ashok gehlot congress
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जयपुर। मोदी तूफान में कई बरगद के वृक्ष उखड़ गए। जो कई बार लगातार सांसद बन रहे थे, उनकी भी जड़ें उखड़ गईं। कांग्रेस को गढ़ रहा अमेठी भी हाथ से फिसल गया। जिनको जनता ने पांच माह पहले ही सिर माथे लगाया था, उनको भी जमीन पर पटक दिया।

लोकसभा चुनाव 2019 में कई रिकॉर्ड बने हैं। पीसीसी चीफ से लेकर खुद मुख्यमंत्री भी हार गए। केवल पांच माह के भीतर ही ऐसा क्या हुआ कि राजस्थान की कांग्रेस वाली अशोक गहलोत सरकार से मोहभंग हो गया?

यह तो भला हो कांग्रेस के 2 मंत्रियों का, जिन्होंने अशोक गहलोत सरकार की लाज बचा ली, वरना कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में जिन 200 प्रत्याशियों को टिकट दिया था, उनमें से 185 अपनी सीट नहीं बचा पाए।

कांग्रेस सरकार के केवल खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रमेश मीणा, महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री ममता भूपेश ही ऐसे मंत्री हैं, जो अपने विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस केा जिता पाए।

इनके अलावा विधायक रफीम खान, जाहिदा खान, पृथ्वीराज मीणा, इंद्रा मीणा, दानिश अबरार, रुपाराम, अमीन खान, गणेश के अलावा मकराना से रुपाराम, रानीवाड़ा से नारायण सिंह, महुवा से ओमप्रकाश और गंगापुर सिटी से रामकेश की सीटों पर भी कांग्रेस ने बढ़त ली।

बाकि सभी 185 सीटों पर भाजपा ने कब्जा किया। यानी लोकसभा चुनाव के परिणाम में वोटों के आधार पर देखा जाए तो राजस्थान की 185 सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार जीत रहे हैं।

7 दिसंबर को हुए मतदान में जहां कांग्रेस पार्टी 100 सीटों पर कब्जा जमाने में कामयाब रही, वहीं केवल पांच माह में ही जनता ने कांग्रेस से किनारा कर सत्ता की चाबी भाजपा को सौंप दी।

कांग्रेस पार्टी को जहां भाजपा ने 15 सीटों पर समेट दिया, वहीं विधानसभा चुनाव में भी जिन 27 निर्दलीयों ने जीत हासिल की थी, मोदी के तूफान में उनकी भी कुर्सी चली गई। कांग्रेस के वर्तमान में केवल 11 विधायक ही अपनी सीट बचाने में सफल हुए हैं।

मजेदार बात यह है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी सीट सरदारपुरा से हार गए, उनके बूथ पर भी भाजपा जीती, तो उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट भी टोंक में भाजपा के सामने घुटने टेक बैठे। यानी जतना ने सीएम और डिप्टी सीएम को भी जमीन सुंघा दी।