elephant riding in amer fort
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जयपुर।
आमेर महल में बुधवार सुबह दो हथिनियों के बीच हुए झगड़े पर पर्यटन विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। पर्यटन विभाग ने नियम विरुद्ध अधिकारियों की मिलीभगत से उग्र हथिनियों को तय समय से पहले चलाए जाने के मामले को पर्यटकों की सुरक्षा में बहुत बड़ी चूक माना है। विभाग ने इस मामले में पुरातत्व निदेशक को निर्देश दिए हैं कि वह पूरे मामले की जांच करें और रिपोर्ट विभाग को पेश करें।

जानकारी में आया है कि पर्यटन विभाग ने जांच के जो निर्देश दिए हैं उसमें प्रमुखता से इस बात पर जवाब मांगा गया है कि जिस हथिनी का समय 11 बजे बाद का था उसके फेरे अन्य हथिनियों के साथ क्यों कराए जा रहे थे?

इसी सवाल का जवाब देने में पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं, क्योंकि इस मामले में उनकी मिलीभगत प्रथमदृष्टया साबित हो रही है। पुरातत्व विभाग के सूत्रों का कहना है कि इस दुर्घटना के बाद से ही विभाग के अधिकारी इस मामले में लीपापोती करने में जुट गए हैं ताकि अपनी कुर्सी बचाई जा सके।

आमेर महल में लगे सभी विभाग के कर्मचारियों, होम गार्डों, गाइडों, माला-प्रसाद बेचने वालों, यहां विभिन्न स्टाल वालों को विभाग की तरफ से ताकीद किया गया है कि वह इस मामले में किसी से चर्चा नहीं करें।

सूत्र बता रहे हैं कि अधिकारियों ने हाथी मालिक एसोसिएशन के पदाधिकारियों व हाथी मालिकों को भी चेतावनी दी गई है कि वह इस मामले में ऐसी कोई बात नहीं बोले जो विभाग के अधिकारियों के खिलाफ जाए।
विभाग में नहीं होता रोस्टर

सूत्रों का कहना है कि आमेर महल को विभाग में सबसे ज्यादा कमाई वाली जगह माना जाता है और अधिकारी-कर्मचारी इस महल में पोस्टिंग के लिए हमेशा ललायित रहते हैं।

कारण यह कि पूरे राजस्थान में यही एक ऐसा स्मारक है जहां सर्वाधिक पर्यटक आते हैं और यहां का टिकट भी काफी महंगा है। इसी के साथ ही यहां अन्य कमाई के जरिए भी काफी ज्यादा है। यही कारण है कि यहां अधिकारी मिलीभगत करके लंबे समय तक टिके रहते हैं।

जयपुर में सभी स्मारकों पर टिकटों में हेराफेरी के आमले अक्सर उठते रहते हैं। पुरातत्व विभाग में पूर्व में बड़ा टिकट घोटाला भी उजागर हो चुका है। स्मारकों पर कंपोजिट टिकटों से एंट्री के समय एसीबी इन टिकटों के मामले में आमेर महल छापा मारने भी पहुंची थी, लेकिन एसीबी टीम का पार्किंग में झगड़ा होने से अधिकारी सजग हो गए और फर्जी कंपोजिट टिकट महल से हटा दिए गए थे।

बाद में जंतर-मंतर में अंकक्षण विभाग के छापे में एक ही सीरियल नंबर की तीन काउंटर स्लिपों की डायरियां मिलने से यह पुख्ता हो गया था कि विभाग में कंपोजिट टिकटों में भी बड़ा घोटाला हुआ है, लेकिन आज तक उसकी जांच नहीं कराई गई है।

राज्य सरकार के अधिकारियों-कर्मचारियों के रोस्टर नियम विभाग में बेमानी नजर आते हैं और इसी का फायदा उठाकर अधिकारी लापरवाह हो जाते हैं। ऐसे में पर्यटकों की सुरक्षा का मुद्दा गौण हो जाता है।

नियम विरुद्ध प्रतिबंधित हथिनी का संचालन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है और अधिकारियों की मिलीभगत साफ झलक रही है।
विश्व विरासत स्थल पर पर्यटकों की सुरक्षा जरूरी

आमेर महल को यूनेस्को ने विश्व विरासत स्थल घोषित कर रखा है। ऐसे में यूनेस्को की गाइड लाइन के अनुसार यहां पर्यटकों की सुरक्षा प्रमुख विषय है।

यूनेस्को की गाइड लाइन के अनुसार ही हर विश्व विरासत स्थल का सेफ्टी प्लान बनाया जाता है। ऐसे में अब पर्यटन विभाग को आमेर महल में होने वाली हाथी सवारी पर भी विशेष नजर रखनी होगी, क्योंकि हाथी सवारी देशी-विदेशी पर्यटकों में काफी मशहूर है और विदेशी पर्यटक को यहां हाथियों के कारण ही विशेष रूप से आते हैं।

‘हमारी एसोसिएशन पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के निर्देशन में काम करती है। एसोसिएशन की ओर से बुधवार को झगड़ने वाली दोनों हथिनियों के संचालन पर कुछ समय के लिए रोक लगाई गई है।

इन हथिनियों के संचालन पर पूरी तरह से रोक लगाने के संबंध में अभी विभाग की ओर से कोई निर्देश नहीं मिला है। पुरातत्व विभाग इस पर फैसला करेगा तो इन हथिनियों के संचालन पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाएगी।

ऐसे कई हाथी जयपुर में मौजूद हैं जिन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा हुआ है। यह हाथी सिर्फ अपनी ठाणों पर ही खड़े रहते हैं।’
रशीद खान, अध्यक्ष, हाथी मालिक एसोसिएशन


हाथियों की लड़ाई गंभीर विषय है। इस मामले में पर्यटन विभाग ने पुरातत्व विभाग के निदेशक से रिपोर्ट तलब की है।

श्रेया गुहा, प्रमुख शासन सचिव, पर्यटन विभाग