जयपुर।

लोकसभा चुनाव 2019 में राजस्थान की 25 लोकसभा सीटों में से 13 पर चुनाव संपन्न हो चुका है। इन 13 सीटों में बाड़मेर, जोधपुर, झालावाड़ और टोंक अति महत्वपूर्ण सीटें हैं।

यहां पर कांग्रेस पार्टी खुद को मजबूत स्थिति में बता रही है, जबकि भारतीय जनता पार्टी का दावा है कि 13 में से सभी 13 सीटें जीतकर एक बार फिर से नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में मजबूत सरकार बनाएंगे।

समीक्षा के तौर पर बात करें तो जोधपुर की सीट ना केवल कांग्रेस पार्टी के लिए, बल्कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए भी साख बचाने का सवाल है।

इसी तरह से झालावाड़ की सीट पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बेटे दुष्यंत सिंह की अग्नि परीक्षा है। यहां पर दुष्यंत सिंह लगातार तीन बार चुनाव जीत चुके हैं।

इस बार फिर से मोदी लहर के चलते उनकी स्थिति काफी मजबूत बताई जा रही है, लेकिन फिर भी परीक्षा से गुजरना हर चुनाव में जरूरी होता है।

पाकिस्तान की सीमा से सटे हुए बाड़मेर-जैसलमेर में बीजेपी के पूर्व नेता मानवेंद्र सिंह की टक्कर भारतीय जनता पार्टी के बायतु से पूर्व विधायक कैलाश चौधरी के साथ है, जहां पर वोटिंग प्रतिशत काफी बेहतर रहा है।

यहां पर कैलाश चौधरी को लेकर शुरुआत में कमजोर उम्मीदवार बताया जा रहा था, लेकिन जैसे-जैसे चुनाव संपन्न हुए वैसे वैसे एक बार फिर से मोदी लहर पर सवार कैलाश चौधरी खुद की जीत के दावे किए हैं।

जोधपुर की सीट, झालावाड़ की संसदीय सीट, बाड़मेर क्षेत्र के अलावा टोंक सवाई माधोपुर दोनों ही पार्टियों के लिए अत्यधिक प्रतिष्ठा का प्रश्न है।

यहां पर कांग्रेस पार्टी की तरफ से पूर्व केंद्रीय मंत्री नमोनारायण मीणा लगातार चौथी बार मैदान में हैं, उनके सामने भारतीय जनता पार्टी के सुखबीर सिंह जौनपुरिया हैं, जो वर्तमान में सांसद हैं।

इन सीटों के अलावा राजस्थान की कोटा, राजसमंद, जालौर, पाली, उदयपुर, बांसवाड़ा में भी मतदान हुआ है।

बांसवाड़ा ने पूरे प्रदेश में सर्वाधिक वोटिंग की है। यहां पर भारतीय ट्राइबल पार्टी के कांतिलाल रोत मैदान में होने के कारण मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।

अभी सभी पार्टियां अपनी अपनी जीत के दावे कर रही है, लेकिन निष्पक्ष रिपोर्ट की मानें तो राजस्थान की चुनाव संपन्न हो चुकी 13 सीटों में से अधिकांश भारतीय जनता पार्टी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं।

इन 13 सीटों पर हुए मतदान के बाद बची हुई 12 संसदीय क्षेत्रों में भी भाजपा को अपार जनसमर्थन मिलने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जैसे ही मतदान नजदीक आ रहे हैं, वैसे ही कांग्रेस पार्टी अपनी जीत के दावे कर रही है।

बहरहाल परिणाम 23 मई को आएगा तब डिसाइड होगा कि राजस्थान का अगला किंग कौन होगा?