sambhar lake news and photo of bieds death
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—देशी—विदेशी पक्षियों की कब्रगाह बनी सांभर झील, 10 दिन में 23 हजार बेजुबान मासूमों की मौत, “जहर बना झील का नमक”
श्रीवत्सन/रामगोपाल जाट।

अपने नमक उत्पादन के साथ प्रवासी पक्षियों के सबसे पसदीदा बसेरे के रूप में पहचाने जाने अल संभार झील इन दिनों पक्षियों के लिए मौत की कब्रगाह बना हुआ है। यहां पिछले 10 दिनों में ही 23 हज़ार से भी अधिक बेजुबान पक्षियों की मौत ने सबको सकते में डाल दिया है। केंद्र और राज्य सरकार ने इन पक्षियों की हो रही मौत के कारणों का पता लगाने के लिए टीमें भेज दी हैं, वहीं राजस्थान हाईकोर्ट ने भी इसे गंभीर और बेहद लापरवाही से भरा हुआ मामला मानते हुये मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरकार से रिपोर्ट मांगी है।

रिश्तों की हकिकत नहीं जानने के बाद भी यहां पर फैले एक अजीब से सन्नाटे और सांय सांय करती हवा भी बताती है कि किसी के सिर से मां का सांया उठ गया है, तो किसी के बच्चे अकाल मौत के शिकार हो गये हैं। कोई अपने भाई से बिछड़ गया है तो किसी की बहन दुनिया से अलविदा हो चुकी है।

चारों और न केवल पक्षियों के शव बिखरे पड़े हैं, ​बल्कि आसमान नापने वाले इन परिंदों के रिश्ते भी यहां पर बुरी तरह से बिखर गये हैं। हजारों किलोमीटर दूर अपना संसार बसाने की आस में कई दिनों तक थका देने वाली यात्रा तय कर आने वाले इन मासूमों का कहां पता था कि सांभर झील में उनकी दुनिया ही उजड़ जायेगी।

नमक के लिये दुनियाभर में प्रसिद्ध इस झील में जहां देखो वहां रेत और नमक के टीलों पर पक्षियों के मरने के बाद शव और अवषेश दिख रहे हैं। यह ड़रावना और खौफनाक नज़ारा राजस्थान की खारे पानी की सबसे बड़ी झील सांभर का है, जहां देशी-विदेशी पक्षियों की मौत का सिलसिला लगातार जारी है।

इस नज़ारे को यदि हैवान भी देख लें, इन नजारों को हैवानों के हाकिम भी देख लें और हुकुम की हुकूमत भी देख ले, क्योंकि ये ही वो लोग थे, जिन पर की बेहद ही खुबसूरत इन प्रवासी पक्षियों को इन्हें बचाने और सँभालने की जिम्मेदारी थी, लेकिन लापरवाही एसी की स्थिति के बिगड़ने का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है की पिछले 10 दिनों में करीब 23 हजार पक्षियों की यहां मौत हो चुकी है।

जबकि 500 से ज्यादा पक्षियों को यहां रेस्क्यू सेंटर में इलाज के लिए लाया जा चुका है। मरने वाले कई पक्षी तो 5000 किलोमीटर की उड़ान भरकर अपने पसंदीदा सांभर झील पहुंचे थे। मरने वाले पक्षियों में सबसे ज्यादा 3200 नार्दन सावलर हैं, जिन्होंने रतन तलब, शाकम्भरी माता मंदिर झपोक डेम, गुढ़ा साल्ट के इलाके को अपना बसेरा बना रखा था।

इसके अलावा 2600 केंटिश प्लोवर, 1000 रफ, 600 को-मनकोट-ब्लैकविंग और 600 ब्लैक विंग स्टील्ट रिंग सहित कई देशी प्रजातियों के पक्षियों की मौत सबसे ज्यादा हुई है। यहां तक की सबसे चर्चित रहने वाले विदेशी फ्लेमिंगों भी मौत के घाट उतर रहे हैं।

समय पर नहीं पहुंचने के आदी हो चुके देरी से पहुंचे राज्य के अधिकारी पिछले 4 दिनों से जेसीबी से गड्ढा खोदकर मृत पक्षियों को जमीन में दफना रहे हैं, ताकि कीचड़ में सड चुके इन पक्षियों से मनुष्यों को कोई इन्फेक्शन ना हो जाए।

सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद भी राजस्थान की मशहूर सांभर झील में देशी और विदेशी पक्षियों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। 10 दिन में 23 हजार से ज्यादा पक्षियों की मौत के बाद अब केंद्र सरकार ने सांभर झील में टीम भेजी है, वहीं राजस्थान हाईकोर्ट ने भी इसे गंभीरता से लेते हुये पक्षियों की मौत पर राज्य सरकार सेमामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुये रिपोर्ट मांगी है।

एक साथ इतनी तादात में पक्षियों की मौत के बाद केंद्र सरकार ने विशेषज्ञों की टीम सांभर झील भेजी है। कहा जा रहा है की नमक में आद्रता ज्यादा होने, वायरल इन्फेक्शन के फैलने, पक्षियों के पंख पैरों में लकवा मार जाने या फिर बोटूलिज्म के इन्फेक्शन चलते इन पक्षियों की मौत हुई है।

इसके साथ ही कहा जा रहा है की जो पक्षी शुरुआत में मरे, वो दलदल में दबे हैं और उनमें मेगट्स (कीड़े) लग गए, जिन्हें खाने से दूसरे पक्षी मर रहे हैं। यानी की पक्षियों की मौत का कारण बर्ड फ्लू नहीं है।

पक्षी विशेषज्ञों के द्वारा कहा यह भी जा रहा है कि घटना ‘हाइपर नकट्रेमिया’, यानी पानी में सोडियम की अत्यधिक मात्रा होने के कारण नशा होने से हुई। लेकिन वन विभाग के पास तो इसकी जांच के लिए एक्सपर्ट, लैब और संसाधन ही नहीं है।

यह भी माना जा रहा है कि जहां घटना हुई है, झील के उस एरिया में पानी काफी अरसे से नहीं आया था। नमक काफी गाढ़ा हो गया। इस बारिश में पानी आया तो इससे नमक जहरीला बन गया।

लेकिन अचानक यह सब कैसे हो गया? इसका सही-सही जवाब किसी के पास नहीं है। जांच के लिए अब तमिलनाडु के कोयम्बटूर, बरेली और देहरादून में सैंपल भेजे गए हैं।

जयपुर जिला कलेक्टर जगरूप सिंह का कहना है कि, ‘हमने मामले की जांच के लिए मृत पक्षियों के शव को देश के अलग—अलग लैबों में भेज दिया है। संदेह है कि जब ये पक्षी यहां आये थे, तब पहले से ही मर चुके पक्षियों को इन्होंने खाना शुरू कर दिया था, जिसके चलते उनमे लगे मेगट्स कीड़े से यह हुआ है। रेस्क्यू ओपरेशन को भी अब और तेज कर दिया गया है।’

प्रशासनिक रवैये के कारण पक्षी प्रेमी काफी नाराज हैं। जहां एक तरफ प्रसाशन इतनी तादात में पक्षियों की मौत के कारण जानने में लगा है, वहीं रोजाना सेंकड़ों घायल पक्षी सांभर झील में रेस्क्यू टीमों द्वारा बीमार एवं मृत हालात में निकाले जा रहे हैं।

हर रोज 34 बीमार एवं 4000 से भी ज्यादा मृत पक्षियों को झील से बाहर निकाला जा रहा है। इनमें बीमार पक्षियों को इलाज के लिए रेस्क्यू कैंप नावां के राजकीय पशु चिकित्सालय में ले जाया जा रहा है।

बता दें कि संभार झील के 40 फीसदी हिस्से में नमक उत्पादन होता है, जबकि इसके 60 फीसदी हिस्से को पीने के पानी के उपयोग में लिया लिया जाता है।

सांभर साल्ट से जुड़े लोगों की मानें तो यहां की प्रयोगशाला में केवल नमक से उत्पादन एवं नमक की गुणवत्ता की ही जांच की जा सकती है। पानी दूषित या संक्रमित हुआ है, इसकी जांच यहां सांभर साल्ट की प्रयोगशाला में संभव नहीं है। ऐसे में बीमारी फैलने की संभावना से इस झील के करीब 22 किलोमीटर के दायरे में लोगों की चिंताए बढ़ने लगी है।

वैसे झील में पक्षियों के मरने से इस पूरे झील के पानी के दूषित एवं संक्रमित होने का खतरा भी बन गया है। उपयोग से 90 स्क्वायर किलोमीटर इलाके के लोगों में बीमारी फैलने की आशंका है। कहना गलत नहीं होगा की लोगों को खाने का बेहतरीन स्वाद देने वाला सांभर झील का नमक ही अब हजारों देशी और विदेशी पक्षियों के लिए जहर बन गया है।