RBI विवाद: क्या है सेक्शन-7, जिसको लेकर मचा है इतना कोहराम?

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- Advertisement - dr. rajvendra chaudhary

नई दिल्ली।

केंद्र सरकार और भारतीय बैंकों के बैंक, यानी भारतीय रिजर्व बैंक के बीच जारी शीत युद्ध पर पूरे देश में चर्चा चल रही है। पूरा विपक्ष जहां आरबीआई के फेवर में खड़ा है, वहीं सरकार के समर्थक लोग केंद्र सरकार को सपोर्ट कर रहे हैं।

केंद्र सरकार द्वारा रिजर्व बैंक में रखी गई आरक्षित मुद्रा के उपयोग को लेकर आरबीआई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार में तलवारें खिंची हुई है। रिजर्व बैंक की स्थापना से लेकर अब तक पहली बार केंद्र सरकार सेक्शन 7 का उपयोग करने के लिए आमादा है।

बताया जा रहा है कि लगातार केंद्र सरकार के द्वारा आरक्षित मुद्रा के उपयोग के लिए रिजर्व बैंक को अपील करने के बावजूद आरबीआई टस से मस होने का नाम नहीं ले रहा है। आरक्षित मुद्रा में से केंद्र सरकार आयुष्मान भारत के तहत हॉस्पिटल निर्माण के लिए कुछ रुपए खर्च करना चाहती है।

ऐसे समय में जब आरबीआई स्वायत्तशासी संस्था होने के नाते केंद्र सरकार के फैसलों को मानने से इंकार कर देती है, तब भारतीय संविधान सेंट्रल गवर्नमेंट को यह अधिकार देता है कि वह आरबीआई को निर्देशित कर सकती है। सामान्य परिस्थितियों में केंद्र सरकार आरबीआई को केवल सलाह देती है।

केंद्र सरकार द्वारा आरबीआई को निर्देशित करने के लिए भारत के संविधान में सेक्शन 7 का प्रावधान है। जिसके अनुसार सेंट्रल गवर्नमेंट आरबीआई को डायरेक्शन दे सकती है। ऐसे समय में आरबीआई के गवर्नर के सभी अधिकार सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के पास चले जाते हैं।

हालांकि, उसे पहले आरबीआई के साथ केंद्र सरकार गवर्नर की मौजूदगी में सलाह मशवरा कर निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्ध है। किंतु दोनों में टकराव की स्थिति होने पर सेक्शन 7 का उपयोग किया जाता है। वर्तमान परिदृश्य में आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल और उन्हें की पसंद वाली सरकार मानी जाने वाली, नरेंद्र मोदी गवर्नमेंट के बीच तकरार जारी है।

देश में जारी चर्चा के बीच हम आपको बताते हैं कि सेक्शन 7 क्या है, और इसका उपयोग केंद्र सरकार कब और किन परिस्थितियों में, किस तरह से कर सकती है-

  1. वैसे तो आरबीआई एक स्वायत्तशासी संस्था है जो अपने सभी निर्णय खुद करने के लिए अधिकारी है, किंतु विशेष परिस्थितियों में आरबीआई को केंद्र सरकार के द्वारा दिए जाने वाले दिशा निर्देशों के तहत काम करना होता है।

  2. भारतीय रिजर्व बैंक के पास एक निश्चित मात्रा में आरक्षित मुद्रा रखी होती है। जिसका उपयोग देश में विपरीत परिस्थितियों, आपातकाल और वृहद योजनाओं के लिए केंद्र सरकार काम में ले सकती है, लेकिन उसके लिए आरबीआई की अनुमति आवश्यक है।

  3. भारतीय संविधान ने केंद्र सरकार को यह अधिकार दिया है कि जब आरबीआई के पास आरक्षित मुद्रा पड़ी हो और वह उसको काम में लेने से इनकार कर दे, तब सरकार सेक्शन 7 का उपयोग करते हुए आरबीआई को निर्देश दे सकती है।

  4. ऐसी स्थिति में आरबीआई के गवर्नर की अनुपस्थिति पर डेप्युटी गवर्नर और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को यह अधिकार प्राप्त हो जाता है कि वह आरबीआई की समस्त गतिविधियां अपने हाथ में ले लें।

  5. ध्यान रखने वाली बात यह है कि सेक्शन 7 का उपयोग केंद्र सरकार विशेष परिस्थितियों में ही कर सकती है। ऐसे वक्त में केंद्र सरकार आरबीआई को निर्देश देती है, जबकि सामान्य परिस्थितियों में सरकार बैंकों के इस बैंक को केवल सलाह देती है।

  6. सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के पास बैंक के सभी सामान्य मामलों एवं कामकाज के अधीक्षण एवं निर्देशन की शक्तियां होंगी। वह उन सभी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सभी कार्रवाइयां कर पाएगा, जिसे करने का अधिकार इस बैंक के पास है।

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