राजस्थान विधानसभा चुनावी रण के लिए सजने लगी है राजनीतिक बिसात

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एलएन जितरवाल@जयपुर।

वैसे तो हर बार राजस्थान में कांग्रेस और बीजेपी के बीच अक्सर आमने-सामने का सियासी मुकाबला होता है। लेकिन इस बार खींवसर विधायक हनुमान बेनीवाल द्वारा तीसरा मोर्चा खड़ा करने की कोशिश की जा रही है, जिन्होंने राजस्थान में पांच बड़ी किसान हुकार रैलियां कर वर्तमान राजनीतिक क्षेत्र में खलबली मचा दी है। अब देखना यह है कि तीसरा मोर्चा कितनी सीटों तक पहुंच पाता है।

साल 2013 में नरेंद्र मोदी के जादू के आगे बुरी तरह परास्त हुई कांग्रेस इस बार कथित तौर पर वसुंधरा विरोधी लहर में जीत का स्वाद चखना चाहती है, तो हनुमान बेनीवाल और घनश्याम तिवाड़ी दोनों दलों के सपने तोड़ने को आतुर हैं।

साल की शुरुआत में अलवर, अजमेर लोकसभा और मांडलगढ़ विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा था। अबतक जितनी भी सर्वे रिपोर्ट आ रही हैं, उनके अनुसार कांग्रेस बढ़त बनाए हुए है। लेकिन यह राजनीति है, इसमें कब पासा पलट जाए, इसका कुछ कह नहीं सकते। और वैसे भी अभी टिकट वितरण अभी हुआ नहीं है। बीजेपी के लिए नरेन्द्र मोदी और अमित शाह का बोनस बाकी है।

सभी राजनीतिक पार्टियां सोशल इंजीनियरिंग को देखते हुए ही टिकट वितरण करने में जुटी हुई हैं। कई दौर की बैठकें चलने के बावजूद किसी भी पार्टी ने अभी तक एक टिकट भी फाइनल नहीं किया है।

टिकट बांटने के मामले में कहीं न कहीं बीजेपी आगे है। इधर, राहुल गांधी अपने सहप्रभरियों के अधूरे होमवर्क से काफी नाराज हैं। राहुल गांधी बेदाग छवि वाली महिलाओं व युवाओं को मौका देना चाह रहे हैं।

राजस्थान में देखा जा रहा है कि कुछ समय से कांग्रेस का चुनाव प्रचार धीमा हुआ है, क्योंकि उम्मीदवार टिकट वितरण के लेकर असमंजस में हैं, और दिल्ली में बड़े नेताओं के चक्कर लगा रहे हैं।

तो दूसरी तरफ बीजेपी का बूथ लेवल चुनाव प्रचार अपनी गति पकड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। 200 सीटों वाली विधानसभा में 101 जीत के साथ कौन सत्ता का ताज पहनता है? देखना यह है कि राजस्थान की जनता किसके सिर पर ताज रखती है।

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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