नई दिल्ली।

जम्मू कश्मीर के हालात पर ताजा रिपोर्ट्स सामने आती रहती हैं, जिनमें तरह तरह के विरोधाभास हैं। कुछ देशी—विदेश चैनल, प्रिंट मीडिया और डिजीटल मीडिया ने एक अभियान चलाकर पूरे जम्मू कश्मीर में हालात बैकाबू होने और पूरे प्रदेश को जेल बनाये रखे जाने का दावा किया है, जबकि दूरदर्शन और दूसरे कई चैनल हैं, जो लगातार कश्मीर में हालात सामान्य होने का दावा कर रहे हैं। इन विरोधाभाषी बातों में यह पता नहीं चल रहा है कि हकिकत क्या हैं?

आइये हम आपको बताते हैं कि आखिर क्यों एनडीटीवी और बीबीसी जैसे मीडिया समूह इस मामले में भारत सरकार को नाकाम बताते हुये सरकार के इस कदम को असवैंधानिक करार दे रहे हैं?

जो चैनल कश्मीर में हालात खराब होने का दावा करते हैं, उनमें भारत का स्वयंभू निष्पक्ष टीवी चैनल, एनडीटीवी प्रमुख है। यह वही एनडीटीवी चैनल, जिसके मालिक प्रणय रॉय और उनकी पत्नी को विदेश भागने से पहले बीते दिनों रोका गया था।

निष्पक्ष और खुद को ही एकमात्र सच्चा पत्रकार साबित करने का प्रयास करने वाले इसी चैनल के स्वयंभू पत्रकार रवीश कुमार और उनकी पूरी टीम इस प्रयास में जुटी हुई है कि जम्मू में हालात बैकाबू दिखाये जाएं और लोगों को जेल की तरह बंद कर दिया गया है।

इस दौरान यही चैनल यह भी जताने का प्रयास कर रहा है कि वहां पर मुस्लिम आबादी अधिक होने के कारण नरेंद्र मोदी सरकार धारा 370 हटाकर ऐसा खेल कर रही है। इस तरह से उल्टे सीधे और धार्मिक आधार पर नेरेटिव फैलाकर लोगों की भावनाएं भड़काने काम भी किया जा रहा है।

एनडीटीवी का साथ देने के लिये सबसे ज्यादा फेक न्यूज फैलाने का काम कर रहा है पाकिस्तान का अल जजीरा। पाकिस्तानी टीवी चैनल अल अजीरा के अलावा, एनडीटीवी, बीबीसी हिंदी, अधिकांश कम्यूनिस्ट नेता और कांग्रेस पार्टी के टॉप से नीचे तक कमोबेश सभी नेताओं ने धारा 370 हटाने को लेकर असवैंधानिक निर्णय करार दिया है।

हालांकि, किसी ने भी यह बताने की हिमाकत नहीं की है कि यह कदम संविधान के खिलाफ कैसे है? जबकि यह धारा अस्थाई थी, और कांग्रेस के मसीहा बनाये जा चुके जवाहर लाल नेहरू ने भी इसको दूसरे शब्दों में हटाने की वकालत की थी।

जो चैनल कश्मीर के हालात पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं, उनमें दूरदर्शन के साथ ही आजतक, जी न्यूज, इंडिया टीवी, न्यूज नेशन, एबीपी न्यूज, न्यूज 24 जैसे चैनल हैं।

खास बात यह है कि उसी जगह से ये सब चैनल हालात की साफ वीडियोज के साथ सही रिपोर्टिंग के साथ पेश आ रहे हैं, वहीं बीबीसी और एनडीटीवी समेत अल अजीरा ने पुराने वीडियो दिखाकर हालात को बैकाबू बता रहे हैं।

केंद्र सरकार ने फेक रिपोर्टिंग करने के लिये बीबीसी से वो ओरिजनल वीडियो मांगे हैं, जो उसने दंगें होने की बात कहते हुये दिखाये हैं। इसके बाद बीबीसी की हालत पतली हो गई है।

सरकार का पूरा ध्यान जम्मू कश्मीर में हालात सामान्य होने पर है, जबकि इसी का फायदा उठाकर कुछ चैनल फेक खबरें परोसकर पाकिस्तान के एजेंडे में शमिल हो रहे हैं।

चीन के सरकारी अखबार, ग्लोबल टाइम्स ने भी इस बीच पंचायती करने का प्रयास शुरू कर दिया है। ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में एक तरह से भारत को धमकी देते हुये लिखा है कि 15 दिन में अगर भारत ने डोकलाम से अपनी सेनायें नहीं हटाईं तो वह भारत के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर देगा।

मजेदार बात यह है कि भारत के अंदरुनी विषय पर एक ओर जहां पाकिस्तान के तमाम लोग सरकार के साथ हो गये हैं, वहीं भारत में इस मामले को लेकर दो तरह के लोग सामने आये हैं।

जो लोग अब तक सेक्यूलर का चौला ओढ़कर अपनी दुकानें चला रहे थे, वो अब नंगे हो चुके हैं। ऐसे में उनके चेहरे पर चढ़ा हुआ दोहरा नकाब उतर गया है और जनता ने उनकी सच्चाई भी जान ली है।

पाकिस्तान जैसे गरीब देश के गरीब से गरीब नागरिक भी इस मामले में अपनी हुकुमत के साथ हैं, किंतु भारत इस मामले में अभागा है, जहां पर देश की संप्रभुता की बात आने के बाद भी इसी देश का खाने वाले कुछ मुट्ठीभर लोग देश के लिये गद्दारी का काम कर रहे हैं।

कहतें हैं अपनों की पहचान बुरे वक्त में ही होती है, इस वक्त भारत को भारत के नागरिकों के साथ ही जरूरत है, लेकिन गद्दारों ने ऐसे वक्त में भारत के खिलाफ जाकर अपनी औकात को भी दिखा दिया है।

ऐसे लोगों की पहचान सरकार कर रही है, उनके सभी सोशल मीडिया साइट्स पर निगाह रखी जा रही है, उनके कमेंट्स को संजोया जा रहा है, ताकि वक्त आने पर उनके खिलाफ लीगल एक्शन लिया जा सके।

ऐसे देशद्रोही लोगों को समय पर सबक सिखाया जायेगा, लेकिन आप और हम, जो अपने देश की सरकार के हर अच्छे कदम में साथ हैं, उनके लिये भी यह समय परीक्षा की घड़ी है।

ऐसे वक्त में हमें जाति, धर्म और क्षेत्रवाद को छोड़कर सरकार के साथ कदमताल करना चाहिये, ताकि जम्मू कश्मीर में हालात सामान्य हो, और वहां पर विकास हो, जिससे वहां की जनता को हमारी तरह देश के विकास में सक्रिय भागीदार बनने का अवसर मिल सके।

इसके साथ ही एकता दिखाने का काम भी करना चाहिये, ताकि पाकिस्तान जैसे आतंकवादी देश और चीन जैसे मौकापरस्त को भी सबक मिल सके।

पाकिस्तान का दुनिया में आज की तारीख में सबसे बड़ा हितैषी चीन है। और चीन का उद्योग भारत के बाजार पर टिका हुआ है। यही समय है चीन के सामानों का बहिष्कार कर स्वदेसी को अपनाने का, ताकि चीन को सबस मिले।

जब उसको आर्थिक नुकसान होगा, तो वह पाकिस्तान का सहयोग करने में पीछे हटेगा। जब पाकिस्तान को चीनी सहयोग नहीं होगा, तो वह आतंकवाद पनाह नहीं देगा, और नतीजा यह होगा कि जम्मू कश्मीर ही नहीं, बल्कि आतंक से प्रभावित पूरे विश्व में शांति स्थापित हो सकेगी।

जिन चैनल्स ने जम्मू कश्मरी में शांति नहीं देखी है, उनके लिये सरकार ने शुक्रवार और शनिवार को सरकारी कार्यालय खोलकर साबित कर दिया है कि इनकी झूठ अधिक समय तक नहीं चलेगी।

फिलहाल सबसे जरूरी बात यह है कि चीन के सामानों को भारत में जितना बहिष्कार किया जायेगा, मतलब नहीं खरीदा जायेगा, उतना ही उसको नुकसान होगा। और जो चीन पाक को लेकर यूएन में गया था, उसको अपने ही बाजार में मुंह की खानी पड़ेगी।

इसलिय भारत के देशभक्त लोगों को चाहिये कि चीनी सामान को नहीं खरीदें, उसके बजाये यह देखकर सामान खरीदें कि अधिक से अधिक मेड इन इंडिया हो और उसमें भी भारत की कंपनी को वरियता दें।

इस तरह से देश के नागरिक न केवल देश का भला करेंगे, बल्कि आज जिन कश्मीरियों को भारत की जरूरत है, उनकी भी किसी न किसी माध्यम से भलाई हो सकेगी।