में ऐसे कम ही मौके आए हैं, जब किसी मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री को कोई पहली बार चुनाव लड़ने वाला चेहरा मैदान में मात दे दें। लेकिन कुछ उदाहरण ऐसे भी मिले हैं, जहां पर भारत का लोकतंत्र नए चेहरों को सामने लाकर खड़ा कर देता है।

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जहां पर अपने कार्यों के चलते राजस्थान में लगातार दूसरी बार और कुल तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने के लिए प्रयास कर रही हैं, वहीं उन्हीं की विधानसभा क्षेत्र में मिलने वाली नई चुनौती को देखते हुए कार्यकर्ताओं ने मोर्चा संभाल लिया है।

आईपीएस पंकज चौधरी के साथ प्रदेश सरकार द्वारा किए गए कथित दोहरी व्यवहार के कारण न केवल आईपीएस चौधरी खुद आते हैं, बल्कि उनकी धर्मपत्नी मुकुल पंकज चौधरी के नए भी राज्य सरकार पर एक योग्य आईपीएस अफसर को बिना वजह दंडित करने का आरोप लगाते हुए इसके लिए सीधे तौर पर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को जिम्मेदार ठहराते हुए उन्हीं के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है।

बीते 5 साल तक लगातार अपनी सरकार और मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल कर बैठे पंकज चौधरी और उनकी पत्नी कि यह प्रयास कितने कारगर होंगे? यह अभी भविष्य के गर्भ में है, लेकिन झालरापाटन के लोगों के द्वारा मुकुल पंकज चौधरी के पक्ष में माहौल बनने लगा है। यह माहौल मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के लिए चुनौती तो है ही साथ ही साथ उनका राजनीतिक केरियर भी इससे तबाह हो सकता है।

इधर, राजनीतिक गलियारों में चर्चा यह भी है कि आईपीएस पंकज चौधरी और उनकी मुकुल चौधरी को झालरापाटन में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल भी समर्थन दे रहे हैं। अगर यह बात सच है तो निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के लिए झालरापाटन से जीतकर चौथी बाहर विधायक बन पाना इतना आसान नहीं होगा।

सीएम वसुंधरा राजे के करियर की बात करें तो उनको 1984 में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल किया गया था। इसके बाद 1985-87 के बीच वह भाजपा युवा मोर्चा राजस्थान की उपाध्यक्ष रहीं। साल 1987 में वसुंधरा राजे राजस्थान प्रदेश भाजपा की उपाध्यक्ष बनीं।

इसके बाद उनकी कार्यक्षमता को देखते हुए पार्टी ने वर्ष 1998-1999 में अटल बिहारी वाजपेयी मंत्रिमंडल में विदेश राज्यमंत्री बनाया गया। वसुंधरा राजे को अक्टूबर 1999 में फिर केंद्रीय मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री के तौर पर स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया।

यह है राजनीतिक जीवन

  • 1985-90 सदस्य, 8वीं राजस्थान विधानसभा रहीं।
  • 2003-08 सदस्य, 12वीं राजस्थान विधान सभा में झालरापाटन से रहीं।
  • 2008-13 सदस्य, 13वीं राजस्थान विधान सभा झालरापाटन से थीं।
  • 2013 सदस्य, 14वीं राजस्थान विधानसभा झालरापाटन से रहीं।
  • 1989-91 : 9वीं लोक सभा सदस्या रहीं थीं।
  • 1991-96 : 10वीं सदस्या थीं।
  • 1996-98 : 11वीं लोक सभा सदस्या रहीं।
  • 1998-99 : 12वीं लोकसभा सदस्या थीं।
  • 1999-03 : 13वीं लोकसभा सदस्या रहीं।