Jaipur.

माना जाता है कि राजनीति में न तो कोई स्थायी दोस्त होता है न ही कोई स्थायी दुश्मन। लेकिन अब तो विचारधारा पर भी सवाल उठने लगे हैं। यह सवाल उठे हैं भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी के नेताओं में आए बदलाव के चलते।

दरअसल राजस्थान विधानसभा में माकपा विधायक दल के नेता बलवान पूनिया इन दिनों अपनी जैकेट से चर्चा में आए हैं और उनकी बदली हुई लाइफ स्टाइल के साथ ही अनोखी जैकेट ने यह सवाल उठाये हैं।

अब चर्चा इस बात की हो रही है कि माकपा नेताओं में यह बदलाव सिर्फ लाइव स्टाइल तक सीमित है, या फिर मोदी के विरोधी अब मोदी के फॉलोअर भी हो रहे हैं?

यह हैं बलवान पूनिया। अभी तक किसानों के साथ किसानों के लिए संघर्ष करते आए पूनिया माननीय सदस्य हो गए हैं, और उन्हें यह ओहदा मिला है विधानसभा चुनाव जीतने के बाद।

यह बात सही है कि एक विधायक अपने क्षेत्र की जनता का प्रतिनिधित्व करता है और कई बार समय के साथ उसमें बदलाव भी आते हैं, लेकिन बलवान पूनिया जैसे कामरेड नेता में इतनी जल्दी बदलाव आएगा यह उनकी पार्टी को भी नहीं पता था।

अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर इस कामरेड में किस बात का बदलाव आ गया। तो आप खुद ही देखिए। अब बलवान पूनिया अपना नाम लिखी हुई जैकेट पहनने लगे हैं।

यह नाम किसी स्याही या पेन्ट से नहीं लिखा है, बल्कि इस जैकेट के कपड़े की बुनाई ही इस अनोखे तरीके से हुई है, जिसमें बलवान पूनिया के नाम का एक-एक अक्षर कतारबद्ध तरीके से लिखा है।

इस जैकेट को पहनने के बाद बलवान पूनिया पर एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या वे मोदी के फॉलोअर हो गए हैं?

दरअसल जब प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने अपना नाम लिखा हुआ इस तरह का सूट पहना था तब माकपा समेत तमाम विपक्षी पार्टियों ने उन पर सवाल उठाये थे।

अब कामरेड नेता इस तरह के कपड़े पहन रहे हैं तो इसे क्या माना जाए? क्या वे मोदी का विरोध करते-करते अब उनके फॉलोअर हो गए हैं? या फिर वे अपनी विचारधारा से दूर हो रहे हैं?

इस सवाल पर खुद कामरेड बलवान पूनिया कहते हैं कि वे मोदी के फॉलोअर तो कतई नहीं हैं, लेकिन जब जैकेट को लेकर उनकसे पूछा गया तो वे कहते हैं कि यह तो उनके किसी समर्थक ने उन्हें भेंट की थी।

अपने विधायक का यह आचरण माकपा नेताओंं के लिए भी चौंकाने वाला है। पहले तो माकपा नेता इस बात को मानने के लिए ही तैयार नहीं थे कि कोई कामरेड इस तरह की लाइफ स्टाइल के प्रभाव में भी आ सकता है।

लेकिन जब उन्होंने पता किया तो पार्टी के ही कुछ लोग दबी ज़ुबान में इसकी तस्दीक करने लगे। अब माकपा नेता संजय माधव कहते हैं कि बलवान पूनिया पहली बार विधायक बने हैं और अति उत्साह में उन्होंने इस तरह की कोई जैकेट पहन ली होगी।

हालांकि संजय माधव यह भी कहते हैं कि एक कामरेड नेता को ऐसे कपड़े पहनाना शोभा नहीं देते और न ही यह कामरेड की लाइफ स्टाइल का हिस्सा हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर बलवान पूनिया ने ऐसा किया है तो पार्टी उन्हें सुधार के निर्देश भी देगी।

बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष मदनलाल सैनी कहते हैं कि अपनी विचारधारा छोड़ने वालों में सबसे पहले किसी का नाम आता है तो वह कामरेड नेता ही हैं।

सैनी कहते हैं कि कामरेड बात तो साम्यवाद की और समानता की करते हैं, लेकिन कई बार उनके नेताओं के आचरण में ऐसा कुछ नहीं दिखता।

विधानसभा में पहली बार पहुंचे माकपा नेता और भादरा विधायक बलवान पूनिया किसानों की बात करते-करते कब किसानों से दूर होने की तरफ़ बढ़ गए इसका अन्दाज़ा खुद पूनिया को भी नहीं रहा।

एफएफआई में छात्र राजनीति के दौर में विचारधारा को मजबूती से आत्मसात करने की बात कहने वाले कामरेड की बदली हुई लाइफसल्टाइल अब विचारधारा के प्रति उनके समर्पण पर सवाल उठा रही है।

सवाल यह कि क्या बलवान पूनिया वाकई कामरेड हैं या सिर्फ छद्म कामरेड का स्वांग रच रहे हैं?

अधिक खबरों के लिए हमारी वेबसाइट www.nationaldunia.com पर विजिट करें। Facebook,Twitter पे फॉलो करें।