3.6 लाख करोड़ है RBI और मोदी सरकार के बीच विवाद का कारण

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नई दिल्ली।

करीब एक पखवाड़े से केंद्र के नरेंद्र मोदी सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के बीच जारी विवाद अब सतह पर आने लगा है। अब सामने आया है कि रिजर्व बैंक के पास आरक्षित करीब साढे 9 लाख करोड़ रुपए के मुद्रा भंडार में से 3.60 लाख करोड़ रुपए केंद्र सरकार लेना चाहती है।

इस मामले को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल को साफ कहा है कि सरकार किसी भी सूरत में इस मुद्रा का उपयोग करने के लिए दृढ़ संकल्पित है।

आरबीआई के गवर्नर बॉडी की मीटिंग होने वाली है। इस एजीएम में जबरदस्त हंगामा होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि बोर्ड मीटिंग में गवर्नर उर्जित पटेल के विपक्ष में कई बोर्ड मेंबर्स खड़े हो सकते हैं, जो केंद्र सरकार द्वारा आरक्षित मुद्रा काम में लेने के पक्ष में है।

इधर आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने उर्जित पटेल से राहुल द्रविड़ की तरह बैठकर बैटिंग करने को कहा है। उन्होंने उर्जित पटेल से कहा है कि नवजोत सिंह सिद्धू की तरह तैश में आकर जल्दी पलटने से बचें।

आपको बता दें कि केंद्र सरकार रिजर्व मुद्रा को विकास कार्य में लगाने के लिए प्रयास कर रही है। जबकि 82 साल के रिजर्व बैंक के इतिहास में किसी भी सरकार ने इस तरह से हस्तक्षेप नहीं किया है।

आपको यह भी बता दें कि अमेरिका, ब्रिटेन, जापान जैसे विकसित देशों के पास उपलब्ध रिजर्व मुद्रा के बजाए भारत के पास बहुत ज्यादा है। बावजूद इसके आरबीआई सरकार को यह आरक्षित मुद्रा विकास के काम में लेने के लिए एग्री नहीं है।

जेटली का कहना है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार रिजर्व मुद्रा को काम में लेकर देश के विकास में आगे बनाना चाहती है, ताकि विकास रुके नहीं और देश आगे बढ़ता रहे।

आरबीआई और केंद्र सरकार के बीच जारी विवाद के बीच सूत्रों का दावा है कि मोदी सरकार रिजर्व बैंक के साथ किसी तरह का विवाद नहीं चाहती है। इसको लेकर दोनों पक्षों में बातचीत चल रही है।

उल्लेखनीय है कि बीते 2 माह से देश में हर महीने एक लाख करोड़ से ज्यादा की टैक्स उगाई हो रही है। यह टैक्स वसूली जीएसटी लागू होने के बाद पहली बार एक लाख करोड रुपए से ऊपर पहुंची है।

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