नई दिल्ली।

जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए फिदायीन हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्ते बेहद खराब दौर से गुजर रहे हैं।

विश्व पटल पर जहां पाकिस्तान की आलोचना हो रही है, वहीं भारत की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार कई अहम फैसले ले चुकी है, जिसके चलते पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बेहद खस्ता दौर में जाने के लिए तैयार है।

मोदी सरकार के द्वारा सबसे पहले पाकिस्तान के ऊपर 200% इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के बाद अगले ही दिन पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा छीन लिया गया।

इसके साथ ही जम्मू कश्मीर में सक्रिय 14 अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा और सुविधाएं वापस ले ली गई। आज जम्मू कश्मीर से 24% आबादी नेताओं को गिरफ्तार किया गया है।

यहां पर स्थिति बिगड़ने की संभावना को देखते हुए केंद्र सरकार ने अर्धसैनिक बलों की 100 कंपनियां और भेजी गई हैं। दूसरी तरफ पाकिस्तान भारत के संभावित हमले को देखते हुए राजस्थान, पंजाब, जम्मू कश्मीर और गुजरात से लगती हुई पाकिस्तान की सीमाओं पर फौज को तैनात कर चुका है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान यूनाइटेड नेशंस से भारत की तरफ से होने वाले संभावित हमले के लिए सहायता मांग रहे हैं, दूसरी तरफ भारत से जाने वाला लाल टमाटर का निर्यात कम होने के कारण पाकिस्तान में टमाटर के भाव ढाई ₹100 तक पहुंच चुके हैं।

पाकिस्तान से आने वाले सामानों पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाए जाने के कारण बाघा बॉर्डर के उस तरफ 200 से ज्यादा ट्रक भरे सामान के खड़े हैं, लेकिन भारत में डिमांड नहीं होने के कारण उनको नहीं लाया जा सकता है।

इन अहम फैसलों के साथ ही भारत के जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने 2 दिन पहले ही कहा था कि पाकिस्तान को जाने वाला सिंधु, चेनाब और झेलम नदी के पानी को रोका जाएगा।

सिंधु नदी में पाकिस्तान के हिस्से के अलावा भारत के हिस्से का भी करीब 20% पानी अतिरिक्त पाकिस्तान को दिया जा रहा है। इस पानी को बांध बनाकर भारत की यमुना नदी में डाला जाएगा।

आपको बता दें कि पाकिस्तान की कृषि का 80 फ़ीसदी हिस्सा सिंधु नदी से सिंचित होता है। यदि पाकिस्तान को जाने वाले पानी का 20 फ़ीसदी हिस्सा भारत द्वारा कटौती किया जाता है तो वहां की औसतन करीब 8 करोड़ जनता प्रभावित होगी।

यातायात मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक अब पाकिस्तान दाने दाने के बाद पानी की बूंद को भी तरस जाएगा, लेकिन क्या यह सच है कि भारत के द्वारा अपने हिस्से का पानी रोकने के बाद पाकिस्तान में पानी के लिए त्राहिमाम त्राहिमाम हो जाएगा?

दरअसल अंतरराष्ट्रीय समझौते के तहत भारत सिंधु नदी में करीब 80 फ़ीसदी पानी पाकिस्तान को देता है, जबकि कुल पानी का 20% हिस्सा खुद लेता है।

यह नदी पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था का की रीड की हड्डी कही जाती है। यह बात तो सच है कि पाकिस्तान को दिए जा रहे भारत के हिस्से के पानी को रोकने के बाद वहां की कृषि व्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।

लेकिन जिस तरह से आम सभाओं में नेताओं के द्वारा कहा जाता है, उस तरह से व्यापक असर पड़ने की संभावना नहीं है।

पाकिस्तान की 19 चीजें भारत को निर्यात होती है, जबकि खुद पाकिस्तान भारत से 137 चीजों का आयात करता है। भारत और पाक के बीच 2 लाख अरब डॉलर का सालाना व्यापार होता है।

भारत के द्वारा इंपोर्ट ड्यूटी 200% बढ़ाने के कारण पाकिस्तान से भारत को जाने वाले सामान में भारी कमी आई है। वहां की निर्माता कंपनियां और व्यापारी इससे बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं।