जयपुर।
देर रात राज्य सरकार ने आदेश जारी किया कि तुरंत प्रभाव से सेंट्रल जेल में बंद सभी 19 छात्रनेताओं को रिहा कर दिया जाये। जेलर ने लिखित आदेश पर कार्यवाही करते हुये रात 2 बजे जेल के दरवाजे खोलकर उनको बाहर किया। इन 19 जनों में राजस्थान विश्वविद्यालय के तत्कालीन छात्रसंघ अध्यक्ष महेंद्र चौधरी, लॉ कॉलेज के अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल समेत प्रमुख छात्रनेता शामिल थे।

सभी को जमानती मुचकले भरवाने के लिये गांधी नगर थाने रवाना कर दिया। किंतु छात्रों ने पुलिस की गाड़ी में बैठने से मना कर दिया और पैदल ही रवाना हो गये।​ संभवत: ऐसा भी पहली बार ही हो रहा था कि आगे—आगे छात्रनेता पैदल चल रहे थे और उनके पीछे पुलिस की गाडियां चल रही थीं।

केंद्रीय कारागार से मुस्लिम मुसाफिर खाने तक आते—आते उनको करीब 3 बज चुके थे। रात को इस तरह से पुलिस के प्रोटोकॉल में छात्रों के जाने की बात सोशल मीडिया नहीं होने पर भी आग की तरह फैल गई। चूंकि मुस्लिम मुसाफिर खाना रातभर आबाद रहता है, ​इसलिये सूचना फैल गई और आसपास के लोग वहां के लिये रवाना हो गये।

सभी को लीड कर रहे महेंद्र चौधरी, हनुमान बेनीवाल समेत सभी छात्रनेताओं की पॉपुलिरटी इतनी थी कि लोगों ने अपनी गाड़ियां निकाल कर उनको दे दी, जिनमें बैठकर वो थाने के लिये रवाना हुये।

सभी की थाने में जमानत भरी गई और फिर उनको छोड़ दिया गया। करीब साढ़े चार बजे सभी छात्र पहले चाय पीने सिंधी कैम्प गये और उसके बाद लगभग साढ़े पांच बजे राजस्थान विश्वविद्यालय के मुख्यद्वार पर पहुंच गये। यहां से छात्रावासों में संदेश भिजवाया कि छात्रनेता जेल से रिहा होकर आ गये हैं।

सुबह 7 बजे पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सरकार को विधानसभा में घेरने के लिये विवि के मैन गेट पर छात्रों की भीड़ जमा होने लगी। सभी हॉस्टल्स के छात्र खुलकर सामने आ गये। वहां से मीटिंग कर छात्र नेताओं ने संबोधित करते हुये कहा कि सरकार का विरोध करने के लिये पहले विवि के मुख्य द्वार से महात्मा गांधी की मूर्ति तक पैदल मार्च किया जायेगा, वहां पर सद्बुद्धि के लिये प्रार्थना की जायेगी और फिर विधानसभा का घेराव किया जायेगा।

यही किया गया, करीब 11 बजे मार्च निकाला गया और फिर वहां से जुलूस के रूप में पुरानी विधानसभा, जो कि हवामहल के पास बनी हुई है, विधानसभा का सत्र चल रहा था। अगले कुछ दिनों में छात्रों के इस आंदोलन ने उग्र रूप धारण कर लिया था। करीब तीन—चार हजार छात्रों ने विधानसभा के बाहर की सड़क जाम कर दी और वहां पर सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई।

इसकी जानकारी पुलिस अधिकारियों के द्वारा मुख्यमंत्री भैंरूसिंह शेखावत को दी गई, तब वह सदन में ही मौजूद थे। उन्होंने 10 छात्रों का एक प्रतिनिधि मंडल अंदर बुलाया। अध्यक्ष महेंद्र चौधरी, हनुमान बेनीवाल समेत सभी 10 छात्रों की सीएम शेखावत से बातचीत हुई। उन्होंने आश्वासन दिया कि जो वे चाहते हैं, वो हो जायेगा। जबकि इससे पहले महेंद्र चौधरी दो बार एनएसयूआई के टिकट पर चुनाव हार गये थे, तो उनको टिकट नहीं मिला था और वो निर्दलीय अध्यक्ष बने थे। हनुमान बेनीवाल निर्दलीय ताल ठोक रहे थे। सरकार भाजपा की थी।

अब चलते हैं थोड़ा पीछे, जहां से यह सारी घटना शुरू हुई थी। दरअसल, एबीवीपी ने तत्कालीन कुलपति डॉ. आरएन सिंह को हटाने के लिये आंदोलन किया था। जिसमें विवि के मैन गेट पर ताला जड़ दिया गया।

उस वक्त छात्रसंघ अध्यक्ष महेंद्र चौधरी और कई कार्यकर्ता रोहतांग—मनाली ट्रिप पर गये हुये थे। किसी तरह सूचना मिलने पर ट्रिप को बीच में छोड़कर वे वापस जयपुर लौट आये। एबीवीपी के आव्हान पर कुलपति डॉ. आरएन सिंह को हटाने के लिये 10 अगस्त को राजस्थान विवि बंद का कार्यक्रम था।

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक एबीवीपी के आव्हान पर करीब 700 छात्रों का जुलूस मुख्यद्वार पर आया। तब विवि गेट पर एनएसयूआई की टीम, जिसमें छात्रसंघ महेंद्र चौधरी समेत सभी नेता शामिल थे। उनके साथ थे हनुमान बेनीवाल और उनकी टीम।

इनके द्वारा विवि को बंद करने का विरोध कर दिया। पुलिस ने भी भाजपा सरकार होने के कारण एबीवीपी का सहयोग करते हुये एनएसयूआई के खिलाफ ही काम किया। करीब एक घंटे तक छात्रों पर पुलिस का लाठीचार्ज हुआ और विवि में जोरदार अराजकता फैल गई।

इसी दौरान पुलिस के द्वारा अध्यक्ष महेंद्र चौधरी को गिरफ्तार कर लिया गया। फिर आंदोलन की कमान लॉ कॉलेज के अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल के हाथ में आ गई। उन्होंने सभी छात्रों को एकत्रित किया और छात्रसंघ अध्यक्ष कार्यालय से रवाना होकर जुलूस के रूप में तत्कालीन डीसीपी सीबी शर्मा के अध्यक्ष को रिहा करने का कार्यक्रम बनाया।

भयानक अराजकता के कारण पुलिस ने विवि का मैन गेट बंद कर रखा था। हनुमान बेनीवाल की अगुवाई में आये छात्रों ने मुख्यद्वार का गेट खोला और पुलिस के अधिकारियों से बात करनी चाही, लेकिन पूर्व से तैयार पुलिस के जवानों ने उनपर फिर से लाठीचार्ज कर दिया और इस दौरान हनुमान बेनीवाल समेत 18 जनों को गिरफ्तार कर लिया, उनको जीपों में डालकर बजाज नगर थाने ले गये।

अपने प्रमुख छात्रनेताओं को पकड़ने के कारण विवि के छात्र भड़क गये। हजारों की संख्या छात्रों ने पुलिस पर हमला बोल दिया। घबराये पुलिसकर्मियों को विवि से भागना पड़ा। करीब चार बजे पुलिस ने गिरफ्तार हनुमान बेनीवाल और अन्य सभी छात्रनेताओं को सेंट्रल जेल भेज दिया।

इससे तीन—चार दिन पहले ही महेंद्र चौधरी की तरफ से मुख्यमंत्री भैंरूसिंह शेखावत तक यह संदेश भेज दिया था कि एबीवीपी कुलपति को हटाने के नाम पर अराजकता करने की योजना बना रही है, इसलिये वहां पर कुछ भी हो सकता है। इस सूचना के चलते पुलिस का भारी जाप्ता तैनात किया गया था।

राजस्थान विवि इतिहास में पहली बार किसान परिवार से आने वाला एक आम लड़का छात्रसंघ अध्यक्ष बना था। माना जाता है कि इसके कारण पुलिस का रवैया भी एक तरफा था। महेंद्र चौधरी किसान परिवार से आते थे और उन्होंने एबीवीपी के उम्मीदवार को मात दी थी। जिसका दर्द भी भाजपा सरकार को था।

जेल में बंद सभी 19 जनों ने मीटिंग कर सीएम के पास संदेश भेजा की कल बड़ी दिक्कत हो जायेगी। सीएम शेखावत ने एसपी अजीत सिंह से रिपोर्ट मांगी और मामले पर फटकार भी लगाई। तब मुख्यमंत्री भैंरूसिंह शेखावत ने तय किया कि इस आंदोलन को और बढ़ने से रोकना है तो महेंद्र चौधरी, हनुमान बेनीवाल और कुलदीप शर्मा समेत सभी 19 जनों को रात को ही रिहा करना ही एकमात्र विकल्प था, वही हुआ।