जनचोक से-

ऐसा आरोप है कि, सारे मोर्चों पर नाकाम और अर्थव्यवस्था को बदहाली के कगार पर पहुंचा चुकी मोदी सरकार को उबरने का अब एक मात्रा रास्ता रिजर्व बैंक के खजाने की लूट में दिख रही है।

लिहाजा वो चाहती है कि बैंक जमा रिजर्व में से 3.30 लाख करोड़ रुपये उसे दे दे। लेकिन रिजर्व बैंक इसके लिए तैयार नहीं है। लिहाजा सरकार ने सेक्शन-7 के इस्तेमाल की धमकी तक दे डाली।

आपको बता दें कि सेक्शन-7 के तहत सरकार बैंक को निर्देश दे सकती है जिसे वो मानने के लिए बाध्य होता है। इसका मतलब देश की एक ऐसी संस्था जिसे स्वायत्तता हासिल है उसके अंदरुनी मामलों में दखल। जो किसी भी रूप में उचित नहीं होगा।

दरअसल, मोदी सरकार को अपना तात्कालिक चुनाव और उसका लाभ दिख रहा है जिसमें उसकी फिर से सत्ता की गारंटी हो। उसे न तो देश से कुछ लेना देना है और न ही उसकी अर्थव्यवस्था से।

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लेकिन उर्जित पटेल को पता है कि इसके दूरगामी नतीजे क्या होंगे। एक बार अगर रिजर्व जरूरत से कम हुआ तो फिर अर्थव्यवस्था में भूचाल आ सकता है और उसके बाद तबाही का जो सिलसिला शुरू होगा उसे बचा पाना मुश्किल होगा।

उर्जित इस बात को बेहतर तरीके से समझते थे लिहाजा बैंक की तबाही का काला धब्बा अपने दामन पर लेने की जगह उन्होंने इस्तीफा देना ज्यादा मुफीद समझा। क्योंकि अगर ऐसा कुछ हुआ तो भविष्य में आने वाले सवालों का उनके लिए जवाब देना मुश्किल हो जाएगा।

इस इस्तीफे ने कई तरह की आशंकाओं को जन्म दे दिया है। ये अनायास नहीं है कि अपने इस्तीफे में उर्जित पटेल ने बैंक के तमाम कर्मचारियों और सहकर्मियों को धन्यवाद दिया है।

लेकिन एक बार भी पीएम मोदी और अरुण जेटली का नाम नहीं लिया। ये बताता है कि दोनों पक्षों में खटास किस स्तर पर पहुंच गयी थी। इसके इतर इस मसले पर कई हिस्सों से बेहद तीखी प्रतिक्रियाएं आयी हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि “संस्थाओं को बनाने में एक लंबा समय और प्रयास करना पड़ता है लेकिन उन्हें एक झटके में बर्बाद किया जा सकता है”।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल को इसलिए कुर्सी छोड़कर जाना पड़ा है क्योंकि उन्होंने मोदी को आरबीआई के रिजर्व के तीन लाख करोड़ नहीं लूटने दिए।

अब मोदी सरकार को एक ऐसा गवर्नर मिल जाएगा जो उन्हें उसकी लूट की खुली इजाजत दे देगा।

सबसे अहम प्रतिक्रिया पूर्व गवर्नर रघुराम राजन की रही। उन्होंने कहा है कि “रिज़र्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल का इस्तीफा एक गंभीर चिंताजनक स्थिति है।

किसी सरकारी कर्मचारी का इस्तीफा उस वक़्त की सरकार और काम करने लायक माहौल पर विरोध दर्ज कराना होता है”।

वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल की प्रतिक्रिया बेहद मौजू है। उन्होंने ट्विटर पर कहा है कि “उर्जित पटेल के जाने का मतलब है कि देश के खजाने में कोई बहुत भारी गड़बड़ी है।

किसी भारी वित्तीय धमाके के लिए तैयार रहिए। बैंक डूब सकते हैं। सरकार दिवालिया हो सकती है। कुछ तो है, जो नॉर्मल नहीं है।”

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