upsc exam for IAS selection from private sector
upsc exam for IAS selection from private sector

नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने बिना परीक्षा के ही 9 लोगों को बिना परीक्षा, साक्षात्कार के सीधे आईएएस बनाया है, वो भी सीनियर आईएएस (IAS) की पोस्ट दी गई है। ऐसा पहली बार हुआ है, जब निजी क्षेत्र से किसी को सीधे आईएएस बनाया गया है।

बताया जा रहा है कि लेटरल-एंट्री (LE) के तहत प्राइवेट सैक्टर से इन 9 प्रोफेशनल लोगों को सीधे ही सरकार मंत्रालयों में संयुक्त सचिव बनाया है। इन पदों पर यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा, इंटरव्यू के द्वारा आईएएस अधिकारी बनाए जाते थे।

मीडिया खबरों के अनुसार प्राइवेट सैक्टर के पेशेवरों का स्तर ही वैसा हो, इसलिए निजी क्षेत्र के आईएएस के चयन की प्रक्रिया भी संघ लोक सेवा आयोग (IAS) ने संचालित की है।

पहली बार में 9 लोगों का हुआ चयन

बीते शुक्रवार को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा इसका परिणाम किया है, जिसके अनुसार 9 प्राइवेट सेक्टर के विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं। इन सभी को केंद्रीय मंत्रालयों में संयुक्त सचिव के लिए चुना है।

इनको बनाया है आईएएस
अंबर दुबे (सिविल एविएशन मिनिस्ट्री), अरुण गोयल (कॉमर्स मंत्रालय), राजीव सक्सेना (आर्थिक मामले मंत्रालय), सुजीत कुमार बाजपेयी (पर्यावरण, जंगल और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय), सौरभ मिश्रा (वित्तीय सेवाएं मंत्रालय) और दिनेश जगदाले (नई और नवकरणीय ऊर्जा मंत्रालय)।

इसके साथ ही सुमन प्रसाद सिंह को सड़क एवं परिवहन, हाइवे मंत्रालय में ज्वाइंट डायरेक्टर के तौर पर नियुक्ति मिली है। शिपिंग मिनि​स्ट्री में भूषण कुमार को नियुक्ति दी गई है। साथ ही कृषि, सहयोग और किसान कल्याण मंत्रालय के लिए कोकली घोष को चुना गया है।

केंद्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय ने जून 2018 में निजी क्षेत्र से ‘सीधी भर्ती’ व्यवस्था के जरिए ज्वाइंटर सेक्रेटरी रैंक के पदों के लिए आवेदन मांगे थे। जिसके लिए आवेदन करने की आखिरी तारीख 30 जुलाई 2018 रखी गई थी। इन पोस्ट के लिए कुल 6,077 लोगों ने आवेदन किए थे, जिनमें से 9 जनों का चयन किया गया है।

इससे पहले भी कई अफसरों को इस तरह की जिम्मेदारी दी गई है, किंतु इतने बड़े पैमाने पर पहली बार निजी क्षेत्र से अफसरों का चयन हुआ है।

इससे पहले जिनका चयन हुआ था उनमें प्रमुख निजी क्षेत्र के एक्सपर्ट डॉ. मनमोहन सिंह, मोंटेक सिंह अहूवालिया, बिमल जालान, विजय केलकर, आरवी शाही, परमेश्वरन अय्यर और राजेश कोटेचा जैसे लोगों के नाम शामिल हैं।

इनमें से डॉ. मनमोहन सिंह बाद में देश के वित्तमंत्री और प्रधानमंत्री भी बने। परमेश्वरन अय्यर अभी स्वच्छता सचिव हैं और राजेश कोटचा आयुष मंत्रालय संभालते हैं।

हालांकि, आपको यह भी बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब प्राइवेट सैक्टर से एक्सपर्ट्स लिया गया है। इससे पहले कई बार यूपीएससी को खत्म करने की मांग भी की जा चुकी है। निजी और सरकारी क्षेत्र के कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत की अफसरशाही अंग्रेजों वाली ब्रिटिश सेवा के लिए बनाई गई थी।

भारत की आजाद के बाद इसको खत्म कर देना चाहिए था। आपको जानकार आश्चर्य होगा कि सिंगापुर के निर्माता ‘ल्यू क्यू यान’ ने हिंदूस्थान की असफलता के लिए इन्हीं ब्यूरोक्रेट्स को जिम्मेदार ठहराया था।

आधुनिक युग में किसी योजना या परियोजना के लिए उस कार्य में निपुण विशेषज्ञ की जरूरत होती है। एक्सपर्ट्स को चुनने से शहरी विकास सेके्रेटरी या परिवहन सेक्रेटरी बनता है, उसके पास अधिक और प्रोफेशनल अनुभव होता है।

हमारे देश में सामान्यत: यह कहा जाता है कि जब शहरी विकास की बात आती है तो निजी व्यक्ति को उस आदमी को चुनो, जो अनुभवी टाउन प्लानर हो। मगर सिविल सेवा में ऐसा नहीं होता है। विडंबना देखिए, जो आज शहरी मंत्रालय देखता है, वही कल यातायात को संभाल रहा होता है।

कहा जाता कि जैसे मानव के शरीर को विशेषज्ञ डॉक्टर के द्वारा रिपेयर किया जाता है, उसी तरह से क्षेत्र के विशेषज्ञ को ही जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए। जबकि आईएएस अफसर बनते ही व्यक्ति केवल रौब झाड़ने लगता है।

यूपीएससी की इस पहले से एक बात स्पष्ट है कि देश को आगे ले जाने के लिए विशेषज्ञ ही चाहिए। इसको लेकर भले ही आरक्षण विरोध शुरू हो जाए, या इस तरह से प्रचारित किया जाने लगे, लेकिन आप में भी यदि कुव्वत है तो आप भी आईएएस बन सकते हैं।