dr. satish poonia bjp
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रामगोपाल जाट

लगभग दो महीनें पहले भाजपा के राजस्थान अध्यक्ष की कमान संभालने वाले डॉ. सतीश पूनियां को भले ही राजनीति में पदार्पण किये 37 साल का समय हो चुका हो, किंतु चुनौतियां पहले से अधिक हो गई हैं। महज दो माह के भीतर ही विरोधियों ने आपके खिलाफ सुर बुलंद कर दिये हैं। डॉ. पूनियां यह आपके लिये चेतावनी तो है ही, इसके साथ कम वक्त में अपने पराये का भेद करने का भी यह बेहतरीन समय है।

भाजपा अध्यक्ष होने के नाते डॉ. पूनियां आपको समझना होगा कि जो शक्तियां सामने से आकर युद्ध करती हैं, उससे कहीं अधिक घातक वो ताकतें हैं, जो पर्दे के पीछे से आपको मिटाने के अभियान में लगी हुईं हैं। इन ताकतों से आप अकेले नहीं लड़ सकते, इसलिये ऐसे लोगों की पहचान कर अपनी टीम गठित करनी होगी, जो सिर्फ आपके भले को पहले स्थान पर रखती हो।

पार्टी के तमाम वफादार पदाधिकारियों की टीम आपका सहयोग करे, इस बात की कोई गांरटी नहीं है, इसलिये उन सभी उच्च पदों तक पहुंचे राजनीतिज्ञों की भांति आपको अपनी व्यक्तिगत टीम भी बनानी होगी, जो पार्टी से भले संबंध नहीं रखे, किंतु आपसे उनका दो शरीर एक जान जैसा सियासी संबंध स्थापित होना चाहिये।

एक ऐसी टीम, जिसके सदस्य आपकी नजरों, आपके हाव—भाव, आपके इशारों को पलक झपकते ही पहचान सकें। ऐसे व्यक्ति, जो आपको उपर की तरफ ले जाने के लिये तत्पर हों, न की खुद को आपके सहारे उपर उठाने की फिराक में हों। ऐसे लोगों का समूह, जिसके सदस्य लगातार 36 साल तक बिना सवाल किये नरेंद्र मोदी के पीछे चलते हुये अमित शाह की तरह आपको उच्च स्थान तक ले जाने का धैर्य रखता हो।

यह आपके उपर है कि किन लोगों को आप साथ रखेंगे। पुराने वफादार लोगों के अलावा नई उर्जावान ऐसी टीम हो, जो तकनीकी तौर पर दक्ष हो और उसको सकारात्मक उपयोग करते हुये आपके सुंदर व्यक्तित्व को सुंदरतम बनाने का माद्दा रखती हो। ऐसे अनुभवी लोग, जो आपकी कार्यशैली को पहचानते हों और उसमें उत्तरोत्तर निखार लाने की सोच रखती हो। ऐसे लोग, जो आपकी सफलता में ही खुद सफलता मानते हों।

एक स्लोगन है जो आपको याद रखना चाहिये, ‘अपनों से सावधान।’ इसका मतलब आपको समझाने की आवश्यकता नहीं है। दुश्मन दो प्रकार के होते हैं, एक वो, जो सामने से आपके उपर आक्रमण करता है, और दूसरे वो, जो आपके मित्र जैसा प्रतीत होते हैं, आपको हमेशा हितैषी दिखते हैं, लेकिन यह दोस्त ऐसे दुश्मन होते हैं, जो आपकी नजर चूकते ही गर्दन कलम करने की फिराक में रहते हैं।

आपको अपने प्रबंधन पर विशेष फोकस करना होगा। प्रबंधन तीन चार तरह से देखना होता है। एक वह, जो आपके परिजनों, घनिष्ठ मित्रों और चहेते रिश्तेदारों के साथ आपका तारतम्य है, उसको ठीक से चलते रहने दे। दूसरा वह है, जो आपके सामान्य संबंध रखने वाले मित्रों के साथ रिश्ते को शने: शने: प्रगाढ़ता में बदलने का काम करता हो। एक प्रबंधक वह होता है, जो आपके संपर्क में नहीं होने के बाद भी आपके चाहने वाले लोगों की पहचान करता रहे, ऐसे लोगों से आपके विषय में सकारात्मक और नकारात्मक जानकारी जुटाकर सुधार करता रहे।

आप भले ही पार्टी के अध्यक्ष बन गये हों, लेकिन बावजूद इसके सबकुछ आप अकेले नहीं कर सकते। इसलिये ऐसे अच्छे और गुणकारी लोगों की टीम भी आपके पास होनी चाहिये, जो पार्टी में आपके साथ अच्छे संबंध बनाने और समय आने पर आपके साथ खड़े रखने की हिम्मत दिखा सकें, ऐसे लोगों और आपके बीच संबंधों को अधिक मजबूती प्रदान करने का काम कर सकें।

आप राज्य इकाई के मुखिया हैं, लेकिन आपके दल की उंचाई पर विद्यमान और उंचाई पर जाने की ओर अग्रसर तमाम लोगों के साथ आपके रिश्ते को मजबूती प्रदान करने का काम कर सकें, ऐसे लोगों को भी आपकी टीम का हिस्सा बनाना है। कई लोग आपके साथ बरसों से जुड़े हुये हैं, लेकिन कुछ बीते कुछ वक्त में ही आपके संपर्क में आये हैं। इनमें से भी आपके लिये काम करने वाले और आपके सहारे खुद का काम निकालने वालों की पहचान जरुरी है। और यह काम तभी संभव है, जब आपकी टीम के लोग ऐसे लोगों का बारीकी से अध्ययन कर आपको ठीक स्थिति से अवगत करवाने के साथ ही इसके निदान के उपाय भी बता सकें।

आपके नेृतत्व में पार्टी ने अब तक दो चुनाव लड़े हैं, लेकिन इसके सकारात्मक और नकारात्मक, दोनों ही प्रभाव आपके कारण पड़े हों, ऐसा प्रतीत नहीं होता है। आपके उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद जिन लोगों की आप आंख के तारे और आंख की किरकिरी बन गये हैं, वो लोग ऐसे समय में सामने दिखने लगते हैं, यह आपके लिये लाभकारी है।

जैसा की मैंने हैडिंग में लिख दिया है, ‘वसुंधरा तो अकबर है, आपको मानसिंह से सावधान रहने की जरुरत है’, ठीक वैसे ही आपको अपनी टीम के सहारे यह खोजना होगा कि मेरे लिये मानसिंह कौन कौन हैं और कौन कौन बनने की फिराक में हैं? कहते हैं कि अकबर ने कभी युद्ध का नेतृत्व नहीं किया, लेकिन उसने मानसिंह जैसे सिपहसालार चुने थे, जो उसके लिये जान देने के लिये तैयार रहते थे।

वसुंधरा राजे ने राजस्थान में बीते 17 साल में अपनी जड़ें गहरी करने का काम किया है। और इस दौरान उन्होंने कई मानसिंह चिन्हित कर समय आने पर उनको युद्ध का प्रतिनिधित्व सौंप देतीं हैं। यह उनका काम है, जो करना ही है, किंतु आपको भी इस धर्मयुद्ध में मानसिंह से मुकाबला करने वाले ही नहीं, बल्कि वसुंधरा राजे से युद्ध जीतने वाली सेना और सेनापति तैयार करने हैं।

आपको अपनी क्षमताओं का आंकलन कर वो नेतृत्व तैयार करने हैं, जो खुद के लिये नहीं, बल्कि जरुरत पड़ने पर आपके लिये दुश्मन से लोहा लेने का ख्वाब पालते हों। आपके सामने स्पष्ट तौर पर कांग्रेस पार्टी और उसके नेता हैं, जिनसे खुलकर मुकाबला करना है, किंतु इसके साथ ही भाजपा में जो नेता कांग्रेस वालों से भी बड़े दुश्मन हैं, उनसे लड़ने के लिये सज्ज होना होगा।

पहले युद्ध मैदान में लड़ा जाता था, किंतु अब युद्ध के क्षेत्र काफी विस्तृत हो गये हैं। अब युद्ध लड़ने के लिये आपको सामने वाले दुश्मन के साथ ही अपने साथ दिखने वाले मित्र रुपी शत्रुओं से भी अधिक सावधान रखने की आवश्यकता है। आपके दल, आपके दल के अनुषांगिक संगठन, विचार परिवार के संगठन और बड़े नेताओं के साथ लाइजनिंग रखने वाले लोगों को भी आप साधकर चलेंगे तो पार जायेंगे, अन्यथा राजस्थान भाजपा में अध्यक्ष तो कई बने हैं, पर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक केवल भैरोंसिंह शेखावत और वसुंधरा राजे ही पहुंच पाईं हैं।

कहने का तात्पर्य यही है कि आपकी टीम आपको यह युद्ध जीतने के लिये तैयार कर सकती है और आपके द्वारा चुने हुये गलत, स्वार्थी, मौकापरस्त सदस्यों की टीम ही आपको यहां से नीचे की ओर विदा भी कर सकती है।

भैंरोसिंह शेखावत, भंवरलाल शर्मा, वसुधंरा राजे, ओम माथुर, गुलाबचंद कटारिया, अरूण चतुर्वेदी, अशोक परनामी, मदनलाल सैनी जैसे कई लोगों ने पार्टी की कमान संभाली, किंतु शीर्ष तक पहुंचने वालों में केवल दो ही नाम हैं। अब यह अवसर आपको मिला है, तो देखना आपको ही है कि इस सूची में शामिल दो लोगों लिस्ट को बड़ी कर तीन में बदलना है, या लंबी सूची को ही और बढ़ाने का काम करते हैं।

हमेशा से प्रबंधन ही जीत और हार के लिये सबसे अधिक जिम्मेदार होता है। और इसी मोर्चे पर आप आज भी पीछे चल रहे हैं। इसलिये आपको इसी और अधिक ध्यान देना है। आपके अंदर नेतृत्व करने की क्षमता है, किंतु जिस साम, दाम, दंड़, भेद को आजमाने की जिस राजनीति में आप हैं, उसमें प्रबंधन के तमाम गुणों की जरुरत होती है।

कैलाशचंद मेघवाल, राजेंद्र सिंह राठौड़, यूनुस खान, अशोक परनामी, अरुण चतुर्वेदी जैसे चेहरे तो महज बानगी है, इनके पीछे जो आपको इस युद्ध में परास्त करने की तैयारियां कर रहे हैं, उनकी भी आपको पहचान कर सावधानी बरतनी है। कई मोर्चों पर लड़े जाने वाले इस युद्ध में आप ही ‘कृष्ण’ और आप ही ‘अर्जुन’ हैं।

किंतु आप चाहें तो अपनी सेना बनाकर लड़ सकते हैं और आप चाहें तो अपनी टीम में मौकापरस्त लोगों को शामिल कर हार भी सकते हैं। आज हर फील्ड के अच्छे लोग आपके साथ आने को तैयार हैं, आप पहचान कीजिये और उनका सहयोग लिजिये। दुश्मन, मैदान और शस्त्र आपके सामने हैं, आप अपने सशक्त सेनापति और उत्तरदायी सेनापतियों का चयन कीजिये, सेना का गठन कीजिये और आरपार की लड़ाई में उतर जाइये।

यही वह वक्त है, जब पार्टी आपको परिपक्व राजनेता सिद्ध करने का मौका दे रही है। अब आने वाले पांच साल तक निगम और सरपंचों को छोड़कर कोई भी बड़ा चुनाव नहीं है। इसलिये ऐसे समय में आप खुद का संगठन बनाकर, खुद के लोग तैयार कर भविष्य में आने वाली भयानक चुनौतियों से मुकाबले के लिये खुद को तैयार कर सकते हैं।

याद रखिये इतिहास केवल उसी को याद रखता है, जो जीतता है, हारने वाले को तो अपने भी भुलाने लगते हैं। भाजपा में भी जन कृष्णमूर्ति, बंगारू लक्ष्मण, लालकृष्ण आडवाणी, नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह जैसे दिग्गजों को कोई याद नहीं रखता, सबको अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी ही याद रहेंगे।

राजस्थान भाजपा की जब—जब बात होगी तो भैंरोसिंह शेखावत और वसुंधरा राजे ही याद आयेंगी। कभी भी अशोक परनामी, अरुण चतुर्वेदी, ओम माथुर और भंवरलाल शर्मा जैसे नेताओं का जिक्र नहीं किया जायेगा। ईश्चर का दिया सही समय अभी आपके पास है, यह आपके उपर है कि आप कौन बनना चाहते हैं? ऐसा नहीं हो, वर्तमान की गलतियों पर आपको भविष्य में पछताना पड़े।

इस लेख में लिखे गये तमाम विचारों के लिये लेखक स्वयं जिम्मेदार है, इसकी​ किसी भी बात को लेकर नेशनल दुनिया.कॉम पर दावा नहीं किया जा सकता है।