Iron Lady of BJP: इनकी जिद के आगे सब नतमस्तक!

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जयपुर।

बीते 15 साल से राजस्थान भारतीय जनता पार्टी की धुरी बनी हुईं वर्तमान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को यदि राजस्थान में भाजपा की “आयरन लेडी” कहा जाए, तो भी कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

हाल ही में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष को लेकर चले घटनाक्रम के बाद जिस तरह से कथित तौर पर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की पसंद को दरकिनार करने के लिए बीजेपी आलाकमान ने एड़ी चोटी का जोर लगा लिया।

खबरों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी जोधपुर सांसद और कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को पार्टी अध्यक्ष बनाना चाहती थी, लेकिन वसुंधरा राजे के द्वारा इंकार करने के कारण यह बात पूरी नहीं हो सकी।

बीजेपी के राष्ट्रीय नेता भी वसुंधरा राजे की पसंद को नकार कर अपने पसंद का प्रदेश अध्यक्ष नहीं चुन पाए। उसके बाद राजनीतिक हलकों में यह बात पुख्ता तौर पर साबित हो चुकी है, कि फिलहाल बीजेपी राजस्थान में वसुंधरा राजे का कोई विकल्प नहीं है।

बता दें कि राजस्थान की राजनीति में साल 2002 के आसपास वसुंधरा राजे को स्थापित करने के लिए तत्कालीन बीजेपी नेता भैरोंसिंह शेखावत के द्वारा बुलाए जाने और यहां पर भौगोलिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि से अवगत करवाए जाने की चर्चा हमेशा रही है। खुद भैरोंसिंह शेखावत ने कई बार कहा कि उन्होंने ही वसुंधरा राजे को राजस्थान की राजनीति में प्रवेश दिलाया था।

बाद में भैरोंसिंह शेखावत और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बीच भी राजनीतिक खटास पैदा हो गई। भैरोंसिंह शेखावत कुछ समय बाद भारत के उपराष्ट्रपति चुन लिए गए और उनका राजस्थान की राजनीति में सीधा जुड़ाव नहीं रहा, लेकिन गाहे बगाए उनके द्वारा दिए गए स्टेटमेंट वसुंधरा राजे वह भैरोंसिंह शेखावत के बीच में संबंधों की खटास को साबित करने के लिए पर्याप्त हैं।

साल 2003 से लेकर 2008 तक राजस्थान में मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए वसुंधरा राजे ने राज्य की राजनीति को एक अलग दिशा प्रदान की। इस दौरान सत्ता में उनकी कार्यशैली और डिसीजन मेकिंग को लेकर पूरे भारत भर में प्रशंसा होती थी, किंतु 2008 में टिकट वितरण के दौरान बीजेपी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान उपाध्यक्ष ओम प्रकाश माथुर के साथ पटरी नहीं बैठने के कारण बीजेपी सत्ता हासिल करने में नाकाम रही।

राजस्थान में सत्ता जाने के साथ ही विपक्ष की नेता होकर भी वसुंधरा राजे अधिकांश समय लंदन में रहने लगीं। इस दौरान कांग्रेस पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं द्वारा वसुंधरा राजे की इस कार्यशैली पर जमकर उंगली उठाई गई, लेकिन साल 2012 में ही वसुंधरा राजे फिर से राजस्थान की राजनीति में सक्रिय रूप से लौट आईं। उन्होंने बीजेपी के नेता नरेंद्र मोदी की प्रचंड लहर का फायदा उठाते हुए 2013 में 163 सीटों के साथ फिर से मुख्यमंत्री बनने में सफलता पाई।

साल 2013 से लेकर साल 2018 तक के मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के द्वारा राजस्थान में किए गए कार्य को लेकर एक और जहां बेरोजगारों में असंतोष है, वहीं पार्टी के भीतर उनको लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं, लेकिन फिर भी खुलकर उनके खिलाफ बोलने की हिम्मत कोई नेता नहीं जुटा पा रहे हैं। फिलहाल राजस्थान बीजेपी में वो ही सर्वेसर्वा हैं।

बहरहाल, बीजेपी ने उनको 7 दिसंबर को होने वाले मतदान के बाद बनने वाली सरकार की मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट कर दिया है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे राजस्थान में साल 2003, 2013 के बाद 2018 में अब तीसरी बार यात्रा निकाल चुकी हैं।

उनकी दो यात्राओं के बाद प्रदेश में भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ जीत कर आई हैं। देखना यह होगा कि क्या यही कमाल अब उनकी तीसरी यात्रा भी दिखा पाती है?

आईएएस, आईपीएस अफसरों को खुले तौर पर काम नहीं करने पर धमकाने, अपने मंत्रियों, विधायकों को जनता के कार्यों में नेगलिजेंसी बरतने पर हड़काने को लेकर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे काफी चर्चित रही हैं।

पिछले कार्यकाल के दौरान पुष्कर में वसुंधरा राजे के द्वारा धमकाने के बाद एक आईएएस अफसर की हालत पतली होने की घटना के बाद वसुंधरा राजे को “राजस्थान की आयरन लेडी” के तौर पर जाना जाने लगा है।

यह है वसुंधरा राजे का राजनीतिक सफर-

  1. उन्होंने वर्ष 1984 में राजनीति में प्रवेश किया। जिसके बाद उन्हें सीधा भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रूप में नियुक्त किया गया था।

  2. वर्ष 1985 में वसुंधरा राजे को राजस्थान भाजपा युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया। उसी वर्ष उन्हें धोलपुर निर्वाचन क्षेत्र से विधायक के रूप में चुना गया था।

  3. वर्ष 1989 के लोकसभा चुनाव में, उन्हें वर्ष 1991 तक एक सांसद के रूप में चुना गया था।

  4. वर्ष 1991 के आम चुनाव में, उन्हें झालावार विधानसभा क्षेत्र से पुनः एक सांसद के रूप में चुना गया।

  5. वर्ष 1998 में लोकसभा चुनाव में पार्टी से चुने जाने के बाद राजे को विदेश मामलों के राज्य मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया।

  6. वर्ष 1996 से वर्ष 1998 के बीच, वह झालावाड़ लोकसभा क्षेत्र से एक सांसद के तौर पर रहीं।

  7. वर्ष 1987 में वसुंधरा राजे सिंधिया को राजस्थान राज्य की भारतीय जनता पार्टी के लिए उपाध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया।

  8. वर्ष 1998 में राजे पुनः एक ही निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित हुईं और वर्ष 1999 तक सांसद रहीं। जिसके चलते उन्होंने केंद्रीय राज्य मंत्री और विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया।

  9. वर्ष 1999 में वसुंधरा राजे पुनः एक सांसद के रूप में निर्वाचित हुईं और जिसके चलते उन्हें 5 वर्षों तक सेवा करने का कार्यभार सौंपा गया।

  10. वर्ष 2003 में भाजपा ने उन्हें राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया। इस पद पर वह वर्ष 2008 तक, पूरे पांच साल रहीं।

  11. वसुंधरा राजे सिंधिया वर्ष 2013 में पुनः दूसरी मर्तबा राजस्थान की मुख्यमंत्री बनीं, जो अभी तक हैं।

ये विवाद भी रहे साथ-

  1. राजस्थान में आने के बाद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत के साथ रिश्ते खराब हुए। उसके बाद उनके व तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष ओम माथुर के रिश्तों में खटास आई।

  2. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में वसुंधरा और बीजेपी के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह के बीच काफी कहासुनी हुई। इसमें जसवंत सिंह बाड़मेर के लोसकभा क्षेत्र से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन वसुंधरा ने उनकी जगह कांग्रेस से आए कर्नल सोनाराम को टिकट दिलवा दी। जिसके परिणामस्वरूप जसवंत सिंह ने बीजेपी पार्टी छोड़ने का फैसला किया।

  3. वसुंधरा राजे, ललित मोदी की मदद करने के आरोपों में भी घिरी रहीं। वसुंधरा राजे का ललित मोदी के वीजा संबंधी आवेदन पर हस्ताक्षर करना और उनके बेटे दुष्यंत सिंह के द्वारा कथित तौर पर ललित मोदी के साथ फर्जी कम्पनी के साथ मिलकर करोड़ो रुपयों का गबन करना भी विवादों में रहा।

  4. गूगल पर उपलब्ध दस्तावेजों मुताबिक आरोप यह भी है कि अगस्त 2011 में वसुंधरा राजे ने ललित मोदी के वीजा संबंधी दस्तावेजों पर सहमति जताई थी और ब्रिटिश अधिकारियों के सामने एक शर्त भी रखी थी कि इस बारे में भारत में किसी को कुछ पता नहीं चलना चाहिए।

  5. सूत्रों के मुताबिक जब इन दस्तावेजों का खुलासा किया गया, तो वसुंधरा की मुश्किलें बढ़ती चली गईं। कांग्रेस द्वारा लगातार उनके इस्तीफे की मांग की जाने लगी। हालांकि, पार्टी द्वारा उन्हें क्लीन चिट दे दी गई।

  6. राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे एक बार फिर ललित मोदी के साथ विवादों में रहीं। उन पर आरोप था कि चम्बल के बीहड़ में बना धौलपुर का महल सरकारी संपत्ति है। जिसे वसुंधरा राजे और ललित मोदी ने मिलकर एक निजी लग्जरी होटल में बदल दिया है।

  7. जिसे धौलपुर में “राज निवास पैलेस” के रूप में जाना जाता है। वसुंधरा राजे और ललित मोदी के द्वारा राजस्थान की एक फर्जी कम्पनी के साथ मिलकर धौलपुर पैलेस पर अवैध कब्जा किये जाने का भी आरोप था। उनके पति हेमंत सिंह ने एक अदालत के समक्ष स्वीकार किया था कि यह पैलेस राजस्थान सरकार की संपत्ति है।

  8. जिसमें ललित मोदी की फर्जी कम्पनी नियंत हेरिटेज होटल्स ने इस संपत्ति को एक होटल में बदल दिया, जिसमें 100 करोड़ भारतीय रुपए का निवेश किया गया था।

  9. वर्ष 2013 में कथित तौर पर अगस्तावेस्टलैंड हेलीकाप्टर खरीद घोटाले में वसुंधरा राजे संलिप्त पाए जाने के आरोप लगे हैं। जिसके चलते उन्हें कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।

  10. वसुंधरा राजे ने 28 नवम्बर 2016 में डायरेक्टर ऑफ़ सिविल एविएशन का एक टेंडर जारी किया। जिसमें उन्होंने एक मिड साइज एयर क्राफ़्ट की मांग की। जिसकी फ्लाइंग रेंज की सीमा दी गई थी। जो सीधे यूरोप तक उड़न भर सके।

  11. आमतौर पर ऐसे विमान का इस्तेमाल केवल प्रधानमंत्री भारत यात्रा के दौरान करते हैं। अपनी इस मांग के कारण वह विवादों में रहीं, फ़िलहाल यह मामला भी ठंडे बस्ते में है।

  12. वसुंधरा राजे सिंधिया, उषा राजे सिंधिया, यशोधरा राजे सिंधिया और ज्योतिरादित्यनाथ सिंधिया के बीच एक संपत्ति विवाद कोर्ट में लंबित है। इस मामले में भी वसुंधरा राजे के द्वारा किए जा रहे डिफेंस के चलते उनको धुन का पक्का माना जा रहा है।

  13. साल 2017 में राजस्थान विधानसभा में वसुंधरा राजे सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों पर लगे आरोपों की खबर मीडिया में बिना सरकार की अनुमति के चलाए जाने पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून को लेकर भी राजे की कड़ी आलोचना हो चुकी है। बाद में विरोध के चलते सरकार ने इस कानून को वापस ले लिया।

  14. 21 जून 2017 को कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल सिंह का एनकाउंटर और फिल्म पद्मावत को राजस्थान में प्रतिबंधित करने में देरी के लिए भी राजे विवादों में रहीं हैं। बाद में फ़िल्म राजस्थान में रिलीज ही नहीं हो पाई।

  15. एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा है कि वह राजस्थान की ही हैं, राजस्थान में वह डोली में आई थी और यहां से उनकी अर्थी ही उठकर जाएगी।

  16. साल 2007 में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा महिला स्वयं सशक्तिकरण के लिए “विमान टूगेदर अवार्ड” से सम्मानित किया जा चुका है।

(नोट-सभी कंटेंट गूगल से लिए गए हैं)

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