narendra modi amit shah bjp
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जयपुर।
लोकसभा चुनाव 2019 का परिणाम घोषित होने के साथ ही जहां एक ओर हारी हुई पार्टियां मंथन करने में जुटी हुई हैं, तो वहीं दूसरी तरफ सत्ता में आने के साथ ही भाजपा के लिए दोहरी परीक्षा का समय आ गया है।

लगातार दूसरी बार देश की बागड़ोर संभालने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जहां अपना मंत्रिमंड़ल गठन करना है, तो साथ ही साथ संगठन मुखिया के तौर पर अध्यक्ष अमित शाह को दल का नया मुखिया भी तलाशने का काम भी करना है।

अब यह बात लगभग तय है कि अमित शाह को मोदी के मंत्रिमंड़ल में जगह मिलेगी। संभावना यह भी है कि शाह को कोई जबरदस्त काम वाला मंत्रालय दिया जाए, जिसमें गृह मंत्री, वित्त या रक्षा मंत्रालय की संभावना सबसे ज्यादा दिखाई दे रही है।

किंतु इसके साथ ही भाजपा अध्यक्ष शाह को अपना उत्तराधिकारी भी तलाशकर संगठन उसके हाथ सौंपना है। भाजपा और कांग्रेस में यही सबसे बड़ा फर्क है, भाजपा में जहां एक समय के बाद अध्यक्ष बदल जाता है, वहीं कांग्रेस में यह परंपरा परिवार तक सीमित रहती है।

खैर! भाजपा के अगले अध्यक्ष के तौर पर दो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। पहले नंबर पर पार्टी महासचिव राम माधव और दूसरे नंबर पर यूपी संगठन प्रभारी सुनील बंसल। इनमें से सुनील बंसल ने अमित शाह के साथ काम किया है और दोनों ने 2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश जीतकर दिखाया है।

राम माधव और सुनील बंसल, दोनों की संगठन क्षमता पर किसी को शक नहीं है। सवाल यह भी है कि क्या नरेंद्र मोदी और अमित शाह पार्टी को किसी ऐसे व्यक्ति के हाथ में देने की हिम्मत दिखाएंगे, जो खुद निर्णय ले सकता हो?

यदि ऐसा हुआ तो निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि राम माधव या सुनील बंसल का नाम पहले स्थान पर है। और अगर ऐसा नहीं कर केवल ‘रबड़ स्टाम्प’ को संगठन सौंपा जाएगा तो पक्के तौर पर जेपी नड्डा जैसा कोई चेहरा सामने आ सकता है।

सुनील बंसल लंबे समय से यूपी को देख रहे हैं और इस दौरान उन्होंने भाजपा को यूपी में तीन चुनाव भी जितवाए हैं। 2014 से पहले उनको अमित शाह के साथा सह प्रभारी बनाकर यूपी में लगाया गया था। दोनों ने मिलकर भाजपा के खाते में 80 में से 72 सीट दिलाई।

इसके बाद 2017 के शुरू में जब यूपी में विधानसभा चुनाव हुए तो सुनील बंसल ने यहीं पर काम किया और भाजपा को प्रचंड़ बहुमत मिला। अब भी सुनील बंसल यूपी के संगठन प्रभारी हैं और भाजपा ने यहां पर 80 में 62 सीटें जीतीं हैं।

इधर, राम माधव को जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों का जिम्मा सौंपा गया था। उन्होंने पीडीपी की महबूबा के साथ सरकार बनाने में कामयाबी पाई तो नोर्थ—ईस्ट में भी भाजपा को उनके नेतृत्व में अपार सफलता मिली।

राम माधव के साथ अच्छी बात यह है कि उनको कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक का अनुभव है। वो खुद आंद्रप्रदेश से आते हैं, कश्मीर में काम किया, नोर्थ—ईस्ट में काम किया है। इसलिए उनकी नेतृत्व क्षमता को संगठन ने खूब परखा है।

रही बात सुनील बंसल की, तो उन्होंने पहले एबीवीपी में रहते हुए संगठन को नई उंचाइयां दीं, इसके बाद भाजपा में भी अच्छा काम किया। जिस राज्य को ​जीतने के बाद कोई भी दल केंद्र में राज करने की क्षमता हासिल कर ले, उस राज्य को सुनील बंसल के नेतृत्व में भाजपा ने लगातार तीन बार जीता है।

राम माधव और सुनील बंसल दोनों ही भाजपा और आरएसएस की पसंद भी हैं। लेकिन फिर भी मोदी—शाह की जोड़ी जिस तरह से आश्चर्यजनक फैसले लेने के लिए मशहूर है, उससे कुछ भी होने की संभावना जिंदा रहती है।

फिलहाल 30 मई को प्रधानमंत्री नरेंद मोदी शपथ ले रहे हैं, फिर उनके मंत्रिमंड़ल के सदस्य तय होंगे। अमित शाह के मंत्री बनने की स्थिति में ही भाजपा के नए संगठन मुखिया के नाम पर विचार किया जाएगा।