गुलामी की हद तक हम भाजपा के समर्थक हैं-कालवी

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जयपुर।
राजपूत करणी सेना के संरक्षक लोकेन्द्र सिंह कालवी ने कहा है कि राजपूत समाज भरतीय जनता पार्टी का गुलामी की हद तक समर्थक है। उन्होंने कहा कि समाज हित के कोई भी काम करते हैं, इसके बाद यदि कोई हमें गुंडे कहें, तो हम सात बार गुंडे होना चाहेंगे।
कालवी ने कहा कि हमनें 23 सितम्बर 2018 को चित्तौड़गढ़ में सभा की थी। उसमें महिलाओं ने 5 घण्टे तक बरसात में डटकर समाज हित का समर्थन किया। उन्होंने कहा है कि एससी-एसटी एक्ट में पुनः बदलाव, आरक्षण की समीक्षा और पद्मावती मामले की तरह आगे किसी फिल्म को लेकर कोई विवाद नहीं हो, इसके लिए केंद्र सरकार को चाहिए कि एक स्क्रीनिंग कमेटी बने।
पिंक सिटी प्रेस क्लब के पास होटल नारायण निवास में पत्रकारों से बात करते हुए कालवी ने कहा है कि दलितों पर अत्याचार को लेकर तुरंत गिरफ्तारी के लिए बने कानून पर राष्ट्रपति ने साइन किये हैं, लेकिन यह कानून ही गलत है इसलिए केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि इस कानून को बदले और कानून बदलने के बाद फिर से राष्ट्रपति के हस्ताक्षर हो जाएंगे।
राजपूत समाज के बड़े नेता माने जाने वाले कालवी ने कहा कि हम चाहते हैं कि एससी-एसटी एक्ट को दलित नेता और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के बनाये हुए 2007 के कानून अनुसार बनाया जाए, जिससे किसी को भी बिना जांच के गिरफ्तार नहीं किया जा सके।
राजपूत नेता कालवी ने कहा कि केंद्र सरकार  को चाहिए कि वह एससी एसटी एक्ट को विड्रॉ करे। उन्होंने सभी पार्टियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि आरक्षण देश को दीमक की तरह चाट रहा है और इसको पार्टियों ने भूत की तरह बना दिया है। उन्होंने राजस्थान सरकार से मांग करते हुए कहा कि आनंदपाल एनकाउंटर मामले के बाद हुए उपद्रव में 12 हज़ार लोगों पर जो मुकदमा दर्ज किया गया था उसको तुरंत प्रभाव से हटाए।
कालवी ने दावा किया कि राजपूतों की नाराजगी के चलते भारतीय जनता पार्टी को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। इसका सबसे बड़ा सबूत राजस्थान में इसी साल के शुरू में हुए उप चुनाव हैं, जिनमें भाजपा को अजमेर, अलवर और भीलवाड़ा में हार का सामना करना पड़ा है।
केंद्र और राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए राजपूत नेता ने कहा है कि दो-पांच दिन में राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव आचार संहिता लागू होगी, उससे पहले पहले एससी-एसटी एक्ट, आरक्षण की समीक्षा और ऐतिहासिक फिल्मों के लिए स्क्रीनिंग कमेटी का गठन किया जाना चाहिए।
एससी-एसटी एक्ट, आरक्षण की समीक्षा  और क्षत्रिय समाज के अतीत पर बनाई जा रही फिल्मी विवादों को लेकर 23 अक्टूबर 2018 को चित्तौड़गढ़ में विशाल सभा का आयोजन किया जा चुका है। इसी तरह की सभा 21 अक्टूबर को जयपुर की धरती होगी।
दलित समाज के लिए बनाए एसी-एसटी हिंदू समाज विघटित हुआ है। इस तरह के कानून के कारण ही सभी पार्टियों से हमारी खासी नाराजगी है। मध्य प्रदेश के कई गांव में इस बात की तख्तियां लगा दी गई है कि आपकी गलत हरकतों से पूरा देश चिंतित है, इसलिए वोट मांगकर हमें लज़्ज़ित नहीं करें।
इस मौके पर राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष  महिपाल सिंह मकराना ने कहा कि  आज भी हमारी रगो में भगत सिंह का खून बह रहा है, इसलिए हमें बहरों को सुनाने के लिए आवाज़ करनी पड़ रही है। उन्होंने राजस्थान सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि एक समाज को खुश करने के लिए दूसरे समाज पर झूठे मुकदमे करना बेहद गलत है। अगर इन मुकदमों को वापस नहीं लिया तो उसको विधानसभा चुनाव में बड़ा खामियाजा उठाना पड़ेगा।
चित्तौड़गढ़ में हुई सभा को ऐतिहासिक और अब तक की सबसे बड़ी सभा बताते हुए मकराना ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल या सामाजिक संगठन को चैलेंज है, इतनी बड़ी मीटिंग करके दिखा दे। उन्होंने आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि अब तक आरएसएस आरक्षण की समीक्षा करने की बात कहता आ रहा था। लेकिन पहली बार संघ प्रमुख मोहन भागवत ने सार्वजनिक रूप से कहा कि आरक्षण जरूरी है।
इस मौके पर मकराना ने चेतावनी देते हुए कहा है कि जो हमारी बात नहीं करेगा, वह नुकसान उठाएगा उन्होंने कहा कि हमारा वोट उसी को जाएगा, जो हमारे इन तीन मुद्दों को लेकर बात करेगा। इसके अलावा किसी से कोई मीटिंग नहीं होगी।
सरकार को चेतावनी देते हुए महिपाल सिंह मकराना ने कहा है कि पद्मावती फिल्म के बनने के बाद उसका विरोध हुआ था। लेकिन पृथ्वीराज चौहान की जीवन पर बन रही फिल्म में भी अगर ऐतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़छाड़ की गई, तो फिल्म को बनने नहीं दिया जाएगा, और उसके बाद जो विवाद होगा, जो जंग होगी, उसके लिए सरकार खुद जिम्मेदार होगी।