सतीश पूनिया ने कर्जमाफी, बीमा और जल आंकड़ों के साथ रखा अन्नदाता का पक्ष

जयपुर।
राजस्थान विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ प्रदेश प्रवक्ता और आमेर से विधायक सतीश पूनिया ने राज्य की कांग्रेस सरकार के कर्जमाफी के वादे और कर्जमाफ करने के दावे की पोल खोलकर रख दी।

जैसे ही विधायक सतीश पूनिया को सदन में बोलने का मौका मिला, उन्होंने अन्नदाता को ध्यान में रखते हुए अपनी बात को जिस नजाकत और अंदाज में शुरू की, उससे ही किसानों के दर्द का सहज ही अहसास हो जाता है।

पूनिया ने अपने किसान भाई का ​जिक्र कर कृषकों की रुह को छूआ तो साथ आजादी के 72 साल और लोकतंत्र के 67 साल को याद करते हुए चौधरी चरण सिंह के उस बयान का भी हवाला दिया, जिसको आज भी लोग किसान के साथ जोड़कर देश की खुशहाली की बात कहते हैं।

विधायक पूनिया ने इस बात के लिए विधायकों को याद दिलाया कि स्कूल में पढ़ते थे, तब एक वाक्य आता था, कि देश कृषि प्रधान है और भारत की आबादी के 70 प्रतिशत लोगों के कृषि से जुड़े और गांव में निवास करती कहकर आंकड़ों की जुबान खोली।

उन्होंने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि आज की तारीख में सभी सरकारों के उपर, सारे दलों के उपर जनमत का दबाव है कि सदन में किसानों को लेकर चर्चा हो, किंतु यह चर्चा सार्थक हो तो अधिक खुशी होती।

पूनिया ने कहा कि जिस तरह से किसान बादलों की ओर देखकर उसके बरसने का इंतजार करता है, इस सदन के बाहर बैठा किसान इसकी सार्थक चर्चा का भी इंतजार करता है। यह देश मुगलों और अग्रेंजों का कुशासन झेल चुका है, लेकिन इस देश के लोकतंत्र की ताकत ही, जो हमें यहां तक पहुंचाने में कामयाब हो पाई है।

आगे बोलते हुए पूनिया ने कहा कि अब समय आ गया है कि देश के 52 करोड़ लोग, जो खेती और खेती से जुड़े हुए धंधों से जुड़े हैं, 52 करोड़ किसान, जो कि करीब आधी आबादी, जो कृषि कार्यों से जुड़ी हुई है, उसके हित में सोचना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि जिस तरह से शेर अपने शिकार की तलाश में कई दूर चला जाता है, लेकिन जब वह पीछे मुड़कर देखता है, तो उसको अहसास होता है कि शिकार की यात्रा में कितनी दूर आ गया। उसी तरह से राजनीतिक दलों, सरकारों को इस बात पर विचार करने की सख्त जरूरत है कि जिसको अन्नदाता कहा है, जिस किसान की तीन भूमिका होती है, उसके बारे में भी पूरी गंभीरता से विचार करें।

विधायक ने कहा कि वही किसान गांवों में लाइन लगाकर वोट डालता है, और हमें पक्ष और विपक्ष चुनकर यहां भेजता है। उन्होंने वर्तमान से जोड़ते हुए कहा कि वही किसान है जो, आपको सत्ता में बैठाता है और हमको विपक्ष में बैठकार सत्ता से बेदखल करता है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में दूसरी सबसे बड़ी आबादी थलसेना है। उस थलसेना में भी जो जवान होता है, वह भी इसी देश के किसान के घर में पैदा होता है, जो देश को सुरक्षित रखता है। इस तरह किसान की दूसरी महती भूमिका है।

विधायक पूनिया ने किसानों की तीसरी बात कहते हुए कहा कि देश की तीसरी ताकत जो अर्थव्यवस्था है, उसमें भी किसान सीेधे तौर पर शामिल है। अन्नदाता की बात करते हुए कहा कि पुरातन खेती की जो परमंपरा थी, उसी से उद्योग धंधे पनपे, उसी से कुटीर उद्योग पनपे, उसी से पनपा हुआ सद्भाव था।

किंतु दुर्भाग्य से समय की मार पड़ी और खेती की जोत छोटी हो गई और सामने आया कि खेती तो फायदे का सौदा नहीं है, घाटे का सौदा है। उसी ने किसान को खेती से दूर कर दिया।

पूनिया ने कहा कि वर्तमान में किसानों के हितों के लिए सबसे जरूरी चीज यह है कि किसान की लागत कम हो, उसको अपनी पैदावार को पूरा मूल्य मिले और तीसरी बार यह कि उसकी जोखिम तय होनी चाहिए।

बीमा के बारे में बात करते हुए पूनिया ने कहा कि किसी गाड़ी के खराब होने पर क्लेम मिलता है, दुकान में आग लगने पर उसका बीमा क्लेम मिलता है, मोटर कार का बीमा होता है, और यहां तक कि बकरी का भी बीमा होता है।

उन्होंने किसान के दर्द को इंगित करते हुए कहा कि अन्नदाता की जीती जागती फसल का बीमा हो, वह इंतजार करता है कि यदि उसकी फसल खराब होती है, तब उसको समय पर क्लेम मिले, इसके लिए बीमा प्रणाली में बड़े संसोधन की जरूरत है, ताकि अन्नदाता को भी क्लेम मिल सके।

भूगर्भ जल की बात करते हुए पूनिया ने कहा कि किसानों के सामने एक विकट समस्या है। जो बारानी भूमि पर पैदा करता है और जो मानसून की ही खेती करता है, उसके सामने भी पानी की बड़ी समस्या है। लेकिन जो किसान पिलाई से खेती करता है, उसके सामने भी चुनौती अपार हैं।

उन्होंने कहा कि किसानों की समस्या के निराकरण के लिए पूर्ववर्ती सरकार ने इस्टर्न कैनाल योजना बनाई थी। पूनिया ने मांग करते हुए कहा कि इस सरकार को चाहिए कि उन सभी 13 जिलों को जोड़ते हुए अन्नदाता को राहत प्रदान करनी चाहिए।

विधायक ने कर्जमाफी का जिक्र करते हुए कहा कि अन्नदाता के दंश को समझना होगा, जिसने आत्महत्या की है, उससे हम बच नहीं सकते। उदाहरण देते हुए कहा कोई मोहनलाल, कोई सोहनलाल, कोई राधेश्याम यहां से विदा हो गया है, किंतु हमसे उसकी आत्मा जरूर हिसाब मांगेगी।

मौजूदा सरकार से मांग करते हुए कहा कि आपके राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला समेत पूरी पार्टी नेताओं ने कहा था कि किसानों का सरकार बनते ही पूरा कर्जा माफ होगा, और तुरंत होगा।

कांग्रेस के विधायकों और सरकार को घोषणा पत्र की याद दिलाते हुए पूनिया ने कहा कि उसमें भी कर्जमाफी करने का वाद किया था, जिसके कारण किसान कांग्रेस के चक्कर में आ गया, उसने सोचा कि कांग्रेस की सरकार आएगी और उनका कर्जा माफ होगा।

पूनिया ने बताया कि जब राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी, तब 59 लाख किसानों पर कर्जा था, जिन्होंने सोचा कि उनके ट्रेक्टर का भी कर्जामाफ होगा, लेकिन राज्य की कांग्रेस सरकार ने किसानों की उम्मीदों पर गहरा कुठाराघात किया है।

उन्होंने कहा कि झूठ से वोट बटोरे जा सकते हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव में धर्म का और राष्ट्रवाद का मुद्दा रहा होगा, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि कांग्रेस के द्वारा कर्जमाफी करने का झूठ भी बड़ा कारण है, जिसके कारण भाजपा को 25 सीटें मिली हैं।

उन्होंने बताया कि कांग्रेस की सरकारों ने देश के किसानों को दो—दो बार अन्नदाताओं को लोलीपॉप दिया, लेकिन किसानों की दशा नहीं बदली, और सारे किसान आज भी उसी हालत में हैं।

विधायक ने बताया कि राजस्थान ऐसा तीसरा प्रांत है, जहां पर सबसे ज्यादा कर्जदार किसान है। केंद्र की रिपोर्ट है, उसके अनुसार पहले राज्य पर औसतन 70500 रुपयों का कर्जा है, राजस्थान के एक किसान पर औसत 30900 रुपयों का कर्जा है।

सतीश पूनिया ने राज्य सरकार से मांग करते हुए कहा कि जो आत्माएं कर्जमाफी के बोझ तले दबी होने के कारण दुनिया से जा चुकी हैं, उनके साथ न्याय कीजिये, देश के 52 करोड़ और राज्य के 80 लाख किसानों पर दया कीजिये।