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जयपुर।

आज बीजेपी टिकटों को लेकर राजधानी में सीएम वसुंधरा राजे और मदनलाल सैनी समेत कई नेताओं की मौजूदगी में उच्च स्तरीय मंथन बैठक चल रही है।

बैठक के बाद अंतिम सूची आलाकमान को भेज दी जाएगी, लेकिन इसी सूची में संभावित एक नाम को लेकर भारी विरोध हो रहा है। मज़ेदार बात यह है कि विरोध ऐसे विधायक का हो रहा है, जो निवर्तमान विधानसभा में बीजेपी ही नहीं, बल्कि पूरे सदन में सबसे युवा विधायक थे।

जयपुर में स्थिति है निजी होटल में चल रही बीजेपी की उच्चस्तरीय मंथन बैठक के बाहर बगरू विधानसभा क्षेत्र से सैंकड़ों कार्यकर्ताओं ने बगरू विधायक कैलाश वर्मा का जबरदस्त विरोध किया।

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आखिर क्यों है bjp के सबसे युवा विधायक का इतना भारी विरोध? 1

कार्यकर्ताओं ने बीजेपी आलाकमान से कैलाश वर्मा को टिकट नहीं दिए जाने की मांग करते हुए “कैलाश वर्मा भगाओ, बगरू बचाओ” के नारे लगाए, और वर्मा को टिकट दिए जाने पर उनको हराने की चेतावनी भी दी गई।

सैकड़ों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में हुए इस घटनाक्रम की जानकारी अंदर चल रही बैठक में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल सैनी समेत सभी आला नेताओं को दी गई। हालांकि, डैमेज कंट्रोल के रूप में कार्यकर्ताओं को आश्वासन देकर पिंड छुड़ा लिया गया।

कैलाश वर्मा के विरोध की यह कोई नई बात नहीं है। बीते 2 साल से बगरू विधानसभा के करीब एक दर्जन गांवों में गांव वासियों ने कैलाश वर्मा के प्रवेश पर एक विशेष रूप से रोक लगा रखी है। सरकारी बंगले पर स्थानीय लोगों से नहीं मिलने के कारण लोग उनपर गुस्सा हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि सबसे युवा विधायक होने के बावजूद कैलाश वर्मा ने गांवों में काफी भेदभाव किया, विकास के नाम पर कोई काम नहीं किया। जबकि, अपने चहेते लोगों को फायदा पहुंचा कर पूरे 5 साल मनमर्जी की है।

हालांकि, भारतीय जनता पार्टी के द्वारा करवाए गए सर्वे में भी कैलाश वर्मा की काफी नेगेटिव रिपोर्ट मिली है। लेकिन बीजेपी की तरफ से सबसे युवा विधायक के साथ ही संसदीय कार्य मंत्री होने के बावजूद जिस तरह का उनके खिलाफ माहौल बना है, यह उनके राजनीतिक भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।

आपको यह भी बता दें कि बगरू विधानसभा आरक्षित सीट है। यहां से पार्टी में इस बार दीपक डिंडोरिया, राजकुमार बिंवाल समेत कई युवा कार्यकर्ता टिकट के लिए दावेदारी जता रहे हैं। जबकि, कैलाश वर्मा साल 2013 में पहली बार ही विधायक चुने गए थे।

आपको यह भी बता दें कि वर्ष 2013 में कैलाश वर्मा छात्र राजनीति से सीधे विधायक चुने गए थे। विधानसभा चुनाव से करीब 6 माह पहले तक वर्मा एनएसयूआई के मैम्बर थे। बाद में वो भाजपा में शामिल हो गए और नरेंद्र मोदी लहर में ज्यादा जोर-आजमाइश किए बिना चुनाव जीतने में कामयाब हो गए थे।

गौरतलब यह भी है कि कथित तौर पर विधायक कैलाश वर्मा की स्कॉर्पियो के पीछे एक मरी हुई गाय को बांध कर घसीटने को लेकर सोशल मीडिया पर उनकी काफी थू थू हो चुकी है। इस मामले में नेशनल लेवल की एक बड़ी न्यूज़ साइट ने खबर प्रकशित कर विधायक का असली चेहरा उजागर करने का दावा किया था।

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