नई दिल्ली।
भारत और चीन भले ही पड़ोसी हो, भले ही दोनों के बीच क्षत्रुता हो, भले ही दोनों देश एक दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाते हैं, भले ही पाकिस्तान के मामले में दोनों विरोधाभाषी हो, लेकिन एक मामले में यह दोनों राष्ट्र समानता रखते हैं, और वह है जनसंख्या।

जी हां! भारत जहां जनसंख्या के हिसाब से दूनिया में दूसरे नंबर पर है, वहीं थोड़ा से आगे निकला चीन पहले स्थान पर काबिज है। पहले स्थान पर मौजूद चीन की आबादी जहां 1.38 अरब जनसंख्या है, वहीं भारत की जनसंख्या उससे थोड़ा पीछे करीब 1.33 अरब है।

विश्व बैंक के अनुसार 2017 के अनुसार चीन की आबादी 1.38 अरब है, जबकि भारत की जनसंख्या 1.33 अरब है। अमेरिका की पोपुलेशन केवल 32.5 करोड़ है। कनाड़ा की आबादी 37.06 करोड़ है।

पाकिस्तान की बात कह जाये तो वहां पर 19.7 करोड़ है। इसी तरह से ब्राजील की 20.09 करोड़ जनसंख्या है। दुनिया के सबसे बड़े राष्ट्र रूस की जनसंख्या केवल 14.45 करोड़ है। जापान जैसे विकसित देश की जनसंख्या 12.6 करोड़ है।

इसी तरह से क्षेत्रफल की बात की जाये चीन का कुल क्षेत्रफल 95.97 लाख वर्ग किलोमीटर है, भारत का केवल 32.87 लाख वर्ग किलोमीटर, रूस का 1.71 करोड़ वर्ग किलोमीटर है।

इसके अलावा अमेरिका की बात की जाये तो उसका क्षेत्रफल 98.34 लाख वर्ग किलोमीटर है। पाकिस्तान का क्षेत्रफल 8.81 लाख वर्ग किलोमीटर है। कनाड़ा का 99.85 लाख वर्ग किलोमीटर और ब्राजील का कुल क्षेत्रफल 85.16 लाख किलोमीटर है।

तमाम चीजें देखने के बाद साफ हो गया है कि जहां पर जमीन ज्यादा है, वहां पर जनसंख्या कम है, लेकिन जहां पर जगह कम है, वहां पर जनसंख्या विस्फोट हो रहा है। इस मामले में चीन को हम अपवाद मान सकते हैं। जो भूगोल के लिहाज से दूनिया का दूसरा बड़ा देश है, लेकिन जनसंख्या में भी वह सबसे अव्वल है।

भारत की जनसंख्या भी बहुत ज्यादा है और क्षेत्रफल भी बेहद कम है। भारत के यहां पर दुनिया की कुल आबादी में से हर छठा आदमी रहता है। चीन ने हम दो हमारे दो की पॉलिसी लागू कर ली है, लेकिन भारत अभी तक इसके बारे में विचार ही नहीं कर पाया है।

जनसंख्या जिस तेजी से बढ़ रही है, वह भारत के लिये बेहद घातक हो चुकी है। इसको लेकर पीएम मोदी ने लालकिले से जनसंख्या नियंत्रण की जरूरत बताई। साथ ही इसको देशभक्ति से भी जोड़ा, ताकि लोगों को भावनाओं के साथ ही इस गंभीर समस्या को जोड़ा जा सके।

उधर, चीन ने कई बरसों पहले ही बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुये ‘हम दो, हमारे दो’ की नीति और पॉलिसी लागू करके देश की जनसंख्या को नियंत्रित लागू करने की तरफ कदम बढ़ा दिया। अब बीते पांच साल के दौरान चीन में आबादी करीब करीब रुक सी गई है।

समस्या यह है कि आबादी को नियंत्रित करने का काम भारत नहीं कर सका है। इसके लिये जहां धार्मिक कारण एक मुद्दा है, वहीं राजनीतिक इच्छाशक्ति सबसे ज्यादा जिम्मेदार है। यह समस्या चीन में नहीं है, वहां पर न तो धर्म की लड़ाई है और न ही राजनीतिक समस्या है।

चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग हमेशा के लिये राष्ट्राध्यक्ष हैं, उनको हटाने लिये कोई नहीं है। भारत में हर पांच साल में सरकार बदल जाती है, जिसके कारण राजनीतिक पार्टियों को वोटबैंक टूटने का ड़र रहता है। यह ड़र चीन में नहीं है।