rajasthan university

जयपुर।
विश्वविद्यालय वैसे तो उच्च शिक्षा, रिसर्च और नए नए आविष्कार करने के लिए काम करने वाले संस्थान के तौर पर जाने जाते हैं। जहां से समाज को उच्च शिक्षित नागरिक और हाई लेवल एजुकेटेड टीचर मिलते हैं।

यहां पर किए गए शोधों से देश के विकास को पंख लगते हैं और समाज में जागृति के साथ साथ रोजगार के नए रास्ते खुलते हैं, लेकिन जब यही विवि उल्टे—सीधे कारनामे करने लगे तो सवाल उठना लाजमी है।

पिछले दिनों ऐसा ही एक हैरान कर देने वाला कारमान किया है राजस्थान विवि प्रशासन ने। जानकारी के अनुसार राजस्थान विवि के सभी 38 विभागों और संबद्ध कॉलेजों में मिलाकर तकरीबन 500 शिक्षक हैं, जिनमें असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर शामिल हैं।

विवि प्रशासन के द्वारा सरकार से अनुमति के बाद मार्च 2019 में सातवें वेतनमान को लागू करने की घोषणा कर दी। जिसका ​एरियर भुगतान विवि द्वारा अपने इन सभी लगभग 500 शिक्षकों और कर्मचारियों को करना था।

लेकिन विवि ने सभी नियमों और कायदों को धत्ता बताते हुए केवल एक शिक्षक को एरियर का भुगतान कर दिया और बाकी के लिए अभी भी बजट नहीं होने की बात कही जा रही है।

जानकारी के अनुसार विवि प्रशासन ने कुलपति प्रो. आरके कोठारी के निर्देश पर प्रो. विजयवीर सिंह को उनके सातवें वेतनमान के मुताबिक एरियर का भुगतान कर विवि के सभी अन्य शिक्षकों की उम्मीदों पर पानी फैर दिया।

सूत्रों के अनुसार जब इसकी वजह पूछी गई तो जिम्मेदार अधिकारियों ने जवाब दिया कि प्रो. विजयवीर सिंह की बेटी की शादी थी, इसलिए उनको पैसे की जरुरत को देखते हुए एरियर का भुगतान किया गया है। यदि इस तरह की बातें कहने से कोई प्रतिष्ठित संस्था नियम तोड़ने लगी तो विद्यार्थियों को क्या शिक्षा मिलेगी?

चौंकाने वाले इस प्रकरण को लेकर राजस्थान विवि के पूर्व सिंडीकेट सदस्य और लोक प्रशासन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ओम महला ने कुलपति प्रो. कोठारी को पत्र लिखकर पूछा है कि ऐसा क्या किया गया है? हालांकि, विवि अभी तक इस मामले में स्पष्टीकरण नहीं दे पाया है।

अधिक खबरों के लिए हमारी वेबसाइट www.nationaldunia.com पर विजिट करें। Facebook,Twitter पे फॉलो करें।