rahul gandhi
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नई दिल्ली।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के सामने वायनाड से तीन और गांधी लोकसभा चुनाव 2019 में किस्मत आजमा रहे हैं। केई राहुल गांधी, शिवप्रसाद गांधी और के राघुल गांधी वायनाड से मैदान में हैं।

इन तीन गांधियों में से दो गांधी पहले भी चुनाव लड़ चुके हैं। केई राहुल गांधी पहली बार किस्मत आजमा रहे हैं, वह संगीत में पीएचडी कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश की अमेठी सीट पर से ध्यान हटाकर केरल के वायनाड को सुरक्षित सीट मानते हुए राहुल गांधी दक्षिण भारत में किस्मत आजमाने ने पहुंचे थे, लेकिन लगता है यहां पर भी उनके सामने चुनौतियां कम नहीं है।

इसको किसी रणनीति का हिस्सा माने यह इत्तेफाक, जो भी हो लेकिन यहां पर भी राहुल गांधी की राह आसान नहीं है। इन तीन गांधियों के अलावा वामपंथी उम्मीदवार सबसे बड़ी चुनौती है।

केई राहुल गांधी कोट्टायम रहने वाले हैं और वह यहां से आदिवासी संगीत में शोध छात्र हैं। केई राहुल गांधी पहली बार चुनाव के लिए मैदान में उतरे हैं।

बताया जाता है कि उनके चुनाव लड़ने को लेकर परिवार को भी पता नहीं है। वह खुद को वामपंथियों का समर्थक बताते हैं। उनके परिवार में किसी और को राजनीति में दिलचस्पी नहीं है।

इसी तरह शिवप्रसाद गांधी त्रिशूर के रहने वाले हैं। केएम शिवप्रसाद गांधी पहले भी 2016 में विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमा चुके हैं। वह 2016 में कोट्टायम के पुललुपल्ली से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा दाखिल किया था, तब उनको केवल 103 वोट मिले थे।

वह संस्कृत के शिक्षक हैं और उनकी पत्नी भारतीय जीवन बीमा निगम की एजेंट है। शिवप्रसाद गांधी इंडियन गांधियन पार्टी से जुड़े हुए हैं। वह बताते हैं कि राहुल गांधी की वजह से मैदान में नहीं उतरे हैं, बल्कि खुद चुनाव जीतकर देश की सेवा करना चाहते हैं।

तीसरे गांधी यानी के राघुल गांधी कोयंबटूर के रहने वाले हैं। राघुल गांधी का उम्मीदवारी परचा इस बार कोयंबतूर लोकसभा क्षेत्र में टेक्निकल प्रॉब्लम के कारण निरस्त कर दिया गया था।

राघुल ने कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ वायनाड लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। राघुल गांधी खुद को जय हिंद फ्रीडम पार्टी और इंडिया मक्कल कषगम से जुड़ा हुआ बताते हैं।

उन्होंने 2006 में भी यहां से मेयर का चुनाव लड़ कर किस्मत आजमाने की कोशिश की थी, लेकिन चुनाव हार गए थे।

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