नई दिल्ली।

2 साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रात को 8:00 बजे की गई ऐतिहासिक नोटबंदी के कई दुष्परिणाम मीडिया के माध्यम से लोगों के सामने आए।

कतारों में लगने से करीब 100 लोगों की मौत का आंकड़ा भी विभिन्न समाचार पत्रों और समाचार चैनलों ने दावे के साथ दिखाया, लेकिन इसके बावजूद मोदी सरकार द्वारा किया गया यह ऐतिहासिक फैसला देश के लिए एक अति महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

2 दिन पहले ही एक आरटीआई के जवाब में मिली जानकारी के मुताबिक नोटबन्दी के वक्त 107.20 अरब रुपए काले धन के रूप में सामने आए, जिनको रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने नष्ट किया है। यह सूचना एक आरटीआई एक्टिविस्ट के द्वारा मांगी गई जानकारी के रूप में थी।

इसके अलावा सीधे तौर पर लाभ देखे जाएं तो नोटबंदी के बाद 2.26 लाख कंपनियां, जो की फर्जी तरीके से काम कर रही थी, ये केवल दो नंबर के पैसे को एक नंबर का करने में लगी हुई थी, उनको भी केंद्र सरकार ने बंद कर दिया।

इतना ही नहीं नोटबंदी के कुछ ही समय बाद लागू की गई जीएसटी और नोटबंदी, दोनों ने मिलकर देश में टैक्स कलेक्शन का ऐतिहासिक स्तर पार करते हुए एक लाख करोड रुपए महीने का जमा करना शुरू कर दिया है।

इस दौरान देश में टैक्स भरने वालों की तादात और टैक्स कलेक्शन में 62 फ़ीसदी का इजाफा हुआ है। साथ ही साथ 35 सौ करोड़ रुपए की बेनामी संपत्ति अभी जप्त की गई है।

यह प्रक्रिया अभी और चलेगी, ज्यों ज्यों नोटबंदी और जीएसटी का असर धरातल पर आएगा, त्यों ही बेनामी संपत्तियां उजागर होती चली जाएगी।