china masood azhar
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नई दिल्ली। आतंकी सरगना अजहर मसूद को चाइना द्वारा 10 साल में चौथी बार घोषित होने से बचा लिया गया। मसूद अजहर को बचाना चीन के लिए क्यों जरूरी है इसकी पड़ताल करने पर समझ में आता है। आइए हम आपको बता बताते हैं कि क्यों बचाता है?

पाकिस्तान में चीन का फंसा है 7 लाख करोड़ रुपया

पाकिस्तान में चीन का सीपैक में करीब 55 बिलियन डॉलर, यानी लगभग 3.8 लाख करोड़ रुपया इंवेस्ट किया जा चुका है। इसके अलावा चीन की कई परियोजनाओं में भी करीब 46 बिलियन डॉलर, मतलब 3.2 लाख करोड़ रुपया व्यय हो चुका है। पाकिस्तान में जितनी भी रजिस्टर्ड विदेशी कंपनियां हैं, उनमें सबसे ज्यादा 77 अकेले चीन की हैं।

भारत को घेरे रखने की रणनीति

भारत को घरेलू मुद्दों में घेरने के अलावा चीन पाकिस्तान के साथ उलझाकर रखना चाहता है, ताकि भारत मजबूत देश नहीं बन पाए। इससे चीन की आर्थिक प्रतिस्पर्दा कम रहेगी। चाइना यह भी चाहता है कि भारत दक्षिण एशिया के मामलों पर ध्यान नहीं देकर अपने ही पड़ोस में फंसा रहे।

मूसलमानों पर कार्रवाई में भी चाहिए पाकिस्तान का साथ

दरअसल, चीन में उईगर मूसलमानों पर कई तरह के प्रतिबंध हैं। यहां पर मूसलमान खुले में नमाज भी नहीं पढ़ सकते। इस्लामिक संगठनों के देशों में केवल पाकिस्तान ही चीन का इस मामले में साथ देता है। इसलिए चीन को पाकिस्तान की जरुरत है।

अमेरिका से बदला और दलाई लामा भी है कारण

चीन अमेरिका को अपना सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी मानता है। इसलिए वह कभी अमेरिका की हां में हां नहीं भरता। साथ ही दलाई लामा को भी भारत की शरण उसे मंजूर नहीं है। चीन दलाई लामा को भारत से मांगता रहा है।

10 साल में चौथी बार, हर बार चीन ही आड़े आया

साल 2009, 2016 और 2017 में भी असूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए चीन द्वारा वीटो का प्रयोग किया गया था। भारत के खिलाफ मसूद अजहर को वह एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करता है। दूसरी बार जब यूएन में प्रस्ताव आया था, तब भी चीन ने अमेरिका के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। तीसरी बार ब्रिटेन और फ्रांस ने यह प्रस्ताव दिया था।

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