भोपाल।

मध्य प्रदेश की नवनिर्वाचित सरकार के मुखिया कमलनाथ ने प्रदेश में राष्ट्रगीत गाने पर रोक लगा दी है। कमलनाथ नहीं बयान जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश की किसी भी नागरिक को राष्ट्र गीत गाने के लिए अनिवार्यता नहीं है।

मुख्य मंत्री कमलनाथ के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में तूफान खड़ा हो गया। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि अगर कांग्रेस पार्टी के नेताओं को वंदे मातरम नहीं आता है तो हर महीने की पहली तारीख को वल्लभ भवन प्रांगण में आएं, वंदे मातरम वो गाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा: मत बोलो वंदे मातरम, पूर्व CM ने कहा: नहीं आए तो हमसे सीखें 1

आपको बता दें कि विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में कहा था कि सरकारी भवनों में लगने वाली आरएसएस की शाखाओं को बंद किया जाएगा।

कांग्रेस पार्टी की प्रदेश में 15 साल बाद सरकार बनी है ऐसे में मुख्यमंत्री का कमलनाथ के ऊपर जहां बड़ा दबाव है, तो दूसरी तरफ गठबंधन की सरकार होने के नाते बहुजन समाजवादी पार्टी के मायावती ने भी 2 दिन पहले दलितों के ऊपर लगाए गए सभी केसों को हटाने की मांग से दबाव में आ गई है।

कमलनाथ ने मंगलवार को प्रदेश में 2 अप्रेल 2018 को भारत बंद के दौरान दलित समुदाय के ऊपर दर्ज किए सभी केस वापस लेने का ऐलान किया है, तो दूसरी तरफ राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी दलितों पर लगे केस को राजनीतिक दुर्भावना के तहत दर्ज होने की बात कह कर वापस लेने का फैसला किया है।

इधर, गुजरात सरकार के द्वारा पहली से लेकर आठवीं कक्षा तक के सभी विद्यार्थियों को यस सर की जगह जय हिंदू और जय भारत बोलने की निर्देश दिए हैं। जिसको लेकर कांग्रेस पार्टी ने राष्ट्रवाद थोपने की बात कही है।