INDIA - JULY 03: Devotees thronging the temple, Lord Ayyappa of Sabarimala in Kerala, India (Photo by Shankar/The India Today Group/Getty Images)

तिरुवनंतपुरम।

दक्षिण भारत में केरल के विश्व प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में बुधवार को 50 साल से कम उम्र की 2 महिलाओं ने प्रवेश किया, ना केवल प्रवेश किया, बल्कि पूजा अर्चना भी की।

इसके बाद मंदिर को शुद्धिकरण के लिए बंद कर दिया गया। केरल के मुख्यमंत्री जनरल विजयन ने इन दोनों महिलाओं की सुरक्षा के लिए तमाम निर्देश जारी किए हैं।

करीब 3 महीने पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा सबरीमाला मंदिर में सभी महिलाओं द्वारा दर्शन करने और पूजा-अर्चना करने की छूट देने के बाद यह पहला मामला है, जब इन तो महिलाओं ने भगवान अयप्पा की पूजा की है।

एक समाचार न्यूज एजेंसी के मुताबिक मंदिर में पहली बार प्रवेश होने वाली महिलाओं के नाम बिंदु और कनक हैं। उनकी उम्र 40 साल से लेकर 50 साल के बीच में बताई जा रही है। दोनों महिलाओं को पुलिस कर्मियों की सुरक्षा के बीच मंदिर में प्रवेश करवाया गया। सुबह 3:45 पर दोनों महिलाओं ने पूजा अर्चना की।

मंदिर में लगे सीसीटीवी फुटेज में सामने आया है कि दोनों महिलाएं दौड़ती हुई मंदिर के अंदर प्रवेश कर रही हैं। दोनों महिलाएं उत्तरी केरल की रहने वाली हैं। उनके परिवारों को सुरक्षा के लिए आज से सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया गया है। मुख्यमंत्री विजयन ने इस बात की जानकारी देते हुए पुष्टि की है।

आपको बता दें कि भगवान आयप्पा के मंदिर में 800 साल से परंपरा रही है कि कोई भी महिला जिसकी उम्र 10 से लेकर 50 साल के बीच में है, वह मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकती है, लेकिन 28 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर में प्रवेश को लेकर इस पाबंदी को हटा दिया था।

सुप्रीम कोर्ट के लिए इस निर्णय के खिलाफ केरल के राजपरिवार और मंदिर के मुख्य पुजारियों समेत कई हिंदू संगठनों ने भी कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिस पर कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 16 नवंबर को मंदिर खोला गया। भगवान अय्यप्पा के मंदिर पहले 62 दिनों की पूजा के लिए खुला। लेकिन शीर्ष कोर्ट के आदेश के बाद भी 1 जनवरी तक कोई भी महिला प्रवेश नहीं कर पाई।

इससे पहले सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर विरोध करने वाले संगठनों के खिलाफ महिलाओं ने मंगलवार को ही 620 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बराबर विरोध किया था। यह श्रंखला कासरगोड से तिरुवंतपुरम तक बनाई गई थी, जो 14 जिलों से होकर गुजर रही थी। इसमें करीब 150 से अधिक सामाजिक संगठनों ने भाग लिया।

दूरदर्शन के साथ 1 जनवरी को दिए गए साक्षात्कार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबरीमाला मंदिर के मामले को आस्था का करार देते हुए महिला जज के जजमेंट को पढ़ने की सलाह दी थी।