Jaipur

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे के लिए मुसीबत खड़ी हो गई है।

राजस्थान हाईकोर्ट में पूर्व मंत्री घनश्याम तिवाड़ी की एक अपील पर सुनवाई करते हुए फैसला दिया है कि राज्य का कोई भी पूर्व मुख्यमंत्री सरकारी बंगला नहीं रख सकता।

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को 13 नंबर बंगला खाली करना होगा।

गौरतलब है कि वसुंधरा राजे सरकार के द्वारा 2013 से 2018 के दौरान राजस्थान विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए आजीवन सरकारी बंगला अलॉट किए जाने और एक सरकारी सुविधाएं दिए जाने का कानून बनाया गया था।

जिसको लेकर तत्कालीन विधायक घनश्याम तिवाड़ी और हनुमान बेनीवाल ने सदन में घोर विरोध किया था।

दोनों विधायकों के सारे विरोध को दरकिनार करते हुए तब राज्य सरकार ने सदन में बिल पास करवा लिया था। अब हाई कोर्ट के फैसले के बाद उस दिल को निष्प्रभावी किया जा सकेगा।

पूर्व मंत्री घनश्याम तिवाड़ी ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजन्म आवास और करोड़ों रुपये की सुविधा प्रदान करने वाले राजस्थान मंत्र वेतन संशोधन विधेयक, 2017 कानून को राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से असंवैधानिक और अवैध करार देने संबंधी फैसले का स्वागत किया है।

उन्होने कहा कि आखिर आज सत्य की जीत हुई। षड्यंत्र पूर्वक मंत्री संशोधन विधेयक के नाम से लाए गए इस कानून का विधानसभा में भी विरोध करते हुए कहा था कि यह जागीरदारी प्रथा और प्रीविपर्स की पुनर्स्थापना है। इसके बावजूद भी यह कानून सदन में पारित कराया गया।

तिवाड़ी ने कहा कि ‘जनधन को बचाने के लिए मैंने हजारों कार्यकर्ताओं के साथ सड़क पर उतरकर न केवल एकात्म सत्याग्रह आंदोलन किया, बल्कि अपने राजनीतिक करियर को भी दांव पर लगा दिया।’

पूर्व मंत्री तिवाड़ी का यह भी कहना है कि ‘हाईकोर्ट के आदेश से सत्य की रक्षा हुई है और इस परिप्रेक्ष्य में मैं मांग करता हूं, बंगला नंबर 13, सिविल लाइन्स पर जितना धन खर्च हुआ, उसे राज्य सरकार सार्वजनिक करे, क्योंकि किसी जनप्रतिनिधि की ओर से जनधन के दुरूपयोग का यह निकृष्टतम उदाहरण है।’

‘भविष्य में कोई भी जनप्रतिनिधि जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा इस तरह दुरूपयोग न कर सके, इसके लिए सरकार को चाहिए कि वह ये देखे कि आधिकारिक मुख्यमंत्री निवास 8, सिविल लाइन्स और बंगला नंबर 13, सिविल लाइन्स पर हुए खर्च को अब कैसे वसूल किया जा सकता है।’

गौरतलब है कि इस कानूनू के प्रावधानों के जरिए जनप्रतिनिधि को आजीवन महलनुमा बंगले के साथ परिवार के लिए चालक सहित कार, टेलीफोन और दस कर्मचारियों का स्टाफ उपलब्ध कराया जा रहा था।

तिवाड़ी ने कहा कि ‘यहां मैं यह भी याद दिलाना चाहता हूं कि पिछली सरकार में लाए गए ‘काला कानून’ का भी मैंने सदन में विरोध किया था और बाद में व्यापक जन विरोध के कारण यह कानून भी तात्कालीन सरकार को वापस लेना पड़ा था।’

घनश्याम तिवाड़ी ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के द्वारा बंगला नंबर 13 में कब्जा किए जाने का आरोप लगाते हुए साल 2013 से लेकर 2018 तक की तत्कालीन वसुंधरा राजे सरकार का विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि 2000 करोड की संपत्ति वाला यह बंगला मुख्यमंत्री बेवजह हथियाने पर तुली हुई हैं।

कमोबेश इलाहाबाद हाईकोर्ट के इसी तरह के फैसले के बाद उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को भी पिछले साल अपने सरकारी बंगले खाली करने पड़े थे।