Ghanshyam Tiwari bjp congress
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जयपुर। राजस्थान में विधानसभा चुनावों में भाजपा की हार के बाद भी पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का प्रदेश की राजनीति में दखल भाजपा और मोदी पर भारी पड़ सकता है। लोकसभा चुनावों में एक बार फिर भाजपा के ही कार्यकर्ता पार्टी और मोदी को ठेंगा दिखा सकते हैं।

विधानसभा चुनावों के पूर्व राजस्थान में एक नारा गूंजा था कि ‘मोदी तुझसे बैर नहीं, वसुंधरा तेरी खैर नहीं।’ इस नारे से ही समझा जा सकता था कि प्रदेश भाजपा में वसुंधरा राजे की कितनी जबरदस्त खिलाफत है। भाजपा नेता और कार्यकर्ता राजे को राजस्थान में बिलकुल नहीं देखना चाहते हैं।

सियासी जानकारों का कहना है कि प्रदेश भाजपा में नेता और कार्यकर्ता राजे के दखल से अभी भी नाराज हैं। भाजपा में कहा जा रहा है कि यदि राजे का दखल जारी रहा तो लोकसभा चुनावों में भी पार्टी को खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

यदि चुनावों में राजे के खिलाफ नाराजगी सामने आई तो इसका सीधा असर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दोबारा ताजपोशी पर पड़ेगा। कार्यकर्ता किसी भी कीमत पर राजे का दखल प्रदेश की राजनीति में नहीं चाहते हैं।

जबकि वसुंधरा राजे प्रदेश भाजपा की राजनीति में दखल से बाहर नहीं आ रही हैं। इसकी पूरी जानकारी केंद्रीय संगठन को होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

इस लिए हताश हैं कार्यकर्ता
जानकारों का कहना है कि राजे की दखल जारी रहने के कारण अब भी प्रदेश संगठन में दलाल टाइप के लोगों का बोलबाला बना हुआ है और कार्यकर्ताओं के मन की बात नहीं सुनी जा रही है।

ऐसे में पूरे प्रदेश के नेता और कार्यकर्ता हताश व मायूस हैं और पार्टी के खिलाफ जा सकते हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि अब वह जमाना लद गया है कि कार्यकर्ता अंधभक्त होकर पार्टी के आदेशों की पालना करें।

विधानसभा चुनावों में देखा जा चुका है कि यदि पार्टी ने कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं की तो वहां पार्टी को नुकसान भुगतना पड़ा है। भाजपा 180 के लक्ष्य में से केवल 73 सीट जीत पाई थी।