कांग्रेस-भाजपा की विदाई के लिए ये दोनों नेता बना देंगे ‘तीसरी ताकत’

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- Advertisement - dr. rajvendra chaudhary

जयपुर।

राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना में नवंबर में दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक पार्टियों ने अपनी-अपनी कमर कस ली है।
इसको लेकर चुनाव के लिए आचार संहिता लगने के महज 2 घंटे पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जहां राजस्थान के अजमेर जिले से चुनावी रणभेरी का शंखनाद फूंका, वहीं कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश के मुरैना में रैली करके सरकार को चुनौती दी।
आमतौर पर राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में केवल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी की सरकारी ही बनती रही है। यहां पर द्विदलीय व्यवस्था व्यवस्था ही काम करती है, लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है कि राजस्थान में कांग्रेस और भाजपा के इतर तीसरी शक्ति को बढ़ने की ओर अग्रसर है।
तीसरी शक्ति के तौर पर जहां बहुजन समाजवादी पार्टी ने राजस्थान में कांग्रेस के साथ गठबंधन करने से इंकार कर दिया है, वहीं आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल भी अपनी पार्टी का राजस्थान में विस्तार करने के लिए आतुर नजर आ रहे हैं। उनके अलावा नीतीश कुमार की जेडीयू और छोटे-मोटे दल भी अपने-अपने स्तर पर चुनाव के लिए तैयारियां कर रहे हैं।
कांग्रेस और भाजपा के अलावा जो राजस्थान में सबसे अधिक प्रभाव प्रभावकारी है, वह निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल और हाल ही में भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा देकर खुद का अलग दल (भारत वाहिनी पार्टी) बनाने वाले घनश्याम तिवाड़ी। घनश्याम तिवाड़ी जहां भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर राजस्थान में 6 बार विधायक रह चुके हैं, वहीं हनुमान बेनीवाल राज्य में एक बार बीजेपी और दूसरी बार निर्दलीय विधायक के तौर पर चुने जा चुके हैं।
दोनों ही नेता किसी न किसी रूप में बीते 5 साल से राजस्थान में बीजेपी की वसुंधरा राजे सरकार का विरोध करते रहे हैं। विभिन्न मुद्दों को लेकर विधानसभा के भीतर और बाहर दोनों नेताओं ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सरकार की तीखी आलोचना की है।
अब, जबकि राजस्थान में चुनाव आयोग द्वारा मतदान की तारीख तय की जा चुकी है, तब राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। यहां पर हनुमान बेनीवाल के द्वारा 4 साल के दौरान राज्य के आधे हिस्से में चार बड़ी रैलियां करके सरकार को चुनौती पेश की गई, वहीं बीजेपी के सांगानेर से विधायक घनश्याम तिवाड़ी अपनी पार्टी के बैनर तले पूरे राजस्थान में 200 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं।
बकौल घनश्याम तिवाड़ी राजस्थान में वह तीसरी पार्टी के रूप में राज्य की सियासत में जोरदार अंदाज़ में प्रवेश कर रहे हैं। उनके मुताबिक राजस्थान में वह सभी 200 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। इसके साथ ही साथ ही तिवाड़ी यह भी कहते हैं कि उनकी बातचीत हनुमान बेनीवाल के साथ चल रही है और संभावना यह है कि दोनों मिलकर एक साथ बीजेपी और कांग्रेस के खिलाफ झंडा बुलंद कर सदन में जनता की नई आवाज़ बनेंगे।
बहरहाल, सूत्र बताते हैं कि निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल की बातचीत बहुजन समाजवादी पार्टी के साथ भी गठबंधन करने को लेकर चल रही है, लेकिन घनश्याम तिवाड़ी को पूरी उम्मीद है कि बेनीवाल उनके साथ आकर बीजेपी और कांग्रेस की 20 साल से ‘एक बार मैं, एक बार तू’ के साथ चल रही जुगलबंदी को खत्म करने में कामयाब होंगे।
इस बीच अपने पिता और पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह के कथित अपमान का बदला लेने के लिए हाल ही में राजनीति में जबरदस्त तरीके से एंट्री करने फिराक में ‘स्वाभिमान रैली’ कर चुके बाड़मेर से बीजेपी विधायक मानवेंद्र सिंह भी इनके साथ शामिल हो सकते हैं, लेकिन राजस्थान में जाट और राजपूत बिरादरी के बीच सियासी रूप से प्रतिद्वंद्विता के चलते यह गठजोड़ होना मुश्किल नजर आ रहा है। ऐसे में मानवेंद्र सिंह के कांग्रेस में जाने के चर्चे अधिक हैं।
राज्य में जिस तरह के राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं और सर्वे सामने आ रहे हैं, उससे कांग्रेस के लिए जा खुशी की बात है। वहीं बीजेपी की राह कठिन नजर आ रही है। लेकिन तीसरी ताकत के रूप में हनुमान बेनीवाल और घनश्याम तिवाड़ी एकजुट होकर दोनों ही पार्टियों के खिलाफ ताल ठोकते हैं, तो मरू प्रदेश में नया सियासी इतिहास बनना लगभग तय है।