lalkrishan adwani narendra modi
lalkrishan adwani narendra modi

नई दिल्ली।

कुछ ही देर में राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाला है। उससे पहले कल देर रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अपील कर रहे हैं कि शांति बनाये रखें। जबकि खुद मोदी भी उस टीम का हिस्सा थे, जब 1992 के दौरान विवादित मस्जिद का हिस्सा गिराया गया था।

जब सोमनाथ से अयोध्या तक रथयात्रा शुरू की थी, तब नरेंद्र मोदी भी रथ पर सवार थे। उन्होंने ने भी जनता को संबोधित किया था। हालांकि, तब केवल आडवाणी ही सबसे बड़े नेता थे। सॉफ्ट नेचर के होने के कारण अटल बिहारी वाजपेयी रथयात्रा में शामिल नहीं थे।

नरेंद्र मोदी को तब तक केवल गुजरात तक ही जाना जाता था, लेकिन आडवाणी के द्वारा चाहे लालचौक पर तिरंगा फहराया गया हो, या रथयात्रा निकाली गई हो। चाहे अहमदाबाद से लोकसभा का पर्चा दाखिल किया गया हो, या पहली बार गृहमंत्री बनाया गया हो, हर बार राइड हैंड की तरह मोदी ने आडवाणी का साथ दिया।

तब ‘इंडिया टुडे’ के मार्च 1992 में अंक में उदय माहूरकर ने अपनी एक स्टोरी में नरेंद्र मोदी को भारतीय जनता पार्टी के नए सितारे का उदय बताया था। लिखा था कि ‘भाजपा अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी की एकता यात्रा के संयोजक 38 वर्षीय नरेंद्र मोदी पार्टी में महत्वपूर्ण व्यक्ति बनते जा रहे हैं। और इसकी वजह भी है।’

उन्होंने आगे लिखा, ‘जहां एक तरफ यात्रा का विश्लेषण चल रहा है वहीं, दूसरी तरफ भाजपा में चर्चा गरम है कि यात्रा को जारी रखने के लिए लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी सरीखे दिग्गज को राजी करने में भी मोदी सफल रहे।’

उदय माहूरकर ने अपनी एक स्टोरी में आगे लिखा,’यही नहीं अब नरेंद्र मोदी से बीजेपी के वरिष्ठ नेतागण सलाह-मशविरा भी करते रहते हैं ,वजह साफ है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हलके के जरिए भाजपा में शामिल होने के बाद छह साल की कम अवधि में ही वे न सिर्फ गुजरात पार्टी ईकाई के महासचिव बन गए, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के महत्वपूर्ण नेता भी बन गए।’

गौरतलब है कि उस समय नरेंद्र मोदी बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति और सर्वशक्तिमान छह सदस्यीय राष्ट्रीय चुनाव समिति के भी सदस्य थे। इस समिति में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और अटल बिहारी वाजपेयी सरीखे वरिष्ठ नेता शामिल थे।

माहूरकर आगे लिखते हैं, ‘नरेंद्र मोदी आकर्षक हिंदी नारे बनाने की अपनी प्रतिभा से पार्टी छवि निर्माता के रूप में उभरे हैं। यहां तक की राजनीति के सबसे धूर्त खिलाड़ी चिमनभाई पटेल भी उनकी कुशाग्रता का सम्मान करते हैं। दोनों जब भी आमने-सामने होते हैं तो चिमनभाई उन्हें खुश रखने की कोशिश करते हैं, और वे उन भाजपा नेताओं की राह में रोड़ा बन सकते हैं जो नरम रवैया अपनाने की कोशिश में हैं।’

शायद इसिलिये उनको आडवाणी का राजनीतिक शिष्य माना जाता है। जिस दिन रथयात्रा शुरू हुई थी और बीच रास्ते में आडवाणी को गिरफ्तार किया गया था, तब नरेंद्र मोदी को भी गिरफफ्तार किया गया था।

आज जब पूरे देश की निगाहे सुप्रीम कोर्ट पर हैं, तो उससे करीब 24 घंटे पर नरेंद्र मोदी ने ट्वीटर और फेसबुक पर लिखा है, ‘अयोध्या पर कल सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आ रहा है। पिछले कुछ महीनों से सुप्रीम कोर्ट में निरंतर इस विषय पर सुनवाई हो रही थी, पूरा देश उत्सुकता से देख रहा था। इस दौरान समाज के सभी वर्गों की तरफ से सद्भावना का वातावरण बनाए रखने के लिए किए गए प्रयास बहुत सराहनीय हैं।

देश की न्यायपालिका के मान-सम्मान को सर्वोपरि रखते हुए समाज के सभी पक्षों ने, सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों ने, सभी पक्षकारों ने बीते दिनों सौहार्दपूर्ण और सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए जो प्रयास किए, वे स्वागत योग्य हैं। कोर्ट के निर्णय के बाद भी हम सबको मिलकर सौहार्द बनाए रखना है।

अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आएगा, वो किसी की हार-जीत नहीं होगा। देशवासियों से मेरी अपील है कि हम सब की यह प्राथमिकता रहे कि ये फैसला भारत की शांति, एकता और सद्भावना की महान परंपरा को और बल दे।’