बस संचालकों की कमर तोड़ती ‘ पुलिस एंट्री’

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nationaldunia
- Advertisement - dr. rajvendra chaudhary

-निजी बस चालकों से अवैध वसूली, जिला बॉडर पर भी देनी पड़ती है पुलिस एंट्री, पीसीआर वालों की अलग से वसूली।

जयपुर।

राजधानी में से संचालित करने वाले निजी बस संचालकों को अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए पुलिस अवैध वसूली का सामना करना पड़ता है।

बस आॅपरेटर्स को रोड टैक्स, लापरवाही से बस चलाने पर चालान के वैध करने के अलावा पीसीआर को ‘पुलिस एंट्री’ के रुप में अवैध टैक्स भी देना पड़ता है। इसी को लेकर हमने तीन जगह पर किया स्टिंग आॅपरेशन किया।

यह है सिंधी कैम्प बस अड्डा। वैसे तो यहां पर सबकुछ पुलिस की निगरानी में हो रहा है, लेकिन पुलिस ही के द्वारा अवैध वसूली की जा रही है।

बस चलाने से पहले यदि पुलिस एंट्री ना दी जाए तो चालान के रूप में पीसीआर अपना खेल खेलने से भी नही चूकती है। इसी तरह से रेलवे स्टेशन पर भी इसी तरह का खेल हो रहा है।

यहां पर बस मालिक के साथ इस एंट्री के खेल का खामियाजा इलाके में ट्रेवल आॅफिस वालों को भी चुकाना पड़ता है। हीरापुरा में पीसीआर को हप्ता देने के साथ ही ट्रेवल्स आॅफिस चलाने वाले मालिक को बस से पार्सल उतरवाने पर भी चौथ वसूली देनी पड़ती है।

नाम नहीं छापने की शर्त पर एसी बस चलाने वाले एक बस चालक ने बताया कि जयपुर से अहमदाबाद चलने वाली बसों का रोड टैक्स जमा कराते समय 400 से 500 रुपए पुलिस एंट्री के नाम से देने पड़ते हैं।

इसके अलावा इलाके में बस खड़ी करने के नाम पर भी पीसीआर चालक को अलग से देने पड़ते हैं।

बस चालकों के अनुसार इलाके में बस संचालन करने वाले आॅफिस मालिकों को इलाके की पीसीआर वालों के लोगों को बिना किराया लिए वीआईपी के रूप में ले जाना पड़ता है।

साथ ही इनका पार्सल भी बड़ी बिना किराए के एक जगह से दूसरी जगह पहुंचना पड़ता है। रोडवेज बसों के द्वारा जयादा पैसा लेने के कारण लोग इन्हीं बसों के चक्कर में पिसने पर मजबूर हैं।

निजी बसों के संचालन पर की गई पड़ताल में सामने आया कि बसों के संचालन के लिए बदमाशों ने पुलिस की मिलीभगत से माफिया राज बना लिया है।

सिंधी कैम्प, रेलवे स्टेशन, हीरापुरा पर यह आसानी से देखने को मिल जाएगा। जयपुर से अजमेर, पुष्कर, उदयपुर, नाथद्वारा, अहमदाबाद जाने वाली बसों में जो सवारियां बैठती हैं, उनका प्रति सवारी के हिसाब से एंट्री के रूप में माफिया को पैसा देना पड़ता है।

बस माफिया कुछ बसों से 30 रुपए प्रति सवारी से लेकर 200 और 300 रुपए तक वसूली करते हैं। यह सब दूरी के हिसाब से तय होता है।