Rafale aircraft of india

रामगोपाल जाट@जयपुर।

भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के चलते एक बार फिर से जल्द से जल्द राफेल विमान (Rafale aircraft) वायुसेना को सौंपने की मांग जोर पकड़ती जा रही है। लोग सोशल मीडिया पर इस तरह से अभियान चला रहे हैं।

इस एयर क्राफ्ट (aircraft) को खरीदने के कारण बीते 2 साल से देश की राजनीति में उफान आया हुआ है। विपक्षी दलों के द्वारा भारत सरकार पर राफेल विमान खरीदने में घोटाला (Rafale scam) किए जाने के आरोप लगते रहे हैं। कहा जा रहा है कि भारत ने राफेल पर मोटा पैसा खर्च किया है।

किन्तु आपको यह जानकर जरूर आश्चर्य होगा कि 48 राफेल विमानों को खरीदने जितना धन बीड़ी पीकर धुंआ में उड़ा देता है। यानी देश हर साल जितना खर्चा बीड़ी पीने वालों पर किया जाता है, उतने में हम 48 राफेल विमान खरीद सकता है।

भारत सरकार के 2017 स्वास्थ्य आंकड़ों के मुताबिक देश में बीड़ी पीने से बीमारी होने और मृत्यु के कारण 12.4 billion dollar खर्च किए जाते हैं। यह पैसा तेंदूपत्ता से होने वाली सालाना आय (Annual Income) से भी ज्यादा है।

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जॉन आरएम (Johan R.M-2018). के मुताबिक ‘2017 में तम्बाकू नियंत्रण के लिए भारत में बीड़ी पीने से होने वाली बीमारी और मृत्यु पर यह आंकड़ा सामने आया है।’

यह 48.4 बिलियन डॉलर का खर्च भारत में 30 साल से लेकर 69 वर्ष तक के लोगों के बीच बीड़ी पर किए जाने वाले खर्चे के रूप में सामने आया है। जो बीमारियों और मौत पर होने वाला खर्च है।

इस तरह किया गया आकंलन

भारत में स्वास्थ्य पर सालाना व्यय किए जाने वाले वयस्क लोगों पर हो रहे खर्च के लिए किए ‘राष्ट्रीय नमूना सर्वे डेटा’ (National sample survey) में यह बात सामने आई है कि देश में प्रतिवर्ष तम्बाकू से होने वाली बीमारियों पर इतना खर्च सरकार करती है।

यह खर्च ग्लोबल (Global expenditure) व्यय के मुकाबले ज्यादा है। सर्वे में सामने आया है कि इस मोटे व्यय के बाद भी हर साल बीड़ी पीने से मरने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है।

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इस तरह खर्च का किया गया आंकलन

(1) बीड़ी पीने से होने वाली बीमारियों पर किया गया खर्च (expenditure) (2) अप्रत्यक्ष रूप से किया गया अनुमानित खर्च (approx expenditure) (3) परोक्ष रूप से असामयिक मृत्यु पर हुआ व्यय।

साल 2017 के आंकड़ों के मुताबिक 30 साल से 69 वर्ष तक के लोगों द्वारा भारत में बीड़ी पीने और उससे होने वाली बीमारियों और मौत पर अनुमानित खर्च 805.5 बिलियन रुपए खर्च होते हैं (48.4 billion dollar), जो कि 20.9% प्रत्यक्ष और 79.1% अप्रत्यक्ष लागत है। इसका मतलब यह है कि कुल 93.7% व्यय बीड़ी से होने वाली बीमारियों (disease) पर होता है।

निष्कर्ष यह है

बीड़ी पर सालाना कुल खर्च भारत के वार्षिक घरेलू उत्पादन (Annual production of india) का .5% है, जबकि हर साल भारत सरकार को कर (Tax) एवं कराधान से कुल वार्षिक आय में बीड़ी से केवल आधा प्रतिशत ही हिस्सा होता है।

इधर, सरकार के द्वारा प्रत्यक्ष रूप में बीड़ी से होने वाली बीमारियों पर कुल स्वास्थ्य व्यय का करीब 2.24% खर्च किया जाता है। इसको स्वास्थ्य सेवाओं पर किए जाने वाले कुल व्यय का बड़ा हिस्सा माना गया है।

बताया जाता है कि बीड़ी पीने पर लोग अपनी आय का मोटा पैसा खर्च करते हैं। देखा जाए तो भारत जितना रुपया हर साल बीड़ी पीने वालों पर व्यय करता है, उतने में 48 राफेल लड़ाकू विमान (Rafale aircraft) खरीद सकता है, जो पाकिस्तान समेत चीन को ध्वस्त करने के लिए काफी हैं।