Jaipur

भारतीय जनता पार्टी के राजस्थान इकाई अध्यक्ष मदन लाल सैनी का सोमवार को शाम निधन हो गया आज दोपहर बाद उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

पार्टी अध्यक्ष को लेकर भारतीय जनता पार्टी में जा मंथन शुरू हो गया है। तीन नेताओं के नाम सबसे आगे हैं। जिनमे आमेर से विधायक और प्रदेश प्रवक्ता सतीश पूनिया और जयपुर ग्रामीण से सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ का नाम आगे है।

वहीं मदनलाल सैनी के निधन के बाद भाजपा कार्यकर्ता इस बात की भी चर्चा कर रहे हैं कि क्या प्रदेश बीजेपी मदन लाल सैनी की आखिरी इच्छा को पूरा करेगी?

दरअसल, भारतीय जनता पार्टी प्रतिवर्ष मीसा बंदियों का सम्मान करती है, जो इंदिरा गांधी द्वारा देश पर थोपे गए आपातकाल के दौरान 1975 में जेल गए थे।

भारतीय जनता पार्टी इस कार्यक्रम में उन सभी लोगों का सम्मान करती है जो न केवल भारतीय जनता पार्टी से संबंधित हैं, बल्कि इनसे अलग लोग, जो उस वक्त जेल जाने वाले थे, उनको भी सम्मानित करती है।

इसी सम्मान को लेकर 14 जून को तत्कालीन अध्यक्ष मदन लाल सैनी ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि पार्टी हर साल की भांति इस बार भी सभी मीसा बंदियों का सम्मान करेगी।

पत्रकारों के एक सवाल पर जवाब देते हुए मदनलाल सैनी ने कहा था कि पार्टी के पूर्व दिग्गज घनश्याम तिवाड़ी, जो कि अब कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं, उनका भी सम्मान किया जाएगा?

किंतु सैनी के बयान के बाद सोमवार को ही बीजेपी के शहर अध्यक्ष मोहनलाल गुप्ता ने एक बयान देकर सबको चौंका दिया था। गुप्ता ने कहा कि था तिवाड़ी अब पार्टी में नहीं है, वो कांग्रेस पार्टी का दामन थाम चुके हैं इसलिए घनश्याम तिवाड़ी का सम्मान नहीं किया जाएगा।

अब सवाल यह उठता है कि क्या पार्टी के द्वारा अध्यक्ष मदन लाल सैनी के बयान को उनके जाने के साथ ही भुला दिया जाएगा, या गुप्ता को अपना बयान वापस लेना होगा?

उल्लेखनीय है कि घनश्याम तिवाड़ी और मदन लाल सैनी ने कॉलेज की पढ़ाई एक साथ की थी। साथ ही दोनों ने राजनीति में प्रवेश भी एक साथ किया था।

दोनों ही नेता सीकर जिले से आते हैं। दोनों की दोस्ती तब से लेकर अब तक प्रगाढ़ रही है। दोनों ही संघ के पुराने कार्यकर्ता रहे हैं।

राज्यसभा सांसद बनने से पहले मदन लाल सैनी सीकर से जयपुर और जयपुर से वापस सीकर बस में सफर किया करते थे।

उनकी सादगी को लेकर बीजेपी में सभी पदाधिकारी और कार्यकर्ता मुक्त कंठ से प्रशंसा करते रहे हैं।

आपको बता दें कि घनश्याम तिवाड़ी की तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के साथ पटरी नहीं बैठने के कारण पिछले साल उन्होंने पार्टी छोड़ कर खुद की पार्टी का गठन किया था।

उनकी पार्टी को राजस्थान में एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हुई। इसके बाद लोकसभा चुनाव से बिल्कुल पहले घनश्याम तिवाड़ी ने कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया था।