क्या बीजेपी या कांग्रेस पार्टी का कोई नेता बोतल से पानी पी पाएगा?

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—हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी को मिला है बोतल का चुनाव चिन्ह

जयपुर। खींवसर से निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल की नए सियासी दल, ‘राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी’ को मिला चुनाव चिन्ह चुनाव आयोग के लिए परेशानी का सबब बन सकता है।

बेनीवाल की पार्टी को मिला चुनाव चिन्ह ‘बोतल’ चुनाव प्रचार के दौरान दिक्कत करेगा। इस बीच ऐसा सुनाई देने लगा है कि कांग्रेस और भाजपा के कार्यकर्ताओं को भी ‘बोतल’ के द्वारा बेनीवाल के प्रचार से बचने के लिए बोतल से परहेज करने की हिदायत दी जाने लगी है।

बीते कुछ वर्षों में राजनीतिक लोगों द्वारा केवल बोतल से पानी पीये जाने का चलन बढ़ा है। इसको स्टेटस सिंबल माना जाने लगा है, तो साथ ही दूसरे संसाधन भी चलन से बाहर हो गए हैं। ऐसे में स्टेज पर, मंच पर सम्मेलनों, प्रचार रैलियों में पीने के लिए बोतलों की भरमार होती है।

अब, जबकि बोतल का चिन्ह बेनीवाल की पार्टी को अलॉट हो चुका है, तो सबसे पहली परेशानी चुनाव आयोग की है। हनुमान ‘बेनीवाल’ की रणनीति है कि सभी प्रचार सभाओं में उनके कार्यकर्ता पीने के लिए लोगों को ज्यादा से ज्यादा पानी की बोतलें बांटें।

इससे दो फायदे होने वाले हैं। पहला किसी को प्यासा नहीं रहने दिया जाएगा, और दूसरा पार्टी का प्रचार भी होता रहेगा। अब यह चुनाव आयोग को तय करना है कि हनुमान बेनीवाल की पार्टी के बोतल से होने वाले प्रचार को कैसे रोका जाए?

पिछले माह की 5 तारीख को आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद से चुनाव आयोग अन्य सियासी दलों पर शिकंजा कसने का काम कर रहा है। लेकिन बेनीवाल की पार्टी को मिले चुनाव चिन्ह को रोकना अब चुनाव आयोग के लिए भी टेढी खीर साबित हो सकता है।

अगर बेनीवाल या अन्य दलों की चुनाव रैलियों में पानी की बोतलों पर रोक लगाई जाती है, तो लोगों के प्यासा रहने का संकट खड़ा हो जाएगा। और अगर बोतलों से पानी पिलाया जाएगा, तो बेनीवाल की पार्टी के चुनाव चिन्ह का स्वत: ही प्रचार होना तय है।

ऐसी स्थिति से निपटने के लिए या तो रैलियों में पीने के पानी के लिए बोतलों के बजाए दूसरे साधनों पर विशेष इंतजामात किए जाएंगे, या फिर बोतल के द्वारा होने वाले प्रचार को रोकने के लिए कोई और उपाय खोजना होगा।

बताया जा रहा है कि पार्टी के ऐलान के वक्त, 29 अक्टूबर को ‘बेनीवाल’ ब्रांड से पानी बोतलों को खूब बेचा गया था। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या चुनाव आयोग ‘बेनीवाल’ ब्रांड की बोतलों पर रोक लगाएगा, या पानी की सभी बोतलों को बंद करेगा?

बहरहाल, बेनीवाल के समर्थक बेहद खुश हैं कि उनकी पार्टी का प्रचार सभी दलों के लोग खुलेआम करेंगे। इसमें कोई दोहराय नहीं कि जैसे ही बोतल किसी के हाथ में आएगी, तो जुबान पर बेनीवाल की पार्टी का जिक्र होना तय है।

पीएम मोदी द्वारा स्वच्छ भारत अभियान के दौरान झाडू हाथ में उठाने के वक्त लोगों ने इसको आप के प्रचार की बातें कहीं थीं, लेकिन मोदी ने अभियान को इतना बड़ा कर दिया कि आप पार्टी की झाडू काफी नीचे रहा गई।

लेकिन जब बात बोतल कि हो रही हो, ऐेसे में हर हाथ को बोतल से रोक पाना कैसे संभव होगा? इसके विरोध में कोई ऐसा अभियान चलाना मुश्किल है, जिससे बेनीवाल की पार्टी के प्रचार को रोका जा सके।

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