जयपुर।

लोकसभा चुनाव 2019 का रिजल्ट सामने आने के बाद राजस्थान में 2 विधानसभा सीटों पर विधायक के लिए उपचुनाव होने की राह भी खुल गई है।

नागौर के खींवसर विधानसभा क्षेत्र और झुंझुनू के मंडावा विधानसभा क्षेत्र में अगले 6 महीने के दौरान उप चुनाव होंगे।

जिस सीट को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हुई है वह नागौर की खींवसर। खींवसर से निवर्तमान में हनुमान बेनीवाल विधायक हैं, हालांकि उनके नागौर से सांसद बनने के बाद अब यह सीट खाली हो गई है।

ऐसे में बीते 2 दिन से चर्चा है कि अब नागौर की इस सीट पर अगला उम्मीदवार कौन होगा? क्या यह उम्मीदवार राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी का होगा? क्या यह उम्मीदवार भारतीय जनता पार्टी का या फिर प्रत्याशी एनडीए का होगा?

इसको लेकर चर्चा की जा रही है। राजनीतिक गलियारों में इस चर्चा के साथ ही कई नाम उभरकर सामने आ रहे हैं। दो नाम है जिन पर सबसे ज्यादा बात की जा रही है।

पहला नाम है हनुमान बेनीवाल के भाई नारायण बेनीवाल और दूसरा नाम है राजपूत समाज से आने वाले परिदान सिंह राठौड़।

जिस तरह से राजपूत समाज ने हनुमान बेनीवाल को नागौर में समर्थन किया है, उससे चर्चा है कि बेनीवाल खुद आगे बढ़कर राजपूत समाज को यह सीट दे सकते हैं। सुनने में तो यह भी आ रहा है कि चुनाव के दौरान बेनीवाल ने यह वादा भी किया था।

दोनों ही नामों को लेकर अलग अलग तरह से अलग अलग तथ्यों के साथ समर्थक सोशल मीडिया पर बात कर रहे हैं।

हालांकि अभी तक इस बात को लेकर न तो राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की तरफ से कोई बयान आया है और ना ही भारतीय जनता पार्टी की ओर से।

क्योंकि 6 महीने का वक्त है और ऐसे में राजनीतिक समीकरण बदलने की पूरी संभावना है, बदलते रहते हैं। बताया जा रहा है कि अगर केंद्र में हनुमान बेनीवाल को मंत्री बनाया जाता है तो फिर खींवसर से से उनके भाई को टिकट देने की संभावना नहीं के बराबर है।

किंतु अगर उनको मोदी सरकार में जगह नहीं मिलती है तो नारायण बेनीवाल को उम्मीदवार बनाया जाएगा।

जबकि कहा जा रहा है कि इस सीट पर बीजेपी की टिकट पर ही चुनाव लड़ा जाएगा, सीट एनडीए की होगी। यानी कि उम्मीदवार एनडीए का होगा, लेकिन चुनाव चिन्ह बीजेपी का कमल का होगा, जैसे कि नागौर में लोकसभा चुनाव के दौरान एनडीए के उम्मीदवार हनुमान बेनीवाल थे लेकिन चुनाव चिन्ह राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी का था टायर्स।

फिलहाल सीट को लेकर कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है, लेकिन बातचीत शुरू हो चुकी है और संभावना है कि जल्द ही यहां पर किसी का नाम को लेकर सहमति बन सकती है।

दूसरी सीट है झुंझुनू की मंडावा। मंडावा सीट पर 2346 भारतीय जनता पार्टी के नरेंद्र खीचड़ ने कांग्रेस की रीटा चौधरी को हराया था।

बताया जा रहा है कि रीटा चौधरी ने लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के उम्मीदवार का समर्थन करने के बजाय बीजेपी के नरेंद्र खींचड का समर्थन किया था।

माना जा रहा है कि सीट खाली करने के लिए और उसके बाद यहां पर नरेंद्र के जीतने पर उपचुनाव के लिए रीटा चौधरी ने यह सब किया गया था।