जयपुर।
राजस्थान विश्वविद्यालय समेत राज्य के करीब 27 सरकारी विश्वविद्यालयों और लगभग 200 महाविद्यालयों में 27 अगस्त को होने वाले छात्रसंघ चुनाव को लेकर छात्रनेता पसीना बहाने में जुटे हैं। चुनाव में महज 9 दिन शेष रहे हैं और अब तक किसी भी छात्र संगठन ने अपने पैनल की घोषणा नहीं की है।

समझा जा रहा है कि आज या कल तक राजस्थान विवि के छात्रसंघ चुनाव के लिये एबीवीपी या एनएसयूआई में से किसी एक के द्वारा प्रत्याशी पैनल की घोषणा कर दी जायेगी। हालांकि, कई बार पैनल एक ही बार में नहीं उतारा जाता, लेकिन आज—कल में इसकी शुरुआत होने की संभावना है।

एबीवीपी की बात करें तो उसमें अमित कुमार बड़बड़वाल अध्यक्ष पद के लिये सबसे बड़े दावेदार हैं। वह बीते करीब तीन साल से अध्यक्ष का टिकट ही मांग रहे हैं। पिछली बार उनको इस बार चुनाव लड़ाने के ​लिये राजी किया गया था। अमित कुमार के पास वैसे भी चुनाव लड़ने का यह आखिरी मौका है।

जानकारी में आया है कि यदि एबीवीपी ने अमित कुमार को टिकट नहीं दिया तो वह बगावत पर उतरने को तैयार बैठे हैं। उम्र की सीमा ने अमित कुमार को बगावत करने की अग्रसर कर दिया है। अगर ऐसा होता है तो एक बार फिर एबीवीपी के लिये चुनाव में परीक्षा की घड़ी सामने आने वाली है।

इसी तरह से महासचिव पद पर नितिन शर्मा को सबसे तगड़ा उम्मीदवार माना जा रहा है। वह इससे पहले ही कॉमर्स कॉलेज के महासचिव रह चुके हैं। उन्होंने पिछली बार भी विवि से अपेक्स महासचिव पद के लिये टिकट मांगा था।

जिस तरह से अध्यक्ष पद पर अमित कुमार के पास समय की कमी है, उसी तरह से अब नितिन शर्मा के पास भी उम्र के लिहाज से अब वक्त नहीं है। संगठन ने यदि शर्मा को टिकट नहीं दिया तो उनका भी बागी होना लगभग तय है। यह स्थिति संगठन के लिये परेशानी पैदा करेगी।

इनके साथ ही रामकेश मीणा, शौय जैमन, विजेंद्र महावा, राहुल भाखर भी अध्यक्ष पद के लिये टिकट के दावेदार हैं। बताया जा रहा है कि शौय जैमन अध्यक्ष पद के टिकट से नीचे बात नहीं करना चाहते हैं, जबकि रामकेश मीणा के सामने परीक्षा परिणाम बड़ी रुकावट के तौर पर देखा जा रहा है।

लगातार संगठन में काम करने वाले अरूण शर्मा को अनुशासन की कमी बताकर बीते दिनों बाहर का रास्ता दिखाने का दावा किया गया था, लेकिन एबीवीपी द्वारा निकाली गई तिरंगा यात्रा के वक्त अरूण के समर्थकों ने खूब धमाचौकड़ी जमाई थी।

इधर, एनएसयूआई में उत्तम चौधरी सबसे तगड़े और पुराने दावेदार हैं। उनके लिये दो विश्वविद्यालयों से एकसाथ डिग्री अभी भी परेशानी का सबब बनी हुई है। हालांकि, जानकारी में आया है कि राजस्थान विवि प्रशासन के द्वारा उनकी एक डिग्री को कैंसिल कर योग्य कर दिया है। लेकिन कुछ छात्रों ने कोर्ट में रिट लगा दी है।

कहा जा रहा है कि अमित कुमार की तरह ही उत्तम चौधरी के पास भी उम्र के हिसाब से यह आखिरी मौका है। ऐसे में यदि उनको भी टिकट नहीं मिलता है, तो वह भी बागी होकर ताल ठोक सकते हैं।

उत्तम चौधरी के अलावा मुकेश चौधरी को भी अध्यक्ष पद के टिकट हेतु बड़ा दावेदार बताया जा रहा है। इसी संगठन में राजेश चौधरी भी टिकट मांग रहे हैं। कहा जा रहा है कि एकमात्र महिला दावेदार पूजा वर्मा को अगले साल चुनाव में टिकट देने का आश्वासन देकर बिठा दिया गया है।

इनके साथ ही कुछ ऐसे नेता भी हैं जो निर्दलीय उम्मीदवार भी तैयारी में जुटे हुये हैं, जिनमें से कईयों को छोटे—बड़े संगठन टिकट दे सकते हैं। एसएफआई भी हमेशा की भांति अपना पैनल उतारने जा रही है, लेकिन यह केवल वोट काटने का काम करने वाला संगठन बनकर रह गया है।

हालांकि, दोनों संगठनों के कर्ताधर्ता, यानी एनएसयूआई के अध्यक्ष और एबीवीपी के संगठन मंत्री ने दावा किया था कि किसी भी छात्रनेता को बागी नहीं होने दिया जायेगा।

किंतु हर साल की भांति यह वही पुराना राग है, जिसमें दावे किये जाते हैं और अंत में होता यह है कि जिनको टिकट नहीं मिलता है, वह बागी हो जाते हैं। बीते तीन साल से राजस्थान विवि का छात्रसंघ अध्यक्ष बागी उम्मीदवार ही बन रहा है।

पिछले दिनों एबीवीपी के अर्जुन तिवाड़ी और एनएसयूआई के अभिमन्यू पूनिया ने दावा करते हुये कहा था कि एक भी छात्र को बागी होकर चुनाव नहीं लड़ने दिया जायेगा। जिसके बाद भी कई छात्रों के बगावती तेवरों ने संगठनों को सकते में डाल दिया है।