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” संविधान की रक्षा की आड़ और लॉ एनफोर्समेंट हेतु निर्धारित एजेंसियों में टकराव पैदा करने का कुत्सित प्रयास” अरे दीदी शर्म करो ,सच्चे हिंदुस्तानियों पर रहम करो ।

प्रिय देशवासियों आप सभी को याद होगा और जिन्हें नहीं है उन्हें मैं बताना चाहूंगा कि कुछ ही वर्षों पूर्व हमारे भारत के एक राज्य के मुख्यमंत्री जो प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार होने वाला था ,को सीबीआई ने बैठाकर नौ घंटे तक पूछताछ की थी…उस मुख्यमंत्री ने और उस राज्य के तत्कालीन गृहमंत्री ने सीबीआई को सिर्फ सहयोग दिया था।
तब सीबीआई भी बेहतर थी और लोकतंत्र का संघीय ढाँचा भी अभेद्य था…किसी भी गैर भाजपाई मुख्यमंत्री ने विरोध नहीं किया क्योंकि उनकी नजर में वह मुख्यमंत्री ‘संप्रदायिक अछूत’ था।

अब … चूँकि ‘धन्नाई हुई मैडम और ‘अटेर-भंटेर’ सभी भ्रष्टाचार की लोकप्रिय और मधुर धाराओं में जमानत पर हैं..किसी का बाप जेल में है, तो किसी की माँ जमानत पर बाहर हैं यानि इनकी कुंडली के 32/32 गुण मिल रहे है ।

चुनावों के समय मोदी और शाह का विरोध संघ का विरोध है… यह एक मात्र तरीका है खुद को जीवंत रखने का।

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मोदी भारतीय राजनीति के परफेक्शनिस्ट हैं।उनकी ‘राजनीतिक बाइट’ के बाद कोई राजनीति नहीं माँगता…. ये उसी बाइट का डर है। पढ़ सकते हैं तो पढ़ लीजिए… देखकर समझ पायें तो समझ लीजिए, ये डरे हुए लोगों का समूह है जिसको अपनी राजनीतिक जमीन खो जाने का भय सता रहा है …जो इनको ‘बाप-दादा-ससुर रूपी पट्टे’ के रूप में मुफ्त मिली है।

मेरा विनम्र अनुरोध है भारत के प्रधान सेवक आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी से कि वो भी एक बार अलोकतांत्रिक हो जाये…जैसा उनपर आरोप लगता है, बस एक बार उतने अलोकतांत्रिक हो जायें, जीवन भर भाजपा को वोट दूँगा बस वो लोकतंत्र की परिभाषा को भी दूषित करने में जुटे इन भ्रष्टाचारियों की पैदावार का बीज बदल दें…. लोकतंत्र के असली ‘फसली-कीड़ें’ यही हैं जिन्होनें डर की खेती की है…मात्र डर।

आज एक तरफ भारतीय जनता के प्रधान सेवक के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर श्री नरेंद्र मोदी जी जब अपने द्वारा भारत के विकास और जनसाधारण के उत्थान हेतु किए गए कार्यों को गिना कर पुनः जनसेवा का अवसर मांग रहे हैं ….. वहीं दूसरी तरफ ये तथाकथित लूटमारी गिरोह के सदस्य एकजुट होकर केवल एक मोदी शाह के डर के दुष्प्रचार से जनता को डरा कर.. अपनी वर्षों से चली आ रही गंदी दुकानदारी को कायम रखना चाहते हैं ,यही मूल फर्क है।

लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की टंटेबाजी अब बंद होनी चाहिए, कम से कम इन लुटेरों द्वारा..अन्यथा मुझे ही नहीं बल्कि हर जिम्मेदार समर्पित भारतीय को लोकतंत्र से नफरत हो जायेगी ।

जिन्हें पूरी जानकारी नहीं है उन मित्रों को बता दूं कि आखिर बंगाल में ममता बनर्जी द्वारा किए जा रहे इस तथाकथित नाटक का मूल आधार शारदा चिटफंड घोटाला क्या है ? नीचे पढ़िये।

शारदा चिटफंड घोटाला: 3 से 4 हजार करोड़ रुपये की लूट का है मामला, जानिए- 2013 से शुरू हुई जांच की पूरी कहानी
शारदा ग्रुप अपनी साफ छवि दिखाने के लिए फुटबॉल क्लब से लेकर दुर्गा पूजा के इवेंट्स में सहयोग करने के दावा करता था। इतना ही नहीं शारदा ग्रुप की वजह से तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं को फाइनेंशियल सपोर्ट मिलने की बात सामने आई।
2013 में पहली बार सामने आया यह शारदा चिट फंड घोटाला 3 से 4 हजार करोड़ रुपये की लूट का मामला है। अब तक सामने आई जांच में इस घोटाले से सबसे ज्यादा तार ममता बनर्जी की पार्टी के नेताओं के ही जुड़ें हैं।

इतना ही नहीं इस घोटाले की पहुंच पश्चिम बंगाल के अलावा असम, ओडिशा और त्रिपुरा में भी रही है।

शारदा चिट फंड घोटाले की शुरुआत शारदा ग्रुप की चलाई जा रही पूंजी स्कीम के तहत हुई है। आरोप है कि शारदा ग्रुप ने 200 कंपनियों के माध्यम द्वारा गलत तरीके से लोगों का पैसा ठगा है।
अप्रैल 2013 तक शारदा ग्रुप के पास करीब 17 लाख लोगों का 3 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा इकट्ठा हुआ। उस समय सुदीप्त सेन शारदा ग्रुप के चैयरमैन थे।
साल 2013 में विपक्षी पार्टियों ने सुदीप्त सेन की पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी से नजदीकियां होने का आरोप लगाया और इस मामले ने तूल पकड़ लिया।

मामले के तूल पकड़ने के बाद इस घोटाले की आंच ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के नेताओं तक पहुंचने लगी।
तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सासंद कुणाल घोष शारदा ग्रुप के मीडिया डिवीजन को हेड कर रहे थे।
और आज 4 फरवरी 2019 को रिपब्लिक भारत टीवी चैनल पर अर्णब गोस्वामी ने इन्हीं कुणाल घोष का स्टिंग ऑपरेशन द्वारा वीडियो दिखाया जिससे एक बार पुनः पूरी भारत की जनता के सामने तृणमूल कांग्रेस, ममता बनर्जी और शारदा चिटफंड घोटाले की सच्चाई सामने आ गई ।

ममता बनर्जी की पार्टी की एक ओर सासंद शताब्दी रॉय भी इस ग्रुप के प्रमोशनल इवेंट्स में हिस्सा लेती थीं।

ऐसा आरोप है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद इस ग्रुप के दो ऑफिसों का उद्घघाटन किया।

साल 2009 में शारदा ग्रुप पहली बार सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के निशाने पर भी आया था।
शारदा ग्रुप ने उस वक्त क्रॉस होल्डिंग्स बढ़ाने के लिए 200 कंपनियां खोली, इसी को देखते हुए साल 2010 में SEBI ने शारदा ग्रुप के खिलाफ जांच करनी शुरू की।

SEBI की जांच को देखते हुए शारदा ग्रुप ने अपने पैसे के मोड को बदलने का फैसला किया. शारदा ग्रुप में जो लोग भी अपने पैसे निवेश कर रहे थे उनके पैसे का कंपनी क्या कर रही है इस बात की कोई जानकारी नहीं दी जा रही थी।

वर्ष 2011 में SEBI ने पश्चिम बंगाल सरकार को शारदा ग्रुप को लेकर चेतावनी दी, वर्ष 2012 तक SEBI ने शारदा चिट फंड घोटाले में पैसे के हेर फेर का पता लगा लिया, लेकिन साल 2013 तक यह कंपनी चलती रही, हालांकि अप्रैल 2013 में यह शारदा ग्रुप का घोटाला सामने आ गया।

अप्रैल 2013 में शारदा ग्रुप के लिए काम करने वाले 600 एजेंट तृणमूल कांग्रेस के दफ्तर के आगे धरना देने पहुंचे और इस मामले में जांच की मांग की।
18 अप्रैल 2013 को कंपनी के चैयरमैन सुदीप्त सेन के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी कर दिया गया और 23 अप्रैल 2013 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

मामले को तूल पकड़ता देख पश्चिम बंगाल की इन्हीं मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी ने 22 अप्रैल 2013 को जांच के लिए चार सदस्यों की कमेटी का गठन किया।

जांच की घोषणा के 2 दिन बाद ही ममता बनर्जी ने घोटाले की चपेट में आने वाले लोगों के लिए 500 करोड़ रुपये की राहत देने का एलान भी किया. इसके साथ ही बंगाल सरकार ने मामले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम भी बनाई।

इसके अलावा ममता बनर्जी सरकार ने इस मामले की जांच के लिए CBI, ED जैसे एजेंसियों का विरोध करना भी शुरू कर दिया।

आप सभी की जानकारी के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कुछ वक्त के बाद ही यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया और राज्य सरकार की जांच से संतुष्ठ नहीं होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने CBI और ED को शारदा चिट फंड घोटाले की जांच करने के आदेश दिए।

” विशेष ध्यान दीजिएगा की सीबीआई जांच के आदेश मोदी सरकार ने नहीं बल्कि भारतीय संविधान के द्वारा स्थापित सर्वोच्च न्यायिक संस्था सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे।”

सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर के बाद पश्चिम बंगाल में केंद्र की जांच एजेंसी ED ने मामले की जांच शुरू की।
अप्रैल 2014 में ED ने शारदा ग्रुप के चैयरमैन सुदीप्त की पत्नी और बेटे को गिरफ्तार किया. ED ने इस मामले में टीएमसी के सासंद अहमद हसन और अर्पिता घोष से भी पूछताछ की।

मई 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़ी हुई सारी जांच CBI को ही करने को कहा।

सुप्रीम कोर्ट की आदेश के बाद बंगाल सरकार की एसआईटी ने भी सारी जानकारी CBI को दे दी

जांच को आगे बढ़ाते हुए CBI ने नंवबर 2014 में टीएमसी के सासंद सिरनजॉय बॉस को शारदा घोटाले के साथ जुड़ा होने की वजह से गिरफ्तार किया।

दिसबंर 2014 में CBI ने बंगाल सरकार के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर मदन नित्रा को भी घोटाले से जुड़े होने के आरोपों के चलते गिरफ्तार किया।

लेकिन अब मामले ने कोलकाता के कमिश्नर राजीव कुमार से सीबीआई की पूछताछ के चलते तूल पकड़ा है।

दरअसल, जब बंगाल सरकार ने इस जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था, तब 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी श्री राजीव कुमार उसे हेड कर रहे थे।
सीबीआई श्री राजीव कुमार के पास उपलब्ध जानकारी को सटीक रूप में प्राप्त करने के लिए यदि उन्हें चार बार बुला सकती है और वह फिर भी नहीं आते हैं ना ही जवाब देते हैं तब संदेहात्मक परिस्थिति स्वमेव उत्पन्न होती है,

और फिर अपने दायित्व का निर्वहन करने के लिए सीबीआई अधिकारी जब श्री राजीव कुमार के पास जाते हैं तो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी यह नया बखेड़ा खड़ा कर देती है आखिर क्यों???

भारत की जनता इस प्रश्न का जवाब चाहती है???

भारतीय लोकतंत्र की रचनात्मक निष्पक्षता के लिए प्रश्नकर्ता

डॉ. आलोक भारद्वाज
स्वतंत्र राजनीतिक विश्लेषक

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