Jaipur

साल 2013 में राजस्थान विश्वविद्यालय में अपॉइंट किए गए 238 शिक्षक अपने अधिकारों के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन से लड़ाई लड़ रहे हैं।

सीनियर पे स्केल को लेकर असिस्टेंट प्रोफेसर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरके कोठारी और फाइनेंस ऑफीसर उदयसिंह से भिड़ गए।

इस दौरान शिक्षकों को समझाने के लिए सामने आए चीफ प्रॉक्टर डॉ एच एस पलसानिया के प्रयास भी पूरी तरह विफल हो गए।

मौजूद तीन-4 शिक्षकों ने मौके पर घटना को कवर कर रहे पत्रकार हिमांशु शर्मा से बत्तमीजी कर उनका मोबाइल छीनकर वीडियो डिलीट कर दिया। साथ ही जेब में से पर्स निकाल लिया। इसको लेकर गांधी नगर थाने में शिक्षक राहुल चौधरी समेत 3-4 के खिलाफ एफ आई आर दर्ज की गई है।

यहां पर देखिए वीडियो

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर आरके कोठारी का कहना है कि मौके पर मौजूद कुछ शिक्षकों ने मर्यादा तार-तार करते हुए उनके गार्ड का गला तक पकड़ लिया।

मंगलवार को करीब शाम 5 बजे हुए इस हाई प्रोफाइल ड्रामे के वक्त अपना अधिकार मांगने की बात कर रहे शिक्षकों ने न केवल कुलपति को घेरकर खरी-खरी सुनाई, बल्कि कुलपति सचिवालय के सामने स्टूडेंट्स की तरह धरने पर भी बैठ गए।

इस दौरान कुछ शिक्षक इतने गुस्सा हुए कि वो शिक्षक की मर्यादा भी भूल बैठे और कुलपति प्रो आरके कोठारी व चीफ प्रॉक्टर डॉ एचएस पलसानिया से भी अमर्यादित और अभद्र भाषा में भी बात करने लगे।

चीफ प्रॉक्टर के द्वारा काफी देर तक समझाने के बाद भी गुस्साए शिक्षकों का रोष नहीं थमा और जब कुलपति सचिवालय के बाहर निकले, तब उनको घेर लिया और वहीं उनकी गाड़ी के पास खरी खरी सुना डाली।

मौजूद 25-30 शिक्षकों में 2-3 शिक्षक ऐसे थे, जिन्होंने शिक्षक जैसे पेशे की तमाम मर्यादाओं को लांघते हुए कुलपति से अमर्यादित भाषा में भी बात की।

हालात यह हो गए कि इन शिक्षकों ने अपने अधिकारों के लिए कुलपति और विश्वविद्यालय के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी भी की।

कुलपति जब सचिवालय से निकलकर घर लौट गए, तब सभी शिक्षक फाइनेंस ऑफीसर के कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए।

इन शिक्षकों का कहना है कि उनको विश्वविद्यालय प्रशासन जरूरी अधिकारों से वंचित रख रहा है और जो पे स्केल इन को मिलना चाहिए था, वह नहीं दिया जा रहा है।

शिक्षकों का कहना है कि कुलपति प्रोफेसर आरके कोठारी और वित्त अधिकारी उदयसिंह मिलकर उनको अधिकारों से वंचित कर रहे हैं।

इससे पहले करीब 3:00 बजे भी इन्हीं 238 शिक्षकों में से कई शिक्षक कुलपति से मिलने पहुंचे, तब भी काफी गर्मा गर्मी हुई थी।

आपको बता दें कि 2013 में तत्कालीन कुलपति डॉ देवस्वरूप के अथक प्रयासों से लंबे समय बाद राजस्थान विश्वविद्यालय में 238 असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती हुई थी।

उनमें से कई शिक्षक ऐसे थे, जिनको कॉलेज में व्याख्याता के पद पर अध्यापन करवाने का अनुभव था, ऐसे शिक्षकों को कॉलेजों से एनओसी मिली और विश्वविद्यालय में ज्वाइन हुए।

पीड़ित शिक्षकों का 6 साल बीतने के बावजूद भी राजस्थान विश्वविद्यालय इन शिक्षकों को सीनियर पे स्केल नहीं दे रहा है, जिसके चलते सालाना लाखों रुपए का नुकसान इन शिक्षकों को उठाना पड़ रहा है।

बताया जा रहा है कि राजस्थान विश्वविद्यालय में 238 में से कई शिक्षा कैसे हैं, जिनको सीनियर पे स्केल और एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती होने के लिए विश्वविद्यालय पहले ही योग्य मान चुका है।

इधर, विश्वविद्यालय संविधान के जानकारों का कहना है कि विश्वविद्यालय के कुलपति और वित्त अधिकारी समेत रजिस्ट्रार भी इन शिक्षकों को सीनियर पे स्केल तब तक नहीं दे सकते, जब तक विश्वविद्यालय में “प्रमोशन सलेक्शन कमेटी” गठित नहीं होगी।

सलेक्शन कमेटी के समक्ष इनको पेश होना होगा और उसके बाद योग्यता अनुसार पे स्केल, सीनियर पे स्केल और एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर प्रमोट करने का काम किया जाएगा।

लेकिन समस्या यह है कि इसके लिए राजस्थान विश्वविद्यालय को 35 बी (MOU between state govt and university of rajasthan) के मुताबिक राज्य सरकार से अनुमति लेनी होती है।

जब राज्य सरकार अनुमति देती है, तब ही विश्वविद्यालय सलेक्शन कमेटी का गठन कर सकता है और तभी इन शिक्षकों का प्रमोशन हो सकता है।

आपको बता दें कि प्रमोशन के लिए सलेक्शन कमेटी का गठन अंतिम बार साल 2012 में हुआ था, उसके बाद विश्वविद्यालय के द्वारा राज्य सरकार को चिट्ठी लिखने के बावजूद आज तक सरकार ने विश्वविद्यालय प्रशासन को प्रमोशन के लिए सलेक्शन कमेटी गठित करने की अनुमति नहीं दी है।

ऐसी स्थिति में राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आरके कोठारी, वित्त अधिकारी उदय सिंह और रजिस्ट्रार विवेक कुमार के हाथ बंधे हुए हैं।

उल्लेखनीय है कि साल 2013 में अपॉइंट किए गए 238 शिक्षकों में से कई शिक्षक पीएचडी धारी थे और कई शिक्षकों ने यहां पर ज्वाइन करने के बाद पीएचडी कंप्लीट कर ली है।

विश्वविद्यालय प्रशासन के जानकारों का कहना है कि जिन शिक्षकों ने पीएचडी पहले से ही थी, उनको 4 साल, जो एमफिल किए हुए थे, उनको 5 साल और बाकी को 6 साल में प्रमोशन मिलना चाहिए था, किंतु करीब 4 साल बाद इन शिक्षकों को प्रोबेशन पीरियड से बाहर निकाला गया।

विश्वविद्यालय प्रशासन की लेटलतीफी का ही नतीजा है कि आज 238 शिक्षक, जिनको विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों और संगठन कॉलेजों में अध्यापन करवाने के लिए कार्य सौंपा गया है, वो शिक्षक विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं।

विशेषज्ञों की मानें तो जब तक राजस्थान सरकार नहीं चाहती, तब तक इन शिक्षकों का प्रमोशन और पे स्केल की समस्या का समाधान नहीं हो सकता।

राज्य सरकार की तरफ से अनुमति मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन के द्वारा प्रमोशन के लिए सिलेक्शन कमेटी का गठन किया जाएगा, उसके बाद कमेटी के समक्ष सभी शिक्षकों को उपस्थित होकर अपने डाक्यूमेंट्स और अनुभव प्रमाण पत्र प्रमाणित करवाने होंगे।

बाद में यह सिलेक्शन कमेटी योग्यता अनुसार सभी 238 शिक्षकों को सीनियर पे स्केल और एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर प्रमोशन देने का काम करेगी।