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-भाजपा कर रही है मंथन, हार के कारणों पर चर्चा के लिए आज दोपहर बाद या कल बुलाई जा सकती है कोर कमेटी की बैठक

जयपुर।

प्रदेश में पांच साल पहले जो भाजपा प्रचंड़ जीत के साथ सत्ता में लौटी थी, वही भाजपा कांग्रेस को निकट लड़ाई में सत्ता से बाहर हो गई।

हार के लिए कांग्रेस ने जहां भाजपा के जातिवाद, साम्प्रदायिक वैमन्स्य, किसानों और बेरोजागारों के लिए काम नहीं करने के लिए जिम्मेदार बताया है, वहीं पार्टी ने अपनी हार स्वीकार करते हुए मंथन शुरू कर दिया है।

पार्टी इसको लेकर आज दोपहर बाद या कल तक कोर कमेटी की बैठक बुला सकती है। वैसे जिन कारणों को माना जा रहा है, उनमें सत्ता, संगठन या ब्यूरोक्रेसी का गठजोड़ सामने आ रहा है।

सरकार बनने के बाद सरकार जिलों और संभागों के माध्यम से जनता के द्वार गई, लेकिन इसका फायदा नहीं मिला। भाजपा उसी तरह से बाहर हो गई, जिस तरह से 2008 में सत्ता गंवाई थी।

तब भी पार्टी 2003 की 120 सीटों के मुकाबले 78 सीटों पर जीत दर्ज कर पाई थी। इस बार भी 163 सीटों से सीधे 73 सीट जीतकर सत्ता से बाहर हुई है।

विपक्ष के द्वारा भाजपा, सरकार और ब्यूरोक्रेसी को एक करके प्रचारित किया था। लगातार सरकार पर अपने अधिकारियों को भ्रष्टाचार करने के आरोप लगते रहे हैं।

इन पांच सालों में खान घोटाले में आईएएस अशोक सिंघवी के महाघूस कांड ने प्रदेश ही नहीं देश की ब्यूरोक्रेसी को एक नई दिशा दी।

उसके बाद स्वास्थ्य विभाग में टेंडर घोटाले में आईएएस नीरज के पवन का जेल जाना भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर गया। इसी तरह से कई अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे।

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और प्रदेश अध्यक्ष रहे अशोक परनामी को एक ही गुट से माना जाता है। आरोप यहां तक लगते रहे हैं कि सीएमआर से ही भाजपा का संगठन चला है।

अशोक परनामी अध्यक्ष होने के बावजूद खुद को वसुंधरा राजे की छावा से बाहर नहीं निकाल पाए। जिसके परिणामस्वरूप भाजपा लगातार संगठनात्मक तौर पर कमजोर होती चली गई।

आरोप लगते रहे हैं कि जो भाजपा कभी अपनी ही सरकार से भिड़ती रही है, वह मुख्यमंत्री कार्यालय से संचालित होने लगी थी।