gajendra singh shekhawat bjp

Jaipur news.

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राजस्थान की कांग्रेस वाली अशोक गहलोत सरकार पर कृषकों के साथ राजनीति करने का आरोप लगाया है।

शेखावत ने कहा है कि राज्य सरकार प्रदेश के 50 लाख कृषकों का डाटा केंद्र सरकार को नहीं दे रही है, जिसके चलते उनको pm kisan samman nidhi yojana के तहत मिलने वाली ₹2000 की पहली किस्त नहीं मिल पाएगी।

केंद्रीय मंत्री ने राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार पर यह भी आरोप लगाया है कि 50 लाख लघु एवं सीमांत किसानों में से केवल 127000 किसानों का डाटा केंद्र सरकार को दिया गया है, जिनमें से भी 27000 किसानों का डाटा आधा अधूरा है। इसके चलते कृषकों को पीएम किसान योजना के तहत मिलने वाली राशि नहीं मिल पा रही है।

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आपको बता दें कि विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी ने राजस्थान के सभी किसानों का संपूर्ण कर्जा माफ करने का वादा किया था। जिस पर काम करते हुए राज्य सरकार ने अब तक करीब 20 साल किसानों का कर्ज माफ करने का काम करने का दावा किया है।

राज्य सरकार के मुताबिक करीब 7500 करोड रुपए का कर्जा माफ किया जा चुका है। इसका मतलब यह है कि राज्य सरकार के पास 20 लाख लघु एवं सीमांत किसानों के का डेटा तैयार है।

फिर ऐसा क्यों है कि इन 20 लाख किसानों का डेटा राज्य ने केंद्र सरकार को नहीं दिया है। जबकि केंद्र सरकार के मुताबिक 58 लाख किसानों का डेटा महाराष्ट्र सरकार दे चुकी है। 11 लाख किसानों का डेटा हरियाणा सरकार दे चुकी है, और 10 लाख से ज्यादा किसानों का डेटा हिमाचल प्रदेश जैसे छोटे राज्य की सरकार उपलब्ध करवा चुकी है।

केंद्र सरकार के मुताबिक पूरे देश भर से करीब 4.5 करोड़ किसानों का डेटा मिल चुका है, जिनमें से पौने 3 करोड़ों की किसानों के खातों में ₹2000 की पहली किस्त पहुंच दी गई है।

सरकार का कहना है कि इस सूची में पश्चिम बंगाल सबसे फिसड्डी रहा है, जिसके एक भी किसान का डाटा केंद्र सरकार के पास नहीं होने की वजह से वहां के किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा है कि राज्य सरकारों उनके पास किसानों के संपूर्ण भू राजस्व का आंकड़ा होता है। ऐसे में केंद्र सरकार राज्यों से डेटा लेकर ही किसानों को फायदा पहुंचाने का काम कर सकती है।

उनका कहना है कि जहां पर भी बीजेपी की सरकार है, वहां पर से डेटा मिल गया है और किसानों को इसका फायदा मिल रहा है, लेकिन जहां पर गैर भाजपाई सरकारें हैं, वहां से कर कृषकों का डेटा नहीं मिलने के कारण इस योजना का फायदा मिलना मुश्किल हो रहा है।

दरअसल, अप्रैल और मई में देश में आम चुनाव होने हैं। उसको देखते हुए राज्य और केंद्र सरकार किसानों को रिझाने का प्रयास कर रही है।

इसी कड़ी में राज्य सरकार ने किसानों का कर्जा माफ किया है, तो केंद्र सरकार ने किसानों को हर साल ₹6000 उनके खातों में देने का ऐलान कर रखा है।

इस योजना के तहत देश के करीब 12 करोड़ लघु एवं सीमांत किसान दायरे में आते हैं। इस तरह से देखा जाए तो दोनों ही सरकारों का के लक्ष्य किसान इसलिए है कि यह बड़ा वोट बैंक है।

जिस योजना का किसानों को सर्वाधिक फायदा होगा, उसी सरकार को इस बड़े वर्ग के वोट बैंक का लाभ मिलने वाला है।

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