गहलोत, डूडी, शकुंतला, डोटासरा को हराएंगे ये भाजपाई!

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जयपुर।
करीब दो माह बाद होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी भारतीय जनता पार्टी ने सीटों को अलग-अलग कैटेगिरी में बांट दिया है। पार्टी ने इस कड़ी में सबसे पहले कमजोर, यानी वह सीटें, जहां पर अभी बीजेपी के विधायक नहीं हैं, उन विधानसभा सीटों को चिन्हित किया है।

ऐसी 40 सीटों की जिम्मेदारी मंत्रियों एवं संसदीय सचिवों सहित वरिष्ठ विधायकों को दी गई है। इन्हें अपनी सीट के साथ ही जिम्मेदारी वाली सीट पर भी पार्टी की मजबूती के लिए काम करना होगा।

इनकी सीटें भी कमजोर!

मजेदार बात यह है कि पार्टी ने अपने कुछ दिग्गज नेताओं की सीटों को भी सबसे कमजोर मानी जाने वाली सीटों की सूची में रखा है। लालसोट सीट से पिछला चुनाव दिग्गज किरोड़ी लाल मीणा ने राजपा उम्मीदवार के रूप में जीता था। वे अब भाजपा के राज्यसभा सांसद हैं।

उनकी छोड़ी सीट को कमजोर मानकर इसका जिम्मा बाबूलाल वर्मा को सौंपा गया है। इसी तरह उनकी पत्नी गोलमा देवी राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ सीट से विधायक हैं। इस सीट का जिम्मा मंत्री जसवंत यादव को सौंपा गया है।

इसी तरह चुनाव संचालन समिति के सदस्य एवं प्रदेश प्रवक्ता सतीश पूनिया की सीट आमेर की जिम्मेदारी कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी को सौंपी गई है। राजपा के नवीन पिलानिया ने पूनिया को पिछला चुनाव 329 वोटों से हराया था।

अपनी ही सीटें कमजोर!

ऐसी दो विधानसभा सीटों को भी अत्यधिक कमजोर माना है जहां उसी के विधायक हैं। श्री गंगानगर की सादुलपुर सीट से भाजपा के ही गुरजंट सिंह एमएलए हैं, लेकिन कमजोर मानते हुए जिम्मेदारी पंचायती राज मंत्री राजेन्द्र सिंह राठौड़ को सौंपी गई है। इसी तरह झुंझुनूं जिले की सूरजगढ़ का जिम्मा मोहनलाल गुप्ता को दिया गया है। यहां भी बीजेपी के खेमाराम विधायक हैं।

संशय कायम, इसलिए सूची में कभी भाजपा के साथ रहे माणिकचन्द सुराणा ने पिछला चुनाव लूणकरणसर से निर्दलीय के रूप में जीता था। इस बार वे चुनाव लड़ेंगे या नहीं, लड़ेंंगे तो भाजपा के साथ होंगे या नहीं, इसपर संशय बरकरार है।

इसलिए इस सीट का जिम्मा जोगाराम पटेल को दिया गया है। इसी तरह गौरव यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री के साथ नजर आए वल्लभनगर के निर्दलीय विधायक रणधीर सिंह भिंडर को लेकर भी संशय कायम है। इस सीट का जिम्मा धनसिंह रावत को सौंपा गया है।

इसी तरह सिकराय (आरक्षित) सीट से पिछला चुनाव राजपा की गीता वर्मा जीती थीं। वे भाजपा में शामिल हो चुकी हैं लेकिन पार्टी ने उनकी सीट को कमजोर मानते हुए इसका जिम्मा किरण माहेश्वरी को सौंपा है।

यहां, इन्हे जिम्मेदारी

श्रीगंगानगर सीट की जिम्मेदारी कैबिनेट मंत्री सुरेन्द्रपाल सिंह टीटी को। अभी जमींदारा पार्टी की कामिनी जिंदल विधायक हैं।
रायसिंहनगर (एससी आरक्षित) सीट की डॉ. रामप्रताप को जिम्मेदारी। वर्तमान में सोना बावरी एमएलए हैं, जो कांग्रेस में जा चुकी हैं।

बीकानेर देहात की कोलायत सीट की जिम्मेदारी विश्वनाथ मेघवाल को। कांग्रेस के भंवर सिंह भाटी विधायक हैं।
नोखा का जिम्मा ज्ञानचंद पारख को। यहां नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी एमएलए हैं।

सरदारशहर सीट का जिम्मा मंत्री राजकुमार रिणवां को। कांग्रेस के भंवरलाल विधायक हैं।
झुंझुनूं सीट की जिम्मेदारी अरुण चतुवेर्दी को। कांग्रेस के ब्रिजेंद्र सिंह ओला विधायक हैं।

मंडावा की जिम्मेदारी प्रेमसिंह बाजौर को। निर्दलीय नरेंद्र कुमार विधायक हैं।
नवलगढ़ सीट की जिम्मेदारी कालीचरण सराफ को। कांग्रेस के राजकुमार शर्मा विधायक हैं।
खेतड़ी सीट का जिम्मा सुरेन्द्र गोयल को। अभी बीएसपी के पूरणमल विधायक हैं।

सीकर जिले की फतेहपुर सीट का जिम्मा मंत्री राजपाल सिंह शेखावत को। निर्दलीय नंदकिशोर महरिया विधायक हैं।
लक्ष्मणगढ़ सीट का जिम्मा मंत्री यूनुस खान को। अभी कांग्रेस के गोविंद सिंह डोटासरा विधायक हैं।

दांतारामगढ़ की जिम्मेदारी मंत्री हेमसिंह भड़ाना को। अभी कांग्रेस के नारायण सिंह विधायक हैं।
कोटपूतली सीट का जिम्मा रामलाल शर्मा को। कांग्रेस के राजेंद्र सिंह यादव विधायक हैं।

बस्सी (आरक्षित) सीट का जिम्मा अशोक परनामी को। निर्दलीय अंजू धानका विधायक हैं।
अलवर जिले की बानसूर सीट का जिम्मा रामहेत यादव को। कांग्रेस की शकुंतला रावत विधायक हैं।

भरतपुर की डीग-कुम्हेर सीट विजय बंसल के जिम्मे। कांग्रेस के विश्वेंद्र सिंह विधायक हैं।
वैर (आरक्षित) सीट का जिम्मा अनिता गुर्जर को। कांग्रेस के भजनलाल जाटव विधायक हैं।

धौलपुर की बाड़ी सीट का जिम्मेदारी वासुदेव देवनानी को। कांग्रेस के गिराज सिंह विधायक हैं।
राजाखेड़ा की जिम्मेदारी उर्जा मंत्री पुष्पेन्द्र सिंह राणावत को। कांग्रेस के प्रधुम्न सिंह विधायक हैं।

करौली जिले की टोडाभीम (आरक्षित) सीट का जिम्मा श्रीचंद कृपलानी को। कांग्रेस के घनश्याम विधायक हैं।
करौली सीट की जिम्मेदारी मानसिंह गुर्जर को। कांग्रेस के दर्शन सिंह विधायक हैं।

सपोटरा (आरक्षित) सीट की जिम्मेदारी जितेन्द्र गोठवाल को। कांग्रेस के रमेश मीणा विधायक हैं।
अजमेर देहात की नसीराबाद सीट की जिम्मेदारी अनिता भदेल को। उपचुनाव में कांग्रेस के रामनारायण जीते थे।

नागौर जिले की खींवसर विधानसभा सीटा की जिम्मेदारी मंत्री अजय सिंह किलक को। निर्दलीय हनुमान बेनीवाल विधायक।
भीलवाड़ा की जहाजपुर सीट का जिम्मा कालूलाल गुर्जर को। कांग्रेस के धीरज गुर्जर विधायक हैं।

मांडलगढ़ का जिम्मा अर्जुनलाल जीनगर को। कांग्रेस के विवेक धाकड़ एमएलए हैं।
जोधपुर की सरदारपुरा का जिम्मा गजेन्द्र सिंह खींवसर को। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सीट।
बाड़मेर शहर सीट की जिम्मेदारी बाबूसिंह राठौड़ को। कांग्रेस के मेवाराम जैन विधायक हैं।

जालौर की सांचौर सीट का जिम्मा मदन राठौड़ को। कांग्रेस के सुखराम विश्नोई विधायक हैं।
उदयपुर देहात की झाड़ोल का जिम्मा गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया को। कांग्रेस के हीरालाल विधायक हैं।

बांसवाड़ा की बागीदौरा (आरक्षित) सीट का जिम्मा सुशील कटारा को। कांग्रेस के महेंद्रजीत सिंह मालवीय विधायक हैं।
बूंदी की हिण्डौली सीट का जिम्मा प्रह्लाद गुंजल को। कांग्रेस के अशोक विधायक हैं।

इनका कहना है-
कुछ सीटों पर पार्टी की स्थिति मजबूत करने के लिए मंत्री स्तर के वरिष्ठ विधायकों को जिम्मेदारी दी है। उन्हें अपनी सीट के साथ ही जिम्मेदारी वाली कमजोर सीट को भी संभालना होगा।
अर्जुनराम मेघवाल, सह संयोजक, चुनाव प्रबंधन समिति