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जयपुर।

राजस्थान में सरकार बदलते ही एक चर्चा फिर से जोर पकड़ने लगी है, जो 2013 में सरकार बदलने के साथ ही अमल में लाई गई थी।

तब नवनियुक्त मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के द्वारा लगाई गई ब्यूरोक्रेसी को एक ही झटके में उथल-पुथल कर दिया था।

तत्कालीन प्रदेश के पुलिस महानिदेशक हरीश मीणा को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने शपथ ग्रहण के बाद दूसरा आदेश निकालकर पद से हटाते हुए जेल डीजीपी बना दिया था।

हालांकि कुछ समय बाद हुए लोकसभा चुनाव के दौरान हरीश मीणा ने वीआरएस लेकर उसी भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर टोंक-सवाई माधोपुर से लोकसभा सांसद बनने में सफलता पाई, जिस पार्टी की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने उनको डीजीपी के पद से हटाया था।

इसके बाद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कुछ समय बाद ही तत्कालीन मुख्य सचिव के चले जाने के बाद अपने पसंदीदा आईएएस राजीव महर्षि और उनके केंद्र में चले जाने के कारण कुछ समय बाद ही सीएस राजन को 13 माह के लिए मुख्य सचिव बनाया था।

आज अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। इस शपथ के साथ ही लोगों में एक बार फिर से यही चर्चा शुरू हो गई है कि क्या नई सरकार वसुंधरा राजे की तरह ही ब्यूरोक्रेसी की लीडरशिप फॉर चेंज करेगी?

आपको बता दें कि वर्तमान में राजस्थान पुलिस के पुलिस महानिदेशक के पद पर ओ पी गलहोत्रा हैं, जबकि मुख्य सचिव के पद पर डीबी गुप्ता मौजूद हैं।

उल्लेखनीय है कि राजस्थान में सरकारी बदलने के साथ ही आईएएस और आईपीएस अफसरों के बड़े पैमाने पर तबादले होते हैं। सरकारें अपने अपने हिसाब से अधिकारियों का चयन करती है।

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