Justice Ranjan Gogoi
Justice Ranjan Gogoi

रामगोपाल जाट

शनिवार को (20 अप्रैल, 2019) सुबह से ही एक महिला का हलफनामा कानूनी क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। महिला द्वारा यह दावा किया गया है कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने महिला का यौन उत्पीड़न किया है।

महिला हाल ही के दिनों में जमानत पर रिहा हुई हैं, जो कि उच्चतम न्यायालय में लॉ असिस्टेंट थीं। जस्टिस गोगोई ने भी प्रकरण की गंभीरता को समझते हुए बिना देरी किए शनिवार को ही, जो कि अवकाश का दिन था, उच्चतम न्यायालय का को खुलवा कर जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस संजीव खन्ना को बुलाकर हलफनामे पर आरंभिक सुनवाई भी की।

जस्टिस मिश्रा ने एक लिखित आदेश की भी दिया है, जिसके अनुसार इस प्रकरण में अभी कोई न्यायिक आदेश पारित नहीं किया गया है, और मीडिया व सोशल मीडिया को प्रकरण की गंभीरता को समझ कर रिपोर्टिंग करने की एडवाइजरी भी दी गई है।

इस संबंध में जस्टिस गोगोई ने भी अपना वक्तव्य जारी किया, जिसके अनुसार चार प्रमुख बातें और लोकहित की गई है-

पहली-भारतीय न्यायपालिका पर गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है।

दूसरी-इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

तीसरी-मेरे ऊपर करप्शन के आरोप नहीं लगाए जा सकते, इसलिए इतना नीचे गिर कर बात की गई है और मैं इसका जवाब देकर इतने हल्के स्तर पर बात नहीं कर सकता।

चौथी- मैं आगामी दिनों में 1 सप्ताह में आने वाले सभी महत्वपूर्ण प्रकरणों को की सुनवाई करता रहूंगा, और आदेश भी पारित करता रहूंगा।

अब पूरा प्रश्न यह उठता है कि आगामी सप्ताह में कौन-कौन से प्रमुख प्रकरण सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस रंजन गोगोई के सामने आने वाले हैं-

नंबर 1-राहुल गांधी पर अवमानना का प्रकरण, जो कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए चौकीदार चोर है कि नारे लगाए हैं।

नंबर दो-पूर्व कोलकाता कमिश्नर राजीव कुमार प्रकरण भी आ सकता है।

नम्बर 3- उद्योगपति अनिल अंबानी पर बकाया चुकाने संबंधी प्रकरण की भी आगामी सप्ताह में सुनवाई के लिए लिए जा सकते हैं।

नम्बर 4- राफेल पर पूर्व में दिए गए निर्णय को रिव्यू पिटिशन पर लेकर आगामी माह में आरंभिक सुनवाई की जा सकती है।

अंत में सर्वाधिक महत्वपूर्ण चर्चा जो कि इस प्रकरण में उभर कर सामने आई है, इस हलफनामे के कानूनी क्षेत्र व राजनीतिक क्षेत्र में पड़ने वाले दूरगामी परिणाम।

कानूनी क्षेत्र में इस हलफनामे का दूरगामी परिणाम यह होगा कि उच्चतम न्यायपालिका के जज राजनीतिक और आर्थिक क्षेत्र के प्रभावशाली व्यक्तियों और संगठनों के विरुद्ध निर्णय करने में ना केवल डरेंगे, बल्कि निष्प्रभावी भी नज़र आएंगे, जो कि व्यापक अर्थ में निष्पक्ष न्यायपालिका की व्यापक उपलब्धता को देश में बाधित करेगा।

इस हलफनामे का दूसरा प्रभाव राजनीति क्षेत्रों में भी पड़ेगा। हालांकि, अभी तक ने तो कांग्रेस पार्टी ने अपनी कोई प्रतिक्रिया दी है, और ना ही भारतीय जनता पार्टी ने।

इधर, मीडिया में रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया पर आगामी सप्ताह में आने वाले प्रकरणों के आधार पर बहस आज सुबह से ही शुरू चुकी है।

जस्टिस रंजन गोगोई ने अपनी प्रतिबद्धता भारतीय संविधान द्वारा दी गई शक्तियों पर जताई है। अब आगे आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि कानूनी क्षेत्र के लोग और राजनीतिक दल व स्वतंत्र टिप्पणी कार इस प्रकरण पर ऐसी टिप्पणी करेंगे। यह एक अनोखा प्रकरण है और कुछ कुछ मी टू से मिलता जुलता नजर आ रहा है।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।)