जयपुर।
गांव में किसान के परिवार से उठकर कॉलेज शिक्षा और फिर विश्वविद्यालय अध्ययन के साथ छात्रसंघ का चुनाव लड़ना, जिसमें भाग्य का साथ नहीं देना, यह कोई मामूली घटना नहीं होती। इसके लिए एक व्यक्ति को अपना आधा अति महत्वपूर्ण जीवन खपाना पड़ता है। फिर भी सफलता मिल ही जाये, यह जरूरी नहीं है।

आज हम आपको एक ऐसी ही शख्सियत से मिलाने जा रहे हैं, जो ठेठ गांव, गरीब, किसान परिवार से संबंध रखते हैं। जिन्होंने जीवन में कई बार हार का मुंह देखा, किंतु लक्ष्य पर प्रति अड़िग रहने की परिवार से मिली सीख ने उनको राज्य की राजनीति के एक अहम पड़ाव पर लाकर खड़ा कर दिया है।

हम बात कर रहे हैं भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता डॉ. सतीश पूनिया की। डॉ. सतीश पूनिया वैसे तो चूरू जिले से आते हैं, किंतु बरसों पहले से जयपुर को ही अपनी कर्मभूमि बनाकर काम कर रहे हैं। राजस्थान विवि जैसे शिक्षण संस्थान में छात्रसंघ का चुनाव लड़ा, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया।

इसके बाद लगातार विद्यार्थी परिषद में काम किया, साथ ही आरएसएस से जुड़े। संघ से मिली देश प्रेम की शिक्षा और किसान परिवार से मिले संस्कारों ने डॉ. सतीश पूनिया को एक के बाद एक लगातार हार मिलने के बाद भी उनके जीतने की भावना नहीं मरी।

भाजपा के कर्मठ कार्यकर्ता, संघ के अनुशासित स्वयं सेवक और अब भाजपा के सदस्यता अभियान के प्रदेश प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया ने अब तक तीन विधानसभा चुनाव लड़े हैं, जिनमें से उनको दो बार हार और एक में जीत का स्वाद मिला है।

आमेर से विधायक सतीश पूनिया से ‘नेशनल दुनिया’ के एडिटर रामगोपाल जाट ने एक एक्सक्लुजिस इंटरव्यू के जरिये राज्य की राजनीति, किसान कर्जमाफी, प्रदेश में बढ़ते अपराधों और भाजपा सदस्यता अभियान के संबंध में विस्तार से बातचीत की। आइये देखते तमाम बातचीत का पूरा साक्षात्कार—

प्रश्न— बजट को लेकर क्या अपेक्षाएं हैं और पिछली सरकार के कार्यों को लेकर आप क्या सोच रखते हैं, क्या राज्य सरकार को पिछली सरकार के कार्यां को जारी रखना चाहिये?

डॉ. पूनिया— राजस्थान में वित्तीय प्रबंधन एक बड़ा मुद्दा रहा है। साल 1993 की तत्कालीन मुख्यमंत्री भैंरूसिंह शेखावत की सरकार तक राज्य को बिमारू राज्य की श्रेणी में रखा जाता था, जिसको विशेष प्रबंधन के द्वारा भाजपा सरकार ने निकालने का प्रयास किया। वर्ष 1998 की अशोक गहलोत सरकार के समय एक धारणा बन गई थी कि खजाना खाली है, सरकार कुछ नहीं कर सकती है। साल 2003 से 2008 की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की पहली सरकार ने राज्य के मूलभूत विकास में खूब काम किया। राज्य में करीब डेढ़ लाख शिक्षकों की भर्ती पूरी पारदर्शिता और उत्तम सोच के साथ की गई। शहरी और ग्रामीण विकास के अभूतपूर्व काम हुये। बीच में 2008 से 2013 में फिर से एक निराशावादी सरकार से सामना हुआ, किंतु साल 2013 में बनी सरकार दूसरी वसुंधरा राजे सरकार को ​विकास के लिये याद किया जाएगा। अब जो सरकार है, वह गुणा—अवगुण को लेकर बात करती है। बजट में भी राज्य सरकार ने पूरी तरह निराश किया है। यह किसानों के लिये पूरी तरह से नाकाम सरकार है। सरकार पूर्ण रूप से केंद्र सरकार पर टिक गई है, विकास कार्यों के लिये भी केंद्र पर निर्भर हो गई है, यह वर्तमान सरकार की बेहद निराशावादी सोच है।

प्रश्न— राजस्थान में किसान कर्जमाफी बड़ा मुद्दा है, कांग्रेस सरकार बनने से पहले राहुल गांधी, अशोक गहलोत और सचिन पायलट ने बड़े वादे किये, लेकिन महज 7 माह के भीतर ही दो दर्जन से ज्यादा किसानों ने कर्ज के बौझ तले दबकर सुसाइड कर लिया?

डॉ. पूनिया— इस समय किसान पर सबका ध्यान केंद्रित है। किसान को झूठ बोलकर, फरेब कर, उसके साथ धोखा कर उसके वोट तो बटोर लिये गये, लेकिन उसके साथ ईमानदारी से कर्जमाफी का काम नहीं किया गया। राज्य के 59 लाख किसानों पर कर्ज था। 2013 की सरकार ने 28 लाख किसान को कर्जमाफी किया गया, सभी किसानों का सहकारी बैंकों से लिया गया 50 हजार रुपये तक का कर्जमाफ किया गया। दिक्कत तब आई, जब राज्यपाल के ​अभिभाषण में 2 लाख की कैपिंग लगा दी और किसानों के साथ धोखा किया गया। किसानों ने वोट दिया था कि उनका पूर्ण कर्जमाफ किया जायेगा, लेकिन जब यह नहीं हुआ तो किसान निराशा हो गये। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चमत्कारिक छवि तो एक कारण है ही, साथ ही राज्य सरकार की कर्जमाफी नहीं करना भी उनकी हार का बड़ा कारण है।

प्रश्न— अपराधों में राज्य टॉप गियर में चल रहा है। छोटी बच्चियों से रेप, हत्या तो एक बड़ा मामला है, इसके साथ ही विवि की शिक्षिकाओं में भी बलात्कार का भय दिखाया जा रहा है, इसको लेकर आप क्या सोचते हैं?

डॉ. पूनिया— एक वाक्य में कहूं तो यह बात पूरी तरह से सही है कि राज्य सरकार अपराध पर नकैल लगाने में पूरी तरह से विफल हो चुकी है। विवि के शिक्षकों को धमकी तो एक बानगी है, लेकिन बच्चियों के साथ रेप, हत्याएं, महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार राज्य सरकार की विफलता दिखाने के लिये पर्याप्त है। बजरी माफिया दिन दहाड़े किसी नागरिक को ट्रक से रौंदकर चला जाता है, पुलिस पर हमले हो रहे हैं, हमेशा शांत रहने वाला राजस्थान अपराध की गिरफ्त में आ चुका है।

प्रश्न— बजरी माफिया पर रोक लगाने को लेकर अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री बनने के कुछ समय बाद ही ही कहा था कि बजरी तस्करी को रोक नहीं सकते, क्योंकि इससे असंतोष बढ़ेगा, उनके बयान को कैसे देखते हैं।

डॉ. पूनिया —डॉ. बजरी माफिया को लेकर मुख्यमंत्री का यह बयान बेहद निराश व्यक्ति की पहचान को उजागर करता है। प्रदेश के मुखिया को बजरी माफिया पर लगाम लगाने और अपराध को कंट्रोल करने का जिम्मा है, जो अपनी जिम्मेदारी से बयान देकर भाग नहीं सकते। विपक्ष में रहने कांग्रेस वाले बजरी को लेकर भाजपा पर खूब आरोप लगाते थे, लेकिन अब 7 माह बाद भी सरकार इसे रोकने के लिए कठोर कदम नहीं उठा पाई है। सरकार को चाहिए कि बजरी के विकल्पों के साथ सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखने का काम करना चाहिये।

प्रश्न— सदस्यता अभियान को लेकर क्या तैयारियां हैं? पिछली बार मिसकॉल के द्वारा सदस्य बनाये गये, उनमें से कई गायब हो गये थे। इस बार किस प्रकार सदस्य जोड़ने और उनको अपने साथ बनाये रखने के लिये क्या कदम उठाये जा रहे हैं?

डॉ. पूनिया— पहले जनसंघ के समय 5 रुपये और सदस्यता की पर्ची भरकर सदस्य बनते थे। बाद में जनसंघ से भाजपा बनने पर पार्टी के सदस्य बनने पर लोग गर्व महसूस करने लगे। समय बदला, साल 2014 के वक्त और बाद में करोड़ों लोगों को इस तरह से मेन्युअल सदस्य बनाना आसान नहीं है। ऐसे में भाजपा ने डिजीटल प्रयोग किया और 11 करोड़ सदस्य बने। किंतु उसमें दिक्कत यह हो गई कि कुछ नंबर बंद हो गये, कुछ ने पोर्ट करवा लिया। उसमें हमने 80 लाख में से 52 लाख सदस्यों को जोड़े रखने में कामयाब रहे। यह फिल्टर करने के बाद का आंकड़ा है। डिजीटल युग में मिसकॉल बेहद अच्छा और सस्ता कार्य है। इस बार हमने मिसकॉल के बाद ​बूथ और अग्रिम मोर्चों के कार्यकर्ताओं को सदस्यों के फॉर्म भरवाने की जिम्मेदारी दी है। हमको उम्मीद है कि इस नई और पारदर्शी प्रक्रिया से इस बार नये—पुराने मिलकर 75 लाख से अधिक सदस्य हो जायेंगे।

प्रश्न— बिजली और पानी बड़ा मुद्दा है। खासतौर पर किसानों के लिये, किसान बिजली ​फ्री देने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार लाचार नजर आ रही है। राज्य सरकार किस तरह से काम कर सकती है, ताकि असंतोष नहीं पनपे?

डॉ. पूनिया— राज्य की भौगोलिक स्थिति बेहद जटिल और अलग—अलग है। बड़ी हास्यापद ​हालात है कि आजादी के 72 साल बाद भी यह हालात है। राज्य में लंबे समय तक कांग्रेस ने शासन किया, लेकिन कभी प्रबंधन और दूरदर्शिता के साथ काम नहीं किया गया। आज किसान की हालात बेहद बुरी है। सरकार के पास कोई रोडपैम नहीं है। सरकार वीसीआर भरने में व्य​स्त है। किसान दुखी है, परेशान है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। पानी को लेकर स्थिति यह है कि टैंकर माफिया के आगे सरकार ने घुटने टेक दिये और जनता ने पानी को लेकर त्राहिमाम—त्राहिमाम कर दिया। सरकार को अटल बिहारी वाजयेपी की नदी जोड़ने की योजना पर काम करना चाहिये। केंद्र सरकार ने 1500 ब्लॉक चिन्हित किये हैं, राज्य सरकार को उस योजना से जुड़कर काम करना चाहिये, ताकि जनता को पीने का शुद्ध जल उपलब्ध हो सके।